भूपेन हजारिका
हजारिका ने गुवाहाटी यूनिवर्सिटी में बतौर टीचर की जॉब करना शुरू किया लेकिन ज्यादा दिनों तक वो नौकरी नहीं कर पाए और नौकरी से इस्तीफा दे दिया। पैसों की तंगी के कारण उनकी पत्नी ने भी उन्हें छोड़ दिया। इसके बाद उनका झुकाव संगीत की ओर बढ़ने लगा और उनका ध्यान फिल्मों के गानों पर गया। उन्होंने 'रुदाली', 'मिल गई मंजिल मुझे', 'साज', 'दरमियां', 'गजगामिनी', 'दमन' और 'क्यों' जैसी सुपरहिट फिल्मों में गीत दिए। हजारिका ने अपने जीवन में एक हजार गाने और 15 किताबें लिखीं। भूपेन हजारिका ने साल 2011 में दुनिया को अलविदा कह दिया।