लेखक, निर्देशक और निर्माता अनुराग कश्यप को हिंदी सिनेमा में सवाल करने वाले सिनेमा के सूत्रधार के तौर पर देखा जाता है। जमाने के साथ अब अनुराग भी बदल रहे हैं। उनका गुस्सा कम हो रहा है। वह अनावश्यक बहसों से दूर रहने की कोशिश करते हैं और अपना पूरा ध्यान भारतीय कहानियों को दर्शकों तक पहुंचाने में लगा रहे हैं। नेटफ्लिक्स की चर्चित वेबसीरीज सेक्रेड गेम्स के दूसरे सीजन की रिलीज के मौके पर अमर उजाला के पाठकों के कुछ सवालों के जवाब दिए इसके निर्देशक अनुराग कश्यप ने।
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Anurag Kashyap
- फोटो : Amar Ujala, Mumbai
फिरोजाबाद के अमित भारती पूछते हैं कि इंजीनियर बनते बनते आप फिल्ममेकर कैसे बन गए?
यह मेरा निजी फैसला था और उस फैसले पर मैं कायम रहा। जैसी भी जिंदगी अब तक जा रही है उससे मैं बहुत खुश हूं। जो भी युवा मुझसे सलाह मांगते हैं, उनसे भी मैं यही बोलता हूं कि तुम्हारी जिंदगी है और इसे जैसे तुम जीना चाहो, वैसे ही जीना चाहिए। जो भी तुम फैसला लोगे, जो भी करोगे, उसका फल यहीं इसी जिंदगी में मिल जाएगा।
कानपुर के हेमंत जोशी जानना चाहते हैं कि नवाजुद्दीन सिद्दीकी से आपकी पहली मुलाकात कब और कहां हुई?
ये उन दिनों की बात है जब मैं फिल्म शूल कर रहा था। नवाजुद्दीन मुझे मुंबई लोकल ट्रेन के एक स्टेशन पर मिले। राजपाल यादव भी उनके साथ थे। उन दिनों में मेरे पास उनको देने के लिए कोई काम नहीं था और उन्हें काम चाहिए था। तो फिल्म शूल के एक दृश्य में एक वेटर का काम था। नवाजुद्दीन उसे करना चाहते थे और मेरा मानना था कि उनके जैसे अभिनेता के लिए ये एक तरह की बेइज्जती है। लेकिन, नवाजुद्दीन बोले कि ये काम करके मुझे जो आज के पांच सौ रुपये मिलेंगे, वह मुझे चाहिए।
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kalki koechlin
- फोटो : Amar Ujala, Mumbai
गाजियाबाद के आरिफ मलिक का सवाल है कि सेक्रेड गेम्स बनाने का विचार आपके पास कब आया और जब इसकी स्क्रिप्ट सुनने के बाद नवाजुद्दीन सिद्दीकी की क्या प्रतिक्रिया रही?
सेक्रेड गेम्स सीरीज बनाने के लिए नेटफ्लिक्स ने विक्रमादित्य मोटवाने को चुना और फिर विक्रमादित्य मोटवाने ने हम सबको चुना। सीरीज के लेखक वरुण ग्रोवर और विक्रमादित्य मोटवाने को ही इस सबका क्रेडिट जाता है। इन लोगों ने इस सीरीज को तीन चार साल जिया है। जहां तक नवाजुद्दीन सिद्दीकी की इस सीरीज से जुड़ने की बात है तो मैंने उन्हें फोन किया और कहा कि एक किरदार है जो तुम्हें चारों तरफ लेकर जाएगा। बस इसी बात पर उन्होंने हां कर दी। तब तक नवाजुद्दीन ने इस सीरीज की स्क्रिप्ट नहीं पढ़ी थी।
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Nawazuddin, Kalki and Pankaj
- फोटो : Amar Ujala, Mumbai
उन्नाव के मनोज कुमार चौधरी कहते हैं कि देश में अधिकतर लोग गलत तथ्यों के चलते भ्रमित हो रहे है ऐसे में किसी घटना विशेष का सच लोगों तक कैसे पहुंचेगा?
मेरा इस बारे में यही कहना है कि कोई भी बात जब आपको असहज करती है या दिक्कत देती है तो इसका मतलब है कि आप उसे सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। दिक्कत इसमें उस व्यक्ति की कम है। हमारे देश में लोगों की परवरिश ही ऐसी होती है। दूसरे लोग ही हमारे लिए सोचते हैं कि क्या अच्छा है, क्या गलत है। हमें अपने बारे में सोचना अब तक आया नहीं है। जब हमें अपने लिए खुद से सोचना आ जाएगा, तो शायद हम सच को समझने के लिए बेहतर तरीके से तैयार होंगे।
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Nawazuddin Siddiqui
- फोटो : Amar Ujala, Mumbai
वाराणसी से अंकित यादव जानना चाहते हैं कि आपकी वेब सीरीज या फिल्मों में गालियों का इस्तेमाल का क्या असर होगा, पारिवारिक मनोरंजन है क्या सेक्रेड गेम्स?
सिनेमा सामूहिक सोच का विषय नहीं है। किरदार की भाषा क्या होगी, वह कैसे बोलेगा, इसे लेकर हर आदमी की अपनी निजी पसंद होती है। जो शिक्षित दर्शक हैं, जिन्हें चीजों की जानकारी है, उन्हें ये सब देखकर अटपटा नहीं लगता। सेक्रेड गेम्स जैसी कहानियों के दर्शक आज आ गए हों ऐसा नहीं है। ये दर्शक शुरू से थे। लेकिन चूंकि ये काम करते थे या पढ़ाई में व्यस्त थे तो सिनेमाघर नहीं जा पाते थे। सेक्रेड गेम्स के जरिए पहली बार ऐसा हुआ है कि हमारे मुख्य दर्शकों तक हमारा काम पहली बार पहुंच रहा है और काफी आसानी से पहुंच रहा है। बाकी मुख्यधारा के दर्शक तो इसे देख ही रहे हैं।
कानपुर के सुमित गुप्ता का सवाल है कि बतौर अभिनेता आपकी अगली फिल्म कौन सी होगी?
मेरी अभिनय में दिलचस्पी अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है। मैं सिर्फ निर्देशक ही बने रहना चाहता हूं। साउथ की तमाम फिल्मों के ऑफर मुझे मिलते हैं। वहां के प्रोड्यूसर बोलते हैं कि आप एक्टिंग करोगे तो अच्छा रहेगा। लेकिन, अब मुझे और अभिनय नहीं करना। मैं वही करना चाहता हूं जो करने की मेरी अंदर से इच्छा है।
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Pankaj Tripathi
- फोटो : Amar Ujala, Mumbai
लखनऊ से बदर अहमद का सवाल है कि इन दिनों किस तरह की कहानियां आपके दिमाग में चल रही हैं?
अभी तो सेक्रेड गेम्स के बाद सांड की आंख रिलीज होगी और आगे भी जो कहानी कहने लायक होगी, वह हम कहेंगे, उस पर फिल्म बनाएंगे। मेरा कहना यहां ये है कि धीरे धीरे भारतीय सिनेमा वहां पहुंच रहा है जहां इन फिल्मों की कहानियां हमारे बारे में होती जा रही है। 20 साल पीछे की फिल्में देखें तो सब कुछ बस परदेस में बसे भारतीयों के प्यार के आसपास ही घूमता रहता था। यह बड़ी बात है कि सिनेमा की कहानियां भारतीय संदर्भों में बात कर रहीं है। इस सिनेमा के जरिए हम कई बार सवाल भी उठाते हैं लेकिन ये कोई जरूरी भी नहीं है।
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Saif Ali Khanm and Kalki Koechlin
- फोटो : Amar Ujala, Mumbai
कानपुर के मोहम्मद नजम पूछते हैं कि वेब सीरीज सेक्रेड गेम्स के जरिए आप समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं?
संदेश से ज्यादा हम एक कहानी कहना चाहते हैं। परदे पर किसी भी कहानी को देखने का फैसला बहुत निजी होता है। कुछ लोग मानते हैं कि सिनेमा वही है जो पूरे परिवार के साथ बैठकर देखा जा सके। इसे उसी लिहाज से संस्कारी होना चाहिए। वहीं तमाम लोगों को लगता है कि नहीं सिनेमा या ऐसी वेब सीरीज तो फुर्सत के निजी पलों के लिए होती हैं। ये भी सही हैं, वे भी सही हैं। बहस का मतलब यही कि हमें जो बात सही लगे उससे सहमत होना चाहिए जो सही न लगे उससे असहमत भी होना चाहिए।
Anurag Kashyap and Nawazuddin Siddiqui
- फोटो : Social Media
मलिहाबाद के अरशद अब्दुल गफ्फार का आखिरी सवाल है कि क्या कभी आप किसी पुरानी फिल्म का रीमेक बनाना चाहेंगे?
अभी तो पता नहीं। मैं तो आज में जीने वाला इंसान हूं। रीमेक को मैं बुरा नहीं मानता। मैं तो किसी भी फिल्ममेकर को बुरा नहीं मानता। हम इस पर फैसला नहीं ले सकते कि कौन फिल्ममेकर है और कौन नहीं। जो मेरे जैसा सिनेमा नहीं बनाते हैं, मैं जरूरत पड़ने पर उनके समर्थन में भी खड़ा रहता हूं।
(आप भी सिनेमा के मशहूर सितारों से अपने सवाल पूछ सकते हैं। अगर आपका सवाल चुना गया तो हम आपके नाम के साथ संबंधित सितारे का जवाब //यहां और अमर उजाला अखबार में भी प्रकाशित करेंगे। 'सितारों से पूछिए सवाल' सीरीज का अगला सितारा कौन होगा, ये जानने के लिए अमर उजाला बिंदास के फेसबुक पेज (https://www.facebook.com/AmarUjalaBindas) को लाइक कीजिए और नोटीफिकेशन पर नजर बनाए रखिए)