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B'day Spl: राज कपूर की मौत के बाद हसरत जयपुरी की हालत हो गई थी ऐसी, सालों बिताई गुमनामी में जिंदगी

Mon, 16 Apr 2018 06:15 AM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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हसरत जयपुरी
राज कपूर की फिल्मों में एक से बढ़कर हिट गाने देने के लिए गीतकार हसरत जयपुरी का नाम विशेष तौर पर जाना जाता है। उनका जन्म 15 अप्रैल 1918 को जयपुर में हुआ था। हसरत जयपुरी का असली नाम इकबाल हुसैन था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई अंग्रेजी में की। बाद में उन्होंने अपने दादा से उर्दू और परशियन भाषा सीखी। 20 साल की उम्र से ही हसरत जयपुरी ने लिखना शुरू कर दिया था। आज उनके जन्मदिन पर आइए हम आपको उनसे जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं।
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हसरत जयपुरी
हसरत जयपुरी ने शुरुआत में बतौर बस कंडक्टर का काम किया, जिसके लिए उन्हें 11 रुपये हर महीने मिलते थे। हसरत जयपुरी मुशायरों में भी शिरकत करने लगे। एक मुशायरे में पृथ्वीराज कपूर ने उनको सुना और राज कपूर से मिलने की बात कही। राज कपूर ने उन्हें फिल्म 'बरसात' में मौका दिया और अपने करियर का पहला गाना 'जिया बेकरार है' लिखा। उनका दूसरा गाना था 'छोड़ गए बालम'।
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hasrat jaiuri
फिल्म 'बरसात' में अपने इस गीत की कामयाबी के बाद हसरत जयपुरी गीतकार के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए। इसके बाद राजकपूर, हसरत जयपुरी और शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने कई फिल्मों मे एक साथ काम किया। हसरत जयपुरी की जोड़ी राजकपूर के साथ 1971 तक कायम रही। 

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HASRAT JAIPURI
संगीतकार जयकिशन के निधन और फिल्म 'मेरा नाम जोकर' व 'कल आज और कल' की नाकामयाबी के बाद राज कपूर ने हसरत जयपुरी की जगह आनंद बख्शी को अपनी फिल्मों के लिए लेना शुरू कर दिया हालांकि इससे हसरत जयपुरी और राज कपूर की दोस्ती में कोई फर्क नहीं पड़ा।
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hasrat jaipuri
हर शख्स का एक दौर होता है, हसरत का भी एक दौर था। शैलेंद्र और जयकिशन की मौत के बाद वह बहुत अकेलापन महसूस करने लगे और राज कपूर के निधन के बाद तो वह बिल्कुल ही टूट से गए। उन्होंने लोगों से भी मिलना जुलना कम कर दिया था। 17 सितंबर 1999 को अपनी मौत से पहले कई साल तक हसरत ने गुमनामी में जीवन बिताया।
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हसरत जयपुरी को राधा नाम की हिन्दू लड़की से प्यार हो गया था लेकिन वह अपने प्यार का इजहार नहीं कर पाए। उन्होंने पत्र के माध्यम से अपने प्यार का इजहार करना चाहा लेकिन उसे देने की हिम्मत वह नहीं जुटा पाए। बाद में राजकपूर ने उस पत्र में लिखी कविता 'ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर तुम नाराज ना होना' को अपनी फिल्म 'संगम' में लिया।
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अपने 40 साल के फिल्मी करियर में हसरत जयपुरी ने करीब 350 फिल्मों के लिए 2000 गीत लिखे। इन फिल्मों में 'बरसात', 'मेरा नाम जोकर', 'आवारा', 'श्री 420', 'चोरी चोरी', 'अनाड़ी', 'जिस देश में गंगा बहती है', 'राम तेरी गंगा मैली' शामिल है। साल 1966 में तेरी प्यारी प्यारी सूरत (फिल्म ससुराल) और 1972 में जिंदगी एक सफर है सुहाना (फिल्म अंदाज) के लिए उन्हें फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला।
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