सिंगर भूपिंदर सिंह
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रेखा भारद्वाज कहती है,'मैने बहुत सारे गायकों को देखा है, जो सिर्फ अपने काम से ही मतलब रखते थे। स्टूडियो में आए, गाए और चले गए । लेकिन भूपिंदर सिंह का ऐसा नेचर नही था। वो बिल्कुल घर के सदस्य की तरह थे। जब कभी आसमान उन्हें स्टूडियो में नहीं दिखता था, तो वो पूछते थे। आसमान कहां है, उनके कंधे से बैग हटवाया कि नही। उनका मानना था कि कि बच्चों को खुला छोड़ो, उसे आगे बढ़ने दो, जो वो करना चाहता है, करने दो। बंदिशों में मत रखो,उनको अपनी जिंदगी को महसूस करने दो। अपने बेटे अमरदीप के साथ भी वह ऐसे ही पेश आते थे।'