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Bioscope S2: ऋषि कपूर ने फिर नहीं की संतोषी की कोई फिल्म, मीनाक्षी ने लिया इंडस्ट्री छोड़ने का फैसला

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फिल्म ‘दामिनी’  - फोटो : अमर उजाला

कम ही होता है ऐसा कि किसी सितारे के जन्मदिन पर कोई निर्देशक एक दमदार फिल्म रिलीज करे और वह सितारा उस निर्देशक की आगे किसी भी फिल्म में काम न करने का फैसला ले ले। फिल्म ‘दामिनी’ के सपोर्टिंग हीरो सनी देओल के पूरे शहर में लगे पोस्टर देखने के बाद ऋषि कपूर ने ये फैसला लिया था निर्देशक राजकुमार संतोषी के लिए। संतोषी के करियर की ये इकलौती फिल्म भी रही जिसमें वह चाहकर भी फिल्म की हीरोइन नहीं बदल पाए। और, सनी देओल के करियर की भी ये एकमात्र फिल्म ऐसी है जिसमें वह चाहकर भी अपनी करीबी हीरोइन डिंपल कपाड़िया को फिल्म में नहीं ला पाए।

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फिल्म ‘दामिनी’  - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

ऋषि कपूर ने समझी जमाने की चाल

फिल्म ‘दामिनी’ देखा जाए तो एक तरह से कंटेंट ड्रिवेन सिनेमा की तरफ हिंदी सिनेमा की पहली ठोस शुरूआत उस दौर में हो रही थी, जिस दौर में आमिर, शाहरुख और सलमान नई जेनरेशन के सिनेमा की कमान संभाल चुके थे और डेविड धवन ‘लाल दुपट्टे वाली’ को छेड़कर उसका नाम पूछने के लिए गोविंदा और चंकी पांडे को मैदान में उतार चुके थे। ऋषि कपूर को जमाने का बदलता चलन समझ आ रहा था और वह अपनी फिल्मों के साथ लगातार प्रयोग भी कर रहे थे। साल 1993 में ऋषि कपूर की चार फिल्में रिलीज हुईं। इनमें ‘दामिनी’ के अलावा शामिल रहीं ‘अनमोल’, ‘धरतीपुत्र’ और ‘गुरुदेव’। फिल्म ‘गुरुदेव’ के निर्देशक थे विनोद मेहरा। जी हां, अभिनेता विनोद मेहरा, जिन्होंने राजेश खन्ना वाले कंपटीशन में दूसरा स्थान पाया था।

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ऋषि कपूर, मीनाक्षी शेषाद्रि - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
मीनाक्षी शेषाद्रि पर अड़े ऋषि कपूर
 
‘दामिनी’ निर्देशक राजकुमार संतोषी की रिलीज हुई दूसरी फिल्म है। फिल्मों ‘अर्ध सत्य’ और ‘विजेता’ में गोविंद निहलानी के असिस्टेंट रहे संतोषी इसके पहले वह ‘घायल’ बना चुके थे और उनके तेवर ऐसे थे कि किसी को वह कुछ समझते नहीं थे। सनी देओल उनकी फिल्म के लिए हां कर चुके थे, हीरोइन के लिए वह मीनाक्षी शेषाद्रि को साइन कर चुके थे। लेकिन तमाम कोशिशें करके भी संतोषी की शेषाद्रि से वैसी ट्यूनिंग नहीं हो पा रही थी जैसी वह चाहते थे और सनी देओल का भी बड़ा मन था कि फिल्म में डिंपल कपाड़िया को ले लिया जाए। लेकिन, ऋषि कपूर अड़ गए कि हीरोइन बदली गई तो वह फिल्म छोड़ देंगे। करीम मोरानी और अली मोरानी फिल्म के प्रोड्यूसर थे, उनका भी बंबई से लेकर दुबई और लंदन तक ठीक ठाक रुतबा बन रहा था, उन्होंने संतोषी को एक दिन बिठाकर समझाया और कायदे से समझाया। उसके बाद फिल्म खत्म होने तक संतोषी ने चूं तक नहीं की।

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मीनाक्षी शेषाद्रि - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
मीनाक्षी को नहीं मिले पुरस्कार
दिलचस्प बात ये है कि इसी साल डिंपल कपाड़िया ने निर्देशक कल्पना लाजिमी की फिल्म ‘रुदाली’ में टाइटल रोल किया और उनकी ये फिल्म भारत की तरफ से आधिकारिक एंट्री बनकर ऑस्कर तक जा पहुंची। और, फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने फिल्म ‘दामिनी’ को यह कहकर रोक लिया कि इसकी कहानी ओरीजनल नहीं है। बहुत बाद में पता चला कि फिल्म ‘दामिनी’ की कहानी अमेरिका में वाकई हुए एक रेप केस पर आधारित है, इस केस पर वहां 1985 में एक फिल्म ‘साइलेंट विटनेस’ बन चुकी थी। जो कुछ भी हो ये फिल्म सनी देओल को मिले नेशनल अवार्ड और उनकी डॉयलॉगबाजी के लिए तो लोगों को खूब याद रही लेकिन फिल्म में मीनाक्षी शेषाद्रि के काबिले तारीफ अभिनय को भुला दिया गया। एक तरह से देखा जाए तो ये फिल्म नरगिस की ‘मदर इंडिया’ के टक्कर की फिल्म रही। ‘मदर इंडिया’ में राधा अपने बेटे को गांव की लाज बचाने के लिए कुर्बान कर देती है। ‘दामिनी’ अपने घर में हुए अपराध का सच सामने लाने के लिए पूरे परिवार को दांव पर लगा देती है, पति समेत।



 
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फिल्म ‘दामिनी’  - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
महिला सशक्तीकरण की दमदार कहानी
फिल्म ‘दामिनी’ की कहानी ये है कि एक रसूखदार परिवार की बहू घर की आया के साथ हुए बलात्कार की घटना पर पर्दा डालने की कोशिशों में मदद करने से इंकार कर देती है। उसे पागल करार दिया जाता है, लेकिन वह पागलखाने से भाग जाती है। रास्ते में उसे मिलता है नशे में धुत एक वकील जो इस मामले में अभियोजन पक्ष का वकील बनना मंजूर कर लेता है। राजकुमार संतोषी की इस फिल्म का तेलुगू में ‘उर्मिला’, तमिल में ‘प्रियंका’, उड़िया में ‘नारी नुहेन तू नारायणी’ नाम से रीमेक किया गया। बांग्लादेश में भी इस फिल्म का रीमेक ‘सौत्तिर बिजॉय’ नाम से हुआ। फिल्म ‘दामिनी’ का संगीत काफी हिट रहा था। हाल ही में दुनिया छोड़ गए श्रवण राठौड़ ने फिल्म के गानों में रिदम का काफी खूबसूरत इस्तेमाल किया था। खासतौर से उस गाने में जिसमें फिल्म देखने वाले लड़कों की निगाहें मीनाक्षी शेषाद्रि से ज्यादा ऋषि कपूर के स्वेटर पर टिकी रही। जी हां, स्वेटर का जैसा फैशन ऋषि कपूर ने दुनिया को सिखाया, शायद ही कोई दूसरा सिखा पाया हो।


 
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फिल्म ‘दामिनी’  - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
चलते चलते...
 
फिल्म ‘दामिनी’ में समीर के लिखे गीतों को नदीम श्रवण ने संगीतबद्ध किया। ने फिल्मफेयर अवार्ड्स में भी खूब झंडे गाड़े। सात नॉमीनेशन जीतने वाली फिल्म ‘दामिनी’ ने बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर, बेस्ट स्टोरी और बेस्ट साउंड के फिल्मफेयर पुरस्कार क्रमश: राजकुमार संतोषी, सनी देओल, सुतानु गुप्ता और राकेश रंजन के लिए जीते। लेकिन, इतनी शानदार एक्टिंग के बाद भी मीनाक्षी शेषाद्रि को कहीं कोई पुरस्कार नहीं मिला। कहते तो ये भी हैं कि इसके लिए फिल्ममेकिंग टीम में शामिल लोग ही जिम्मेदार रहे जिन्होंने मीनाक्षी को मंच पर बुलाने की सूरत में खुद पुरस्कार समारोह में आने से इंकार कर दिया था। मीनाक्षी का साथ देने वाले ऋषि कपूर को भी फिल्म के लिए कहीं कोई पुरस्कार नहीं मिला। यहां तक कि फिल्म के शुरूआती पोस्टरों पर भी ऋषि कपूर का चेहरा नहीं था। संतोषी ने इसके लिए फिल्म के निर्माताओँ से शिकायत भी की लेकिन अपने साथ हुए बर्ताव से मीनाक्षी शेषाद्रि इतनी दुखी हुईं कि उन्होंने हमेशा हमेशा के लिए हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को ही छोड़ देने का मन बना लिया। ऋषि कपूर ने भी इसके बाद कभी राजकुमार संतोषी के साथ काम नहीं किया।

(‘बाइस्कोप’ कॉलम में प्रकाशित यह आलेख बौद्धिक संपदा अधिकारों के तहत संरक्षित हैं।
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