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Bioscope S2: पहली ही फिल्म से निकाले गए सैफ का इस निर्देशक ने बचाया करियर, पब्लिक ने गाया ‘ओले ओले’

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ये दिल्लगी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी के बेटे सैफ अली खान ने हिंदी सिनेमा में ‘सेफ’ रहने के लिए इन दिनों विलेन का चोला पहनने का फैसला किया है। अजय देवगन की फिल्म ‘तानाजी द अनसंग वॉरियर’ में लोगों को उनकी खलनायिकी पसंद भी आई। और, अब वह इसी फिल्म के निर्देशक ओम राउत की अगली फिल्म में बनने जा रहे हैं रावण। सैफ अली खान का करियर हिंदी सिनेमा में हमेशा दो कदम आगे और चार कदम पीछे ही चलता रहा। ‘तानाजी’ की रिलीज से पहले उनकी फिल्म ‘रेस 2’ के बाद लाइन से एक दर्जन फिल्में फ्लॉप हुईं लेकिन सही समय पर लिए गए एक सही फैसले ने सैफ अली खान का करियर फिल्म ‘तानाजी’ में बचा लिया। सैफ अली खान की डेब्यू फिल्म ‘परंपरा’ यश चोपड़ा ने निर्देशित की थी। शर्मिला टैगोर को लगा था कि उनके करियर को फिल्म ‘दाग़’ से बुलंदियों पर पहुंचाने वाले निर्देशक के हाथों में उनका शादीशुदा बेटा ‘सेफ’ रहेगा लेकिन फिल्म सुपरफ्लॉप रही। सैफ अली खान के करियर की पहली हिट फिल्म रही ‘ये दिल्लगी’ जिसे यश चोपड़ा के सहायक और तमाम हिट फिल्मों के एडिटर नरेश मल्होत्रा ने निर्देशित किया।
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ये दिल्लगी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
पहली ही फिल्म से निकाले गए
फिल्म ‘ये दिल्लगी’ संयोग से बनी फिल्म है। अगर संयोग नहीं होता तो नरेश मल्होत्रा का बतौर डायरेक्टर डेब्यू फिल्म ‘डर’ से हुआ होता। फिल्म ‘डर’ का साराम काम नरेश मल्होत्रा और उनकी टीम ने तैयार किया था। लेकिन, ऐन मौके पर ये फिल्म यश चोपड़ा ने ली। ये पूरा किस्सा मैं बताऊंगा अभी थोड़ी देर में लेकिन पहले आपको ये बताना जरूरी है कि फिल्म ‘परंपरा’ भी दरअसल सैफ अली खान के करियर की दूसरी फिल्म है क्योंकि जो पहली फिल्म उन्होंने बतौर हीरो साइन की थी, वह फिल्म थी ‘बेखुदी’ और उसकी शूटिंग के पहले ही दिन फिल्म के निर्देशक राहुल रवैल ने सैफ को फिल्म से निकाल दिया था। राहुल को सैफ तब बहुत ही बिगड़ैल नवाब लगे थे और उन्होंने फिल्म ‘बेखुदी’ में सैफ को निकालकर एक दूसरे नए चेहरे कमल सदाना को ले लिया था। इस फिल्म में भी सैफ के साथ काजोल ही थीं, लेकिन सैफ को काजोल के साथ की ही हिट फिल्म से आगे बढ़ना तो दोनों के फिर मिलने का संयोग बनी फिल्म ‘ये दिल्लगी’।
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ये दिल्लगी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
निर्देशक की पहली फिल्म
फिल्म ‘बेखुदी’ से बाहर किए जाने को सैफ अली खान ने बरसों बाद अपना पहला सबक माना और ये भी माना कि वाकई उन्हें तब एक्टिंग नहीं आती थी। राहुल रवैल उनसे पहले ही दिन एक इमोशनल गाने पर एक्टिंग करवाना चाह रहे थे और गाने की लाइन के हिसाब से उनके चेहरे के भाव बदल नहीं पा रहे थे। फिल्म ‘परंपरा’ में इसीलिए यश चोपड़ा ने उन्हें तमाम बड़े सितारों के साथ पेश किया। इस बात का एहसान सैफ अली खान अब भी मानते हैं। यश चोपड़ा का बेहद सम्मान करने वाले सैफ अली खान अब भी कभी बातों के बीच यश चोपड़ा का जिक्र आने पर भावुक हो जाते हैं। यशराज फिल्म्स की आने वाली फिल्म ‘बंटी और बबली 2’ में भी वह आखिरी मौके पर शामिल हुए। फिल्म में अभिषेक बच्चन ने काम करने से मना कर दिया तो आदित्य चोपड़ा की एक फोन कॉल पर उन्होंने अभिषेक की जगह काम करने की हामी भर दी थी। खैर हम लौटते हैं अपनी आज के बाइस्कोप की फिल्म ‘ये दिल्लगी’ की तरफ। नरेश मल्होत्रा ने इस फिल्म के बाद बतौर निर्देशक तमाम और फिल्में भी बनाईं। लेकिन, उनके साथ काम करने वाले लोग बताते हैं कि फिल्म ‘ये दिल्लगी’ में उन्होंने एक परिवार बनाया। इसके पहले वह ‘युद्ध’ और ‘त्रिदेव’ जैसी सुपरहिट फिल्में एडिट कर चुके थे और यश चोपड़ा के मुख्य सहायक निर्देशक हुआ करते थे।

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ये दिल्लगी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
जब यश चोपड़ा ने ली ‘डर’ की पटकथा
ये बात जानकर शायद आप चौंक जाएं कि नरेश मल्होत्रा को निर्देशन की शुरुआत दरअसल फिल्म ‘डर’ से करनी थी। फिल्म ‘ये दिल्लगी’ से ही अपने सिनेमैटोग्राफी करियर की शुरूआत करने वाले राजू केजी बताते हैं, “हम सब लोग नरेश जी के साथ एक परिवार की तरह ही काम करते थे। हनी ईरानी (जावेद अख्तर की पहली पत्नी), नरेश जी हम सबने मिलकर जिस कहानी पर काम किया और जिसका सीन डिवीजन वगैरह सब तैयार कर लिया, वह फिल्म थी, ‘डर’। इस फिल्म में हीरो का किरदार तब दीपक मल्होत्रा को करना था। लेकिन उनकी पहली फिल्म ‘लम्हे’ के बाद कोई उनके साथ काम नहीं करना चाहता था। आमिर खान ने ये फिल्म सुनी। ऋषि कपूर ने सुनी। ऋषि कपूर ने ही यश चोपड़ा को ये फिल्म निर्देशित करने की सलाह दे डाली।” यश चोपड़ा अपनी पिछली फिल्म ‘लम्हे’ में दीपक मल्होत्रा के होने का नुकसान उठा चुके थे। उन्होंने नरेश मल्होत्रा से पूरी रेडी स्क्रिप्ट ली। दीपक वाले किरदार में लिया सनी देओल को और जो रोल आमिर खान ने छोड़ा वो मिला शाहरुख खान को। बाकी सब इतिहास है।

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ये दिल्लगी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
सचिन भौमिक ने सुनाई कहानी
अब जब फिल्म ‘डर’ की पूरी पटकथा फिल्म के सारे सीन्स के स्टोरी बोर्ड समेत नरेश मल्होत्रा ने बतौर गुरु दक्षिणा यश चोपड़ा को सौंप दी तो अगली कहानी की तलाश शुरू हुई। ऋषि कपूर की तमाम हिट फिल्मों के राइटर रहे सचिन भौमिक ने नरेश मल्होत्रा को 1954 में रिलीज हुई फिल्म ‘सबरीना’ की कहानी सुनाई जो एक मशहूर उपन्यास ‘सबरीना फेयर’ पर आधारित थी। दो रईस भाइयों के बीच हवेली के एक गरीब ड्राइवर की बेटी के आने की कहानी है सबरीना। ये कहानी नरेश मल्होत्रा ने यश चोपड़ा को सुनाई तो उन्हें तुरंत पसंद आ गई। लेकिन कहानी में पेंच ये फंसा कि इसी कहानी पर लेखक रॉबिन भट्ट अपने भाई महेश भट्ट के लिए फिल्म लिख रहे थे। सचिन भौमिक ने कहा कि अगर नरेश मल्होत्रा जाकर रॉबिन भट्ट से बात कर आएं तो वह उनके लिए फिल्म लिख सकते हैं। नरेश मल्होत्रा जाकर महेश भट्ट से मिले। उन्होने कहा कि अगर रॉबिन को एतराज़ नहीं है तो मैं भी उसके फैसले के साथ रहूंगा। रॉबिन भट्ट ने अपनी पूरी स्क्रिप्ट नरेश मल्होत्रा को सौंप दी लेकिन नरेश मल्होत्रा फिल्म लिखवाने का वादा तो सचिन भौमिक से कर चुके थे। नरेश ने रॉबिन भट्ट से गुज़ारिश की और रॉबिन भट्ट ने इस पर कोई मन खट्टा नहीं किया। हां,  लेकिन शर्त ये जरूर लगा दी कि नरेश मल्होत्रा ने अगर साल भर में ये फिल्म न बनाई तो फिर वह अपनी लिखी पटकथा पर फिल्म बना लेंगे। खैर, ऐसी नौबत आई नहीं और फिल्म बनी, ‘ये दिल्लगी’।
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ये दिल्लगी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
दो करोड़ में बनी फिल्म ने कमाए 15.5 करोड़
सैफ अली खान, अक्षय कुमार और काजोल तीनों के लिए टर्निंग प्वाइंट फिल्म रही, ‘ये दिल्लगी’। मात्र सवा दो करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म ‘ये दिल्लगी’ ने बॉक्स ऑफिस पर करीब साढ़े 15 करोड़ रुपये की कमाई की और यशराज फिल्म्स की उन गिनती की फिल्मों में शामिल हुई जिन्होंने अपनी लागत से पांच गुने से ज्यादा की कमाई बॉक्स ऑफिस पर की। फिल्म में सैफ अली खान का रोल पहले अजय देवगन करने वाले थे, लेकिन बात बनी नहीं। फिल्म का टाइटल भी पहले ‘दिल्लगी’ रखा गया था। लेकिन, ये टाइटल अभिनेता और निर्माता धर्मेंद्र के पास था, और कहते हैं कि उन्होंने किसी नाराज़गी के चलते ये नाम यश चोपड़ा को दिया नहीं तो बाद में फिल्म का नाम ‘ये दिल्लगी’ कर दिया गया।
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ये दिल्लगी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
होठों पे बस तेरा नाम है...
फिल्म ‘ये दिल्लगी’ को सुपरहिट बनाने में इसके म्यूजिक का बड़ा हाथ रहा। ये इकलौती फिल्म है जिसके चार गाने लता मंगेशकर ने एक ही दिन में रिकॉर्ड किए। फिल्म के निर्देशक नरेश मल्होत्रा बताते हैं, “वेस्टन म्यूजिक कंपनी के स्टूडियो में फिल्म के सारे गाने रिकॉर्ड हुए थे। संगीत हम बनाकर ले गए थे और लता जी का उस दिन एक गाना रिकॉर्ड होना था। यश जी आए हुए थे, भाभी जी (पामेला चोपड़ा) भी थीं। दोपहर तक खाना वगैरह खाकर लता जी ने गाने की सिचुएशन सुनी, म्यूजिक सुना और पहला गाना रिकॉर्ड कर दिया। फिर मैंने पूछा कि अगला गाना रिकॉर्ड करने की तारीख क्या रखी जाए तो उन्होंने पूछा कि गाना क्या है, मैंने उसका भी म्यूजिक सुनाया तो वह बोलीं, ये तो अच्छा है, इसे अभी रिकॉर्ड कर लेते हैं। फिर जब मैंने अगले गाने की डेट की बात की तो वह बोलीं, मेरे लिए एक चाय मंगा दो। तब तक मैं तुम्हारे इस गाने का म्यूजिक सुन लेती हूं। लता जी ने वह गाना भी रिकॉर्ड कर दिया और आश्चर्यजनक बात तब हुई जब उन्होंने उस दिन ही फिल्म का चौथा गाना भी रिकॉर्ड कर दिया।” इन गानों में शामिल था ‘ये दिल्लगी’ का वह गाना जिसने साल 1994 में हंगामा मचा दिया था। काजोल की ऐसी मदहोश कर देने वाली अदाएं तो शायद ही आपने किसी दूसरी फिल्म में देखी हों।

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चलते चलते...
नवंबर 1993 से लेकर अक्टूबर 1994 के बीच हिंदी फिल्मों के जो कैसेट बिके उनमें ‘ये दिल्लगी’ की गिनती तीसरे नंबर पर होती है। वेस्टन म्यूजिक कंपनी ने उस दरम्यान इस फिल्म के 45 लाख कैसेट बेचे थे। पहले और दूसरे नंबर पर जो फिल्में रहीं, वे थी ‘बाज़ीगर’ और ‘मोहरा’। ये वो दौर था जब संगीतकार अनु मलिक एक साथ करीब 35 फिल्मों में काम कर रहे होते थे और गीतकार समीर के पास किसी भी समय कम से कम सौ फिल्मों के गीत लिखने का काम तो होता ही होता था। समीर ने ही फिल्म ‘ये दिल्लगी’ के भी गीत लिखे और फिल्म का संगीत दिया दिलीप सेन- समीर सेन की जोड़ी ने।




(‘बाइस्कोप’ कॉलम में प्रकाशित यह आलेख बौद्धिक संपदा अधिकारों के तहत संरक्षित हैं।)
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