सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ के साथ अरुण मित्र
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अच्छा, निर्देशक बनने से पहले आपने अभिनय भी खूब किया है, अपनी अभिनय यात्रा के रंग तो गिनाइए?
मैंने साल 2005 में लखनऊ में रंगमंच पर खूब काम किया। मेरा पहला नाटक ‘एक बयान’ था, जिसका लेखन और निर्देशन जितेंद्र मित्तल ने किया। इसमें मेरी नकारात्मक भूमिका थी। लखनऊ में ही मैंने राज बिसारिया, सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ और ललित सिंह पोखरिया सानिध्य में अभिनय की काफी कुछ बारीकियां सीखीं। लखनऊ की ही भारतेन्दु नाट्य अकादमी से मैंने अभिनय में दो साल का डिप्लोमा किया।