कयामत से कयामत तक
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
चलते चलते...
फिल्म के लीड कलाकारों में से आमिर खान 33 साल बाद भी हिंदी सिनेमा में अपने तिलिस्म के साथ अगली कतार के सितारों में बने हुए हैं। बतौर हीरो उनकी अगली फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ निर्माणाधीन है। जूही चावला भी बीच बीच में फिल्में करती रहती हैं। आखिरी बार वह सोनम कपूर की फिल्म ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ में नजर आई थीं। फिल्म के निर्देशक मंसूर खान ने ‘कयामत से कयामत तक’ के बाद तीन फिल्में और बनाईं, जो ‘जीता वही सिकंदर’, ‘अकेले हम अकेले तुम’ और ‘जोश’। फिल्म ‘जोश’ की कास्टिंग को लेकर उनका अपने चचेरे भाई आमिर खान से मनमुटाव भी हुआ और वह फिल्मों का काम छोड़कर कुनूर में जाकर बस गए जहां उन्होंने एक बड़ा सा फार्महाउस खोला है। वह अपनी पत्नी के साथ कुन्नूर में रहकर ही चीज (Cheese) बेचते हैं और शिक्षण संस्थानों में लेक्चर देने भी चले जाते हैं। आमिर के बुलावे पर वह फिल्म ‘जाने तू या जाने ना’ की मेकिंग के दौरान वापस मुंबई आए थे लेकिन इसके बाद से फिर वह वहीं कुन्नूर में ही हैं। एक खास बात और, ‘कयामत से कयामत तक’ के साथ ही फिल्मों को शॉर्टफॉर्म में बोलने का चलन भी आया, जैसे QSQT, MPK, DDLJ, K3G…