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Begum Akhtar: सही सुर न लगने पर बचपन में संगीत नहीं सीखना चाहती थीं बेगम अख्तर, फिर यूं बनीं मलिका-ए-गजल

Sun, 30 Oct 2022 07:41 AM IST
मेघा चौधरी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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बेगम अख्तर - फोटो : सोशल मीडिया
मलिका-ए-गजल बेगम अख्तर का नाम संगीत जगत में बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। बेगम अख्तर ने ताउम्र संगीत को खुद से जोड़े रखा था। उन्हें दादर और ठुमकी की साम्राज्ञी भी कहा जाता है। गायकी ही नहीं बेगम अख्तर ने कुछ फिल्मों में भी अपनी अदाकारी का जौहर दिखाया है। 7 अक्तूबर 1914 को जन्मी अख्तरी बाई फैजाबादी शादी के बाद बेगम अख्तर बन गईं और इसी नाम से पहचानी गईं। 1974 में आज ही के दिन उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। आज उनकी पुण्यतिथि के मौके पर हम आपको उनके जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातें बताने जा रहे हैं।
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बेगम अख्तर - फोटो : सोशल मीडिया
चार साल की उम्र में खाया जहर
बेगम अख्तर का बचपन का नाम बिब्बी था। वह फैजाबाद के शादीशुदा वकील असगर हुसैन और तवायफ मुश्तरी बाई की बेटी थीं। असगर हुसैन और मुश्तरी बाई को दो जुड़वा बेटियां थीं, जिन्होंने चार साल की उम्र में जहरीली मिठाई खा ली थी। इस घटना में बिब्बी तो बच गईं, लेकिन उनकी बहन का देहांत हो गया। कुछ समय बाद असगर ने मुश्तरी बाई और बिब्बी को छोड़ दिया था। बचपन में बेगम संगीत सीखने उस्ताद मोहम्मद खान के पास जाती थीं। शुरुआती दिनों में वह सुर नहीं लगा पाती थी, जिसकी वजह से उस्ताद ने एक बार उन्हें डांट दिया। इस पर बेगम रोने लगीं और कहा कि उन्हें संगीत नहीं सीखना। उस्ताद ने उन्हें प्यार से समझाया और उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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बेगम अख्तर - फोटो : सोशल मीडिया
रेप के बाद हुई बेटी को बताती थीं छोटी बहन
बेगम अख्तर का पढ़ाई में मन नहीं लगता था, लेकिन उन्हें उर्दू की समझ थी। सात साल की उम्र में उन्होंने गाना शुरू कर दिया, लेकिन उनकी मां मुश्तरी बाई को ये पसंद नहीं था। उन्होंने संगीत की तालीम ली और 13 साल की उम्र में अख्तरी बाई के नाम से जानी जाने लगीं। उसी दौरान बिहार के एक राजा ने उन्हें अपने यहां गाना गाने के लिए बुलाया और उनका रेप कर दिया। इस घटना के बाद वह प्रेग्नेंट हुईं और एक बेटी सन्नो उर्फ शमीमा को जन्म दिया। हालांकि वह अपनी बेटी को लोगों के डर की वजह से छोटी बहन बताती थीं, जिसकी जानकारी बाद में सबको लगी थी।

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बेगम अख्तर - फोटो : सोशल मीडिया
15 साल की उम्र में किया पहला स्टेज शो
15 साल की उम्र में अख्तरी बाई फैजाबादी ने पहली बार स्टेज पर परफॉर्म किया। भूकंप पीड़ितों के लिए चंदा इकट्ठा करने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में सरोजिनी नायडू ने उन्हें सुना और उनके गायन से प्रभावित होकर साड़ी भेंट की। अख्तरी बाई फैजाबादी को लोग उनकी गायकी की वजह से पसंद करने लगे थे, लेकिन कुछ लोग उन्हें तवायफ ही समझते थे। उनकी शिष्या रीता गांगुली द्वारा लिखी गई किताब में उन्होंने कहा है कि एक तवायफ संगठन ने मुश्तरी बाई से एक लाख रुपये में अपनी बेटी सौंपने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया था।

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बेगम अख्तर - फोटो : सोशल मीडिया
सिगरेट के लिए रुकवा दी थी ट्रेन
बेगम अख्तर अकेलेपन से डरती थीं और ऐसे में उन्होंने शराब व सिगरेट का सहारा लिया। धीरे-धीरे उन्हें सिगरेट पीने की लत लग गई। एक बार जब वह ट्रेन में जा रही थीं, तो स्टेशन पर उन्हें सिगरेट नहीं मिली। ऐसे में उन्होंने ट्रेन रुकवा दी और गार्ड से सिगरेट लेने के लिए उसका झंडा और लालटेन छीन लिया। इसके बाद गार्ड ने उन्हें सिगरेट लाकर दी। इतना ही नहीं सिगरेट की लत की वजह से उन्होंने पाकीजा फिल्म छह बार में देखी, क्योंकि वह सिगरेट पीने बाहर आ जाती थी और फिल्म आगे बढ़ जाती थी। वह फिल्मों में गाने के साथ अभिनय भी करती थीं, लेकिन 1939 में फिल्मी दुनिया को छोड़ लखनऊ चली गईं।

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बेगम अख्तर - फोटो : सोशल मीडिया
आखिरी सांस तक गाया गाना
बेगम अख्तर ने 1945 में परिवार के खिलाफ जाकर बैरिस्टर इश्तियाक अहमद अब्बासी से शादी रचा ली और अपना नाम बेगम अख्तर रख लिया। इसके बाद पति के कहने पर गाना छोड़ दिया और बीमार रहने लगीं।1949 में बेगम ने दोबारा से गायकी में वापसी की और तीन गजल और एक दादरा गया। इसके बाद मरते दम तक उन्होंने डॉक्टरों के कहने के बाद भी अपनी गायकी को नहीं छोड़ा। 1974 में बेगम अहमदाबाद के मंच पर कैफी आजमी की गजल गा रही थीं। उस दौरान वह काफी बीमारी थीं और गाते हुए तबीयत और भी बिगड़ गई। डॉक्टरों ने भी उन्हें गाना न गाने की सलाह थी, लेकिन वह नहीं मानी। स्टेज से उन्हें सीधे अस्पताल ले जाया गया, जहां हार्ट अटैक के चलते 30 अक्तूबर 1974 को उनका देहांत हो गया।

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बेगम अख्तर - फोटो : सोशल मीडिया
पाकिस्तान में भी रिकॉर्ड की गजलें और ठुमरी
बेगम अख्तर के पाकिस्तान में बहुत से चाहने वाले हैं। विभाजन के बाद बेगम अख्तर पहली बार 1959 में लाहौर में पाकिस्तान म्यूजिक कांफ्रेंस में भाग लेने के लिए गई थीं। 1970 में बेगम कराची गईं और उन्होंने रेडियो पाकिस्तान, कराची में दो से तीन गजलें और ठुमरी रिकॉर्ड की थीं। 

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