भला है, बुरा है, जैसा भी है, अनुराग कश्यप का हिंदी सिनेमा में नाम बड़ा है। ढर्रे पर बनने वाली फिल्मों से बगावत करके उन्होंने हिंदी में अपनी तरह का सिनेमा बनाया। मठाधीशों से परेशान फिल्म मीडिया के बड़े हिस्से ने उसे इसके चलते साथ भी खूब दिया। अनुराग कश्यप का अपना एक बड़ा ब्रांड बना और फिर खुद अनुराग ने इस ब्रांड को उन्हीं मठाधीशों की गोद में बैठकर पलीता लगा दिया, जिनके विरोध में उनका नाम हुआ था। अब ये सब बातें बीते कल की बाते हैं। अनुराग कश्यप की गिनती एक बार फिर से हिंदी सिनेमा के संघर्षशील निर्देशकों में होती है लेकिन उनके चाहने वाले उनका अब भी पहले जैसा ही सम्मान करते हैं और इसी सम्मान को दर्शाने के लिए बनने जा रही है एक फिल्म ‘अनुराग कश्यप’।