फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

EXCLUSIVE: महिला किरदारों पर फिल्में बनाने का अनुष्का का ये है असली राज, परदे पर वापसी की तैयारी

विज्ञापन
1 of 8
anushka sharma - फोटो : instagram
उत्तर प्रदेश के शहर अयोध्या में जन्मीं अनुष्का शर्मा का ननिहाल गढ़वाल में हैं। परवरिश उनकी बंगलुरू में हुई और ससुराल नई दिल्ली है। ये विस्तार अनुष्का को अब बतौर फिल्म निर्माता बहुत मदद कर रहा है। भाई कर्णेश शर्मा मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़ उनके साथ उनकी कंपनी क्लीन स्लेट फिल्म्स चलाते हैं। कहानियों के चयन के अपने तरीकों, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में नए लोगों को मौका देने के अपने इरादों और बतौर अभिनेत्री अपनी नई फिल्म के वादों पर अनुष्का शर्मा ने ये एक्सक्लूसिव मुलाकात की पंकज शुक्ल से।

वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 8
अनुष्का शर्मा भाई कर्णेश के साथ - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
बतौर अभिनेत्री हिंदी सिनेमा की ट्रेंडसेटर फिल्में चुनने के बाद बतौर निर्माता भी आप एनएच 10 से लेकर परी, फिल्लौरी और बुलबुल जैसी लीक से इतर फिल्में बना रही हैं, आपका कहानी चुनने का तरीका क्या है?
जब से मैंने और कर्णेश ने ये तय किया कि हम फिल्में बनाना चाहते हैं तो हम दोनों ने ये तय किया कि हम ऐसी फिल्में बनाना चाहते हैं जैसी हम देखना चाहते हैं। ऐसी फिल्में जिनमें आपको लगता है कि कोई गंभीर बात बोली जा रही है लेकिन ये बात बहुत आसानी से बोली जा रही है। हमारी कहानियां उपदेशात्मक नहीं हैं। और, न ही आपको ज्यादा ज्ञान दे रही हैं। हम ये कहानियां बहुत ही साधारण तरीके से बता रहे हैं। लेकिन, इनको कहने के लिए जो हम वातावरण बना रहे हैं वह हम बहुत ही मनोरंजक बना रहे हैं। खूबसूरत बना रहे हैं। हमारी कहानियों में किस्से कहने का तरीका बिल्कुल अलग रहेगा। हमने अपनी इसी सोच को ध्यान में रखकर कहानियां चुनी हैं।
विज्ञापन

3 of 8
anushka sharma - फोटो : instagram
आपने अब तक जितनी फिल्में बतौर निर्माता बनाई हैं, उनमें कहानियां महिला किरदारों के नजरिये से ही कही गई हैं, इसके पीछे कोई सोची समझी वजह?
ये एक संयोग है। फिर क्या है कि लड़कियों की कहानियां हमेशा एक मजबूत संदेश लेकर आती हैं। ये कहानियां मजबूत इसलिए भी होती हैं क्योंकि हमारे आसपास भी जो महिला किरदार होते हैं, उनकी गहराई ज्यादा होती है। आप देखेंगे कि महिला किरदारों की कहानियां हमें बहुत ज्यादा सुनाई भी नहीं गईं। आमतौर पर जो फिल्में हमारे देश में बनी हैं, उनमें से ज्यादातर जिंदगी को किसी पुरुष को नजरिये से देखा जाता है। कहानी के महिला किरदार उतनी गहराई से नहीं दिखाए जाते। हम ऐसी ही कहानियां बोलना चाहते हैं जिनमें महिला किरदारों के नजरिये से कोई बात कही जा रही है। क्योंकि, इसमें एक नयापन है। क्योंकि, हममें से ज्यादातर लोगों ने उस प्वाइंट ऑफ व्यू की कहानी सुनी ही नहीं। यह कहानियां कहने का हमारा नजरिया है। हम खुश हैं कि लोगों को ये दिख रहा है और उसकी तारीफ भी हो रही है।

4 of 8
अनुष्का शर्मा भाई कर्णेश के साथ - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
आपने कुछ दिन पहले एक बात कही कि मुंबई में जो लोग नए नए काम करने आते हैं क्लीन स्लेट फिल्म्स उनका घर है। आपकी फिल्म बुलबुल में अन्विता को करियर शुरू करने के 15 साल बाद निर्देशन का मौका मिला है। तो युवाओं को आपके यहां मौका मिलना कितना आसान है?
हमने अपना ये प्रोडक्शन हाउस अभी शुरू किया है। मैं और कर्णेश दो लोग ही इसे मिलकर चलाते हैं। कोई लंबा चौड़ा स्टाफ नहीं है। पूरी पारदर्शिता है। अभी तक जो हुआ है उसमें पहले हमारे साथ जिन लोगों ने काम किया है, हम उन्हीं के साथ आगे बढ़ते जा रहे हैं।  जैसे अन्विता ने पहले हमारे साथ परी में काम किया है, फिल्लौरी में काम किया है। अंशय लाल जो बुलबुल के क्रिएटिव प्रोड्यूसर हैं उन्होंने फिल्लौरी निर्देशित की थी। सुदीप शर्मा ने अपनी पहली फिल्म जो लिखी थी एनएच 10, वह हमारे साथ बनाई फिर पाताल लोक में जाकर वह क्रिएटिव बने। प्रोशित रॉय ने परी निर्देशित की, उसके पहले फिल्लौरी में वह असिस्टेंट डायरेक्टर रहे।
विज्ञापन

5 of 8
अनुष्का शर्मा - फोटो : instagram
आपके कहने का मतलब काम करते करते लोगों के साथ एक अलग तरह की सहूलियत हो जाती है?
नहीं, मैं ऐसा नहीं बोलूंगी कि सहूलियत या कंफर्ट लेवल हो जाता है। प्रोशित ने भी अपनी पहली फिल्म जब वो असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर आए थे तो वह उनकी पहली फिल्म ही थी। प्रोफेशनल्स के तौर पर ही हम मिले थे। हमारा काम करने का तरीका इतना पारदर्शी है कि ऐसा नहीं कोई टीम है या बीच में कोई बंदा है और हमारे पास चीजें फिल्टर होकर या वाया वाया होकर पहुंच रही हैं तो प्रोशित ने हमसे बात की और इसी तरह अन्विता की बात हुई कर्णेश से। अन्विता और प्रोशित ने कर्णेश को कहानी पिच की और ये लोग आकर मुझसे कोलकाता में मिले जहां मैं काम कर रही थी। हम लोग नए नए लोगों के साथ काम कर पा रहे हैं, उनको मौका दे पा रहे हैं तो इसलिए कि हम लोग अच्छी कहानियां ढूंढ रहे हैं। हमारे यहां और कोई और कसौटी नहीं है। ऐसे ही होता है जब आप एक ऐसा वातावरण बनाते हैं और लोगों को ये भरोसा दिलाते हैं कि आप हमसे खुलकर बात कर सकते हैं तो नए लोग आगे आते हैं। हमारे यहां इस बात का संकोच किसी को नहीं होता कि मुझसे या कर्णेश से कोई बात कैसे कही जाए। किसी तरह का कोई भय जैसा माहौल नहीं है हमारे यहां।
विज्ञापन

6 of 8
अनुष्का शर्मा - फोटो : Social Media
ओटीटी और खासतौर से नेटफ्लिक्स को लेकर कम से कम हिंदी पट्टी के दर्शकों की ये धारणा बनती रही है कि इस पर या तो वो दिखेगा जो सिनेमाघरों में दिखाया नहीं जा सकता या फिर वह जो सिनेमाघरों के लिए बिक नहीं सकता। बुलबुल ने इस धारणा को बदलने में मदद की है। आपकी क्या प्रतिक्रिया है इस पर?
मेरा तो बस यही मानना है कि ओटीटी पर दुनिया में बहुत अच्छा कंटेंट बन रहा है। और, लोग बहुत अच्छा कंटेंट देखने की आदत भी डाल रहे हैं। हमने कभी सिनेमा या ओटीटी के बीच कोई भेदभाव नहीं किया कि ये फिल्म सिनेमाघरों के लिए बना रहे हैं तो इसे थोड़ा बेहतर तरीके से बनाएं और ओटीटी के लिए बना रहे हैं तो बस ऐसे ही। नहीं, हम लोग जो करेंगे उसको बहुत सही तरीके से और जिस तरीके से कहानी को बताना चाहिए, उसी तरीके से उसको बनाएंगे। सिनेमा हमारा जुनून है। हमारी ईमानदारी है। हमारा भरोसा है। जिस कहानी में हमारा भरोसा है, हम उसके साथ जी जान से खड़े हैं। नेटफ्लिक्स के हम शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने हमें अपनी कहानी को अपनी तरह कहने की पूरी छूट दी। ये बहुत जरूरी भी है। अगर हम लोग कुछ नया करना चाहें और हमें वह छूट ही न मिले तो हो नहीं पाएगा ना। मुझे खुशी है कि आपने ये बात छेड़ी। हम लोग चाहते हैं कि ओटीटी को लेकर बनी ये धारणा बदले कि जो सिनेमाघरों के लिए नहीं हो पाया, उसे यहां ओटीटी पर डाल दो। यह एक गलत प्रवृत्ति है। ओटीटी एक बहुत अच्छा निवेश है हमारे देश के लिए कि हम लोग इस प्लेटफॉर्म की वजह से अपनी कहानियां पूरी दुनिया को दिखा सकते हैं। हमारे पास इतनी ज्यादा और इतनी विविधता वाली कहानियां हैं कि मुझे नहीं लगता कि किसी दूसरे देश के पास होंगी।
विज्ञापन

7 of 8
अनुष्का शर्मा भाई कर्णेश के साथ - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
ओटीटी का विस्तार अब गांवों, कस्बों और छोटे शहरों तक हो रहा है। आपकी योजनाओं में ये इलाके कितना शामिल हैं?
मेरा और कर्णेश का भी यही सपना है कि ये ओटीटी का जितना विस्तार हमारी कहानियों के जरिए हो सके, जरूर हो। हम देश के कोने कोने के साथ साथ पूरी दुनिया में पहुंचें। कर्णेश को कहानियां पहचानने की बहुत अच्छी समझ है। अब तो खैर वह सारी कहानियां सुनते ही हैं, लेकिन जब मैं फिल्मों में काम करने आई तब मैं किसी से नहीं पूछती थी कि मुझे ये फिल्म करनी चाहिए क्या या कि आप मुझे पढ़ के बताओ ये कहानी ठीक है कि नहीं। मैं हमेशा कहानी पढ़ने के बाद कर्णेश के साथ उस पर विचार करती थी।
विज्ञापन

8 of 8
anushka sharma - फोटो : instagram
ठीक है, अब एक सवाल आपके प्रशंसको की तरफ से कि आप परदे पर वापस कब आ रही हैं?
क्या है कि अभी कोविड 19 ने ऐसा कर दिया कि सब ठुड्ढी पर हाथ टिकाए बैठे हैं कि क्या करें। आज से चार महीने पहले आपने मुझसे ये सवाल किया होता तो मैं इसका जवाब बहुत आसानी से दे सकती थी। इन चार महीनों के दौरान काफी कुछ योजनाएं बदल गई हैं। अभी कुछ समझ नहीं आ रहा कि हालात कब सामान्य होंगे, लेकिन हां, मेरा ये वादा है कि इस बार जैसे ही हालात सामान्य होंगे, मैं अपनी अगली फिल्म का एलान कर दूंगी।




पढ़ें: Sushant Singh Rajput Case: बयान दर्ज करवाने बांद्रा पुलिस स्टेशन पहुंचे राजीव मसंद, सुशांत की फिल्मों को दी थी नेगेटिव रेटिंग
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें