भारती सिंह
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अपने बचपन के दिनों की बात करते हुए भारती सिंह ने कहा, 'मैं गरीबी की भट्टी में बहुत पकी हूं। मैंने बहुत काम किया और मुझसे भी ज्यादा मेरी मां ने किया है। मुझे आज ही याद है जब मेरी मां दूसरों के घर खाना बनाने जाती थीं और कभी-कभी मैंने भी उनके साथ जाती थी। वहीं जाकर मैंने लोगों का घर, किचन और फ्रिज देखती थी और सोचती थी कि हमारा भी कही ऐसा घर हो पाएगा'।