महेश भट्ट
उन्होंने आगे कहा, “अब इस डिजिटल युग में प्रत्येक व्यक्ति के पास बिना किसी रोक-टोक के किसी भी लोकप्रिय चीज पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने की सुविधा है। इतिहास के किसी भी मोड़ पर कोई भी मनोरंजनकर्ता या कहानीकार, फिल्म निर्माता इतना असुरक्षित कभी नहीं रहा, जितना आज है। यह थोपना कि दुनिया ऐसी होनी चाहिए, एक काल्पनिक विचार है। सवाल यह नहीं है कि क्या ऐसा होना चाहिए। सवाल यह है कि हम किससे निपट रहे हैं?”