फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Arun Bakshi Birthday: जन्मदिन पर अरुण बख्शी से खास बातचीत, बोले- जिनसे पिटे उन्हीं के लिए गाए फिल्मों में गाने

Sun, 11 Jun 2023 03:44 PM IST
निधि पाल अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
विज्ञापन
1 of 10
अरुण बख्शी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अभिनेता अरुण बख्शी न सिर्फ एक जबरदस्त एक्टर हैं बल्कि जबरदस्त गायक भी है। वह हिंदी सिनेमा के कई बड़े सितारों के लिए गीत गा चुके हैं। 11 जून को पंजाब के लुधियाना शहर में जन्मे अरुण बख्शी ने अपनी कर्मभूमि मुंबई को बनाई क्योंकि उनकी कुंडली में लिखा था कि उनकी कर्मभूमि समुद्र के किनारे होगा। इन दिनों अरुण बख्शी स्टार भारत के शो 'अजूनी' में तेजेन्द्र सिंह बग्गा की  जबरदस्त भूमिका  निभा रहे हैं। अरुण बख्शी मानते हैं कि एक अभिनेता के लिए उम्र कोई मायने नहीं रखता है। इसलिए अपने जन्म का साल किसी से शेयर नहीं करते हैं। अपने जन्मदिन के अवसर पर अरुण बख्शी ने अमर उजाला से खास बातचीत की।

विज्ञापन

2 of 10
अरुण बख्शी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

मां के भजन कीर्तन से हुई परवरिश 

अभिनेता अरुण बख्शी की परवरिश भजन कीर्तन के माहौल में हुई है। इसलिए उनके आचार विचार बहुत ही सात्विक हैं। अरुण बख्शी कहते हैं, 'मेरे पिता आई एन बख्शी डॉक्टर थे, लेकिन उनकी प्रैक्टिस ठीक से नहीं चलती थी। मेरी मां वेद बख्शी भजन कीर्तन करती थी उसी से जो आमदनी होती थी।  उससे मेरा लालन पालन हुआ। बचपन से मुझे क्रिकेटर बनना था। मैंने लुधियाना में क्रिकेटर यशपाल शर्मा के साथ क्रिकेट मैच भी बहुत खेले हैं, लेकिन क्रिकेट के क्षेत्र में मुझे प्रोत्साहित करने वाला कोई नहीं था। और, फिर मेरे कुंडली में लिखा था कि मेरी कर्मभूमि समुद्र के किनारे होगी। बचपन में मुझे किताबें पढ़ने और सिनेमा देखने का बहुत शौक था। ऐसा कोई लाइब्रेरी नहीं बची, जहां जाकर मैंने किताबें नहीं पढ़ी होगीं। घर से मुझे जो पॉकेट मनी मिलती थी, उसे फिल्में देखने और किताबें पढ़ने में खर्च करता था। मुझे देवानंद साहब की फिल्में देखने का बहुत शौक था।'   

इसे भी पढ़ें- Sunny Deol: 'डिस्ट्रीब्यूटर्स कहते थे नहीं खरीदेंगे गदर एक प्रेम कथा', सनी देओल बोले-इसे पंजाबी फिल्म बताते थे

विज्ञापन

3 of 10
अरुण बख्शी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

नाटक में काम करने के लिए पांच रुपये मिलते थे

मुंबई आने से पहले अरुण बख्शी लुधियाना में एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में जॉब करते थे। वह कहते हैं, 'कुछ समय के लिए लुधियाना में पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में काम किया। वहां पर मुझे 227 रुपये महीने का वेतन मिलता था। वहां से छह महीने की छुट्टी लेकर मुंबई साल 1978 में आया। मुंबई आने के बाद जुहू सर्कल के पास 250 रुपये महीने के भाड़े पर कमरा किराये पर ले लिया। यहां के बाद  सबसे पहले मैंने एक पेपर खरीदा यह जानने के लिए कि मुंबई में थियेटर कहां पर होते हैं और मुंबई आते ही इप्टा थियेटर ग्रुप से जुड़ गया। उस समय एक नाटक करने के पांच रूपये मिलते थे और रिहर्सल के दौरान एक कटिंग चाय और वड़ा पाव। बाद में हमने लड़झगड़ के एक नाटक में काम करने के बदले 10 रूपये करवाए। नाटकों में मेरी शुरुआत 'बकरी' नाटक से हुई थी। इस नाटक में 21 गाने थे, जिसे मैं खुद ही अपनी आवाज में गाता था। मैंने सैथ्यु, रमेश तलवार जावेद सिद्दीकी के साथ कई नाटक किए।' 

4 of 10
अरुण बख्शी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अमीन सयानी करते थे सबकी मदद 

उन दिनों मुंबई विविध भारती में अमीन सयानी रेडियो एनाउंसर के तौर पर कार्यरत थे। उनकी आदत ऐसी कि बिना खुद क्रेडिट लिए लोगों की वह मदद करते थे। अरुण बख्शी कहते हैं, 'लुधियाना में नाटक करते- करते मैं जालंधर आकाशवाणी के लिए भी नाटक करने लगा था। वहां एक नाटक करने के लिए 35 रुपये मिलते थे। जब मुंबई आया तो जालंधर आकाशवाणी  की पहचान से यहां भी आकाशवाणी के लिए भी नाटक करने लगा। यहां पर किसी नाटक के लिए 60 रुपये मिलते थे तो किसी के 75 रुपये।  लेकिन मैंने मुंबई में रेडियो एनाउंसर  अमीन सयानी जी के साथ जितने भी नाटक किए,मुझे 75 रुपये के बदले 150 रुपये मिलते थे। जब अमीन सयानी जी से हम कहते थे कि गलती से हमें ज्यादा पैसे मिल गए हैं, तो वह कहते थे कि अकाउंटेंट से गलती हो गई होगी, उसे समझा दूंगा। बाद में पता चला चला कि वह आधे पैसे अपनी तरफ से देते थे ताकि मुझ जैसे कलाकारों की आर्थिक मदद हो सके,लेकिन कभी भी उन्होंने इसका क्रेडिट नहीं लिया।'

विज्ञापन

5 of 10
अरुण बख्शी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

महाभारत में मिली थी कंस की भूमिका 

बी आर चोपड़ा के 'महाभारत' में अरुण बख्शी को सबसे पहले कंस की भूमिका निभाने का मौका मिला था। अरुण बख्शी कहते हैं, 'मुंबई आने के बाद सबसे पहला मौका मुझे रवि चोपड़ा ने एक विज्ञापन फिल्म में दिया था। जिसमें मैं एक मजदूर बना था। इस विज्ञापन की शूटिंग के दौरान रवि चोपड़ा से हमारी अच्छी जान पहचान हो गई।  इसके बाद गोविंदा को सबसे पहला मौका रवि चोपड़ा ने अपनी 40 मिनट की शार्ट फिल्म 'सोने की धरती' में दिया था, उसमें भी मैंने काम किया था। और, जब 'महाभारत' की शूटिंग शुरू हुई तो मुझे कंस की भूमिका ऑफर की गई थी, लेकिन उस समय मैं जे पी दत्ता की फिल्म 'बंटवारा' की शूटिंग कर रहा था। इस वजह से मैं कंस की भूमिका नहीं निभा पाया, बाद में रवि चोपड़ा ने मुझे महाभारत में धृष्टद्युम्न की भूमिका दी। इस भूमिका को लोगों ने खूब पसंद किया।' 

विज्ञापन

6 of 10
अरुण बख्शी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्मों में पहला मौका दिया के. बालाचंदर ने दिया 

रजनीकांत और कमल हासन के गुरु कहे जाने वाले साउथ सिनेमा के चर्चित निर्देशक के. बालचंदर ने अरुण बख्शी को सबसे पहला मौका फिल्मों में कमल हासन फिल्म  'जरा सी जिंदगी' में दिया था। अरुण बख्शी कहते हैं, 'के बालचंदर ने  कहीं रवि चोपड़ा वाले विज्ञापन में मुझे देखा था। जब चेन्नई (मद्रास) से वह मुंबई आए तो मुझे शाम को छह बजे होटल में मिलने के लिए बुलाया और मैं 5.30  बजे ही पहुंच गया।  छह बजने में एक मिनट कम थे, तभी मैंने दरवाजे की घंटी दबाई और उनके असिस्टेंट ने दरवाजा खोला। के बालाचंदर की नजर जैसे ही मुझपर पड़ी, मुझे देखते ही फिल्म में पेंटर के रोल के लिए फाइनल कर लिया। तुरंत मुझे चेन्नई (मद्रास) के लिए निकलना था। वह मेरी पहली हवाई यात्रा थी। मैंने अपने दोस्तों से पहले ही पूछ लिया था कि एयरपोर्ट पर कैसे एंट्री करते हैं और अंदर क्या- क्या होता है? उस समय के बालचंदर के जिस असिस्टेंट सुरेश क्रिस्सना ने दरवाजा खोला था वह बाद में  साउथ के बहुत बड़े निर्देशक हुए। हिंदी में वह सलमान खान को लेकर फिल्म 'लव' का निर्देशन कर चुके हैं।' 

विज्ञापन

7 of 10
अरुण बख्शी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म 'कर्मा' में गाने का पहला मौका 

निर्माता - निर्देशक सुभाष घई की फिल्म 'कर्मा' में अरुण बख्शी को सबसे पहले गाने का मौका मिला। अरुण बख्शी कहते हैं, 'नाटक 'बकरी' में मैं गाता ही था।  लक्ष्मीकांत प्यारेलाल जी कहीं मुझे कुछ गुनगुनाते हुए सुना होगा और फिल्म 'कर्मा' के  चार लाइन का गीत  'जात  ना पूछे पात ना पूछे' ना पूछेगा तेरा धर्मा' रब तेरा पूछेगा बंदे' क्या था तेरा कर्मा'  गाने का मौका दिया। इस फिल्म का जब महबूब स्टूडियो में मुहूर्त हुआ तो मेरे ही गए इस गाने से मुहूर्त हुआ और उस समय दिलीप कुमार, नसीरुद्दीन शाह,अनिल कपूर और जैकी श्रॉफ वहां मौजूद थे। इस गाने को लोगों ने खूब पसंद किया। यह गाना हिट हुआ तो मेरे मन में यह सवाल आया कि मुझे बनना क्या है ? एक्टर बनना है या फिर सिंगर बनना है। मैं अपने आप में मंथन कर रहा था। तभी मेरे अंतरात्मा से आवाज आई कि दोनों बनना है। तब से लेकर आज तक मैं एक्टिंग भी कर रहा हूं और गाने भी गा रहा हूं। सरस्वती मां की मुझपर कृपा रही है कि अब तक 350 गाने गा चुका हूं। तब से न थका हूं और ना ही रुका हूं।' 

8 of 10
अरुण बख्शी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

खुन्नस में ऐसे बनी 'तुन्ना तुन्ना' 

अभिनेता संजय दत्त की फिल्म 'अधर्म' का गीत 'तुन्ना तुन्ना '  खूब लोकप्रिय हुआ था। अरुण बख्शी कहते हैं, 'नितिन मनमोहन की फिल्म 'अधर्म' में मैंने काम किया था, तो उनके  पास अपना चेक लेने गया था, लेकिन सामने से मुझे चेक मांगना अच्छा नहीं लग रहा था। वह मुझे संगीतकार आनंद मिलिंद के यहां लेकर गए। उनके यहां आधा गाना बना हुआ था 'आसमा को धरती पर लाने वाला चाहिए', लेकिन इस गाने की शुरुआत कहा से हो, किसी को समझ में नहीं आ रहा था। मैं खुन्नस में था कि मेरे पैसे नहीं मिले हैं। नितिन मनमोहन  मुझसे  बोले कि कुछ करो। मैंने कहा कि अभी बनाता हूं। मुझे लगा कि क्या मालूम गाना बनाने के बाद पैसा दे दे?  'आसमा को धरती पर लाने वाला चाहिए' के आगे जो शक्ति कपूर फिल्म में 'तुन्ना तुन्ना' गाते हैं वह मैंने लिख दिया। फिर आनंद मिलिंद ने पूछा कि गाना कौन गाएगा? बाकी लाइनें अमित कुमार गा चुके थे।  नितिन मनमोहन ने मेरी तरफ इशारा किया। मैंने कहा कि किसी नए सिंगर से गवा लो। नितिन मनमोहन ने कहा कि नहीं गा पाओगे तो किसी और से डब करवा लेंगें। मैंने कहा कि अब तो मैं गाऊंगा और एक ही टेक में पूरा गाना गा दिया।' 

 

9 of 10
अरुण बख्शी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

जिस हीरो से मार खाई उसी के लिए गीत गाए 

फिल्म 'अधर्म' के गीत 'तुन्ना तुन्ना' की सफलता के बाद अरुण बख्शी को अच्छे  रोल और अच्छे  गाने के भी मौके मिलने लगे। अरुण बख्शी कहते हैं, 'इससे पहले  ज्यादातर फिल्म में मेरे कैमियो रोल ही होते थे, चाहे वह गोविंदा के साथ फिल्म 'स्वर्ग' के डायरेक्टर का रोल हो या कोई और फिल्म। आज तो मेरे कैमियो वाले रोल एक्टिंग स्कूल में पढ़ाए जाते हैं। कैमियो रोल करते -करते बड़ा ब्रेक अजय देवगन की  फिल्म 'एक ही रास्ता' में मिला। इस फिल्म में मेजर का बहुत ही शानदार रोल रहा था। उसके बाद 'हम हैं बेमिसाल', 'जालिम', 'फतेह' जैसी कई फिल्मों में अच्छे अच्छे रोल मिले। उस समय बड़ी कमाल की बात यह थी कि हीरो से मार खाओ और हीरो के लिए गाओ। 'इलाका' में संजय दत्त के साथ काम किया और उनके लिए गीत 'ये दुनियां क्या चाहे मनी मनी' गाया। धर्मेंद जी के लिए फिल्म 'हम सब चोर है' में 'सोणा सोणा मुखड़ा'  गाया, अक्षय कुमार के लिए फिल्म 'जय किशन के लिए  'झूले झूले लाल दम मस्त कलंदर' गाया, अक्षय कुमार के लिए एक और फिल्म 'आंखे' में  'फतेला जेब सील जाएगा' के अलावा जीतेन्द्र,परेश रावल, अनुपम खेर और कादर खान जैसे कई सितारों के लिए गाने गाए।'      

विज्ञापन

10 of 10
अरुण बख्शी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

पान के शौक में 12 गाने फ्री में गा दिए 

अभिनेता अरुण बख्शी को पान खाने का बहुत शौक है, मुंबई में रहते हैं तो  जुहू के पृथ्वी थियेटर के पास के  पान की दुकान से ही पान खाते हैं। अरुण बख्शी कहते हैं, 'मेरे पान खाने के इसी शौक ने मुझसे फ्री में 12 गाने गवा दिए। उन गानों का नाम नहीं लेना चाहूंगा। कहीं बार ऐसा हुआ कि निर्माताओं के पास पैसे नहीं होते थे तो उसके लिए एक पान पर गा देता था। मेरी परवरिश भजन और कीर्तन के बीच हुई है, तो मेरा व्यवहार वैसा ही है। मैं अपनी सामर्थ्य के मुताबिक लोगों की मदद करता रहता हूं। अगर मैंने किसी को पैसे उधार दिए हैं, तो उससे कभी वापस नहीं देता हूं क्योंकि पैसे वापस मांगने के चक्कर में रिश्ते खराब हो जाते हैं। मैं यह कहकर पैसे देता हूं कि मुझे वापस आपसे नहीं चाहिए। मैंने आजतक अच्छे रिश्ते ही मनाए हैं, यही मेरी असली जमा पूंजी है।’   

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें