फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अनिल कपूर के ये 10 किरदार हैं एकदम झकास, इन्हीं में से एक ने दिलाया एक्टिंग का नेशनल अवार्ड

Tue, 24 Dec 2019 08:36 AM IST
Mishra Mishra रोहितास सिंह परमार, अमर उजाला, मुंबई
विज्ञापन
1 of 11
Anil Kapoor - फोटो : Social Media
अनिल कपूर का आज 63वां जन्मदिन है । बढ़ती उम्र के बावजूद चुस्ती और फुर्ती के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता अनिल कपूर ने हिंदी की 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, साथ ही अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों और टीवी शोज में काम करके भी भारत का नाम रोशन किया। अपने 40 साल के करियर में फिल्म अभिनेता और निर्माता के रूप में उन्हें छह फिल्मफेयर और दो राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। बाल कलाकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाले निर्माता सुरिंदर कपूर के बेटे अनिल ने कामयाबी की नई ऊंचाइयों को छुआ है। उनके जन्मदिन पर जानिए उनके 10 बेहतरीन किरदारों के बारे में, जिन्होंने बोनी के छोटे और संजय के बड़े भाई को बनाया हिंदी सिनेमा का सुपरस्टार। फिल्म युद्ध में बोली गई उनकी फेवरिट लाइन की तरह ही ये सारे किरदार हैं, एकदम झकास...
विज्ञापन

2 of 11
Meri Jung - फोटो : Social Media
किरदार : अरुण वर्मा
फिल्म : मेरी जंग  (1985)

बेहतरीन संवादों, गंभीर जज्बात, रोमांस, और मारधाड़ से भरपूर फिल्म 'मेरी जंग' सर्वश्रेष्ठ कोर्टरूम ड्रामा फिल्मों में से एक है। इस फिल्म में अनिल कपूर अरुण वर्मा के किरदार में एक बेटे की सभी जिम्मेदारियों को निभाते नजर आए। साथ ही उन्होंने एक भाई का भी किरदार बखूबी निभाया है। अपनी बीमार मां के सामने बेचारे बेटे के रूप में अनिल कपूर का चेहरा सबकुछ बयां करता है। परिपक्व अंदाज में अदालत में पेश की जाने वाली दलीलें उन्हें असली वकील समझने पर मजबूर कर देती हैं। इस फिल्म में अनिल कपूर के सफल अभिनय ने उन्हें बड़े अभिनेताओं की लाइन में खड़ा कर दिया। इस फिल्म में उनका अभिनय उनके सर्वश्रेष्ठ अभिनयों में से एक माना जाता है। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया था।
विज्ञापन

3 of 11
Mr. India - फोटो : Social Media
किरदार : अरुण वर्मा
फिल्म : मिस्टर इंडिया (1987)

मोगैंबो खुश हुआ ...। जितना इस फिल्म के लिए मोगैंबो को याद किया जाता है, उतना ही लोगों को अरुण वर्मा याद है। उस नेकदिल, बेरोजगार और अनाथालय चलाने वाले अरुण वर्मा को कौन याद नहीं रखेगा? वह बच्चों का भाई है, पिता है, माता है और उनका प्राथमिक स्कूल भी है। जब उसके बच्चे परेशान होते हैं तो वह भी परेशान होता है। जब उसके बच्चे भूखे रहते हैं तो वह भी भूखा रहता है। जब एक बच्ची की मौत होती है, तो... वह बुरी तरह टूट जाता है। फिल्म के हर पहलू में अरुण वर्मा खरा सोना निकला है। फिल्म में एक्शन, रोमांस, इमोशन आदि में अनिल कपूर बेजोड़ हैं। 

4 of 11
Tezaab - फोटो : Social Media
किरदार : महेश देशमुख/मुन्ना
फिल्म : तेजाब (1988)

फिल्म तेजाब का नाम जब आता है तो माधुरी दीक्षित पर फिल्माया हुआ एक गाना याद आता है। एक दो तीन...। लेकिन फिल्म के मुख्य कलाकार महेश देशमुख उर्फ मुन्ना के रूप में अनिल कपूर को कौन भूल सकता है? शुरुआत से लेकर अंत तक फिल्म में यही तो दिखाई देते हैं। प्यार हो, तकरार हो या गुंडों से मारामारी हो, मुन्ना सबसे बेहतर दिखाई देते हैं। शानदार संवादों का प्रवाह और चेहरे के सच्चाई वाले भाव अपने काम में अव्वल और वफादार होने का सबूत देते हैं। माधुरी के साथ उनकी बेरुखी और बाद में बेइंतहा प्यार, इस किरदार की विविधता को दर्शाते हैं। इस फिल्म में अद्वितीय अभिनय के लिए अनिल कपूर को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड से सुशोभित किया गया।
विज्ञापन

5 of 11
Ram Lakhan - फोटो : Social Media
किरदार : लखन प्रताप सिंह
फिल्म : राम लखन (1989)

जब भी अनिल कपूर का नाम आता है तो एक गाना जरूर दिमाग में आता है। सजनों का सजन, मेरा नाम है लखन। ये गाना सुनकर आज भी लोग ए जी, ओ जी करना शुरू कर देते हैं। यह गाना अनिल कपूर पर ही फिल्माया गया है। इस फिल्म में इंस्पेक्टर लखन प्रताप सिंह का किरदार बहुत ही लाजवाब है। अपनी मां की कही बात "गुलाम बनोगे तो कुत्ता समझकर लात मारेगी दुनिया, और गुलाम बनाओगे तो शेर समझकर सलाम करेगी दुनिया" को लखन, जब अपने भाई राम को सुनाता है, तो उस सीन में सिर्फ लखन ही नजर आता है। ऐसे और भी कई सीन हैं जिनमें अनिल कपूर अपने अभिनय के दम पर फिल्म पर राज करते नजर आते हैं।
विज्ञापन

6 of 11
Beta - फोटो : Social Media
किरदार : राजू
फिल्म : बेटा (1992)

फिल्म 'बेटा' का भोला-भाला राजू इतना भोला है कि अपनी सौतेली मां की करतूतों को समझ ही नहीं पाता। समझ भी जाता है तो उसपर यकीन नहीं करना चाहता। यकीन करना चाहता है तो भी मां को सजा नहीं देना चाहता। क्योंकि वह बेटा है। एक भोले बेटे के किरदार में अनिल कपूर भोले के साथ में शर्मीले भी हैं। अपनी पत्नी से खुलकर रोमांस भी नहीं करते। लेकिन समय-समय पर सब कुछ करते हैं। एक मां के प्रति उनका प्यार तो इसी फिल्म में झलकता है। आखें बंद करके सिर्फ मां की बात मानना इस किरदार की खास बात है। और सभी चुनौतियों पर अनिल कपूर ने अपने आप को एक सच्चा अभिनेता साबित किया है। इसी के परिणामस्वरूप उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजा गया।
विज्ञापन

7 of 11
Virasat - फोटो : Social Media
किरदार : शक्ति ठाकुर
फिल्म : विरासत (1997)

अपने बाप के मरने के बाद सारी जायदाद बेटे की ही होती है। यह सिर्फ इस फिल्म का नहीं बल्कि इस दुनिया का रिवाज है। लेकिन विदेश में पढ़ा शक्ति ठाकुर इन सब बातों से इतना वास्ता नहीं रखता है। उसे तो लंदन में रहना है और अपनी प्रेमिका से शादी करनी है। बेचारा अपने पिताजी से मिलने गांव आता है और इधर ही का होकर रह जाता है। यहां एक बेटे के रूप में पिता के प्रति प्यार काफी हद तक सच्चाई से रूबरू कराता है। विदेश में पढ़कर आने के बावजूद एक मॉडर्न बच्चे की तरह अपने पिता की विरासत को खराब न करने का रवैया इस किरदार को भारी बल देता है। उस किरदार में अभिनय करते अनिल कपूर खूब फबते हैं। इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर क्रिटिक अवार्ड से सम्मानित किया गया, साथ ही सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए नामित किया गया।

8 of 11
Taal - फोटो : Social Media
किरदार : विक्रांत कपूर
फिल्म : ताल (1999)

ताल के विक्रांत कपूर अपनी तीखी हंसी और बेबाक ढंग से अपनी बात को कहने की वजह से लोगों की नजर में आ गए। ये कोई इत्तेफाक नहीं है। उनका किरदार ही ऐसा है कि सहयोगी अभिनेता होने के बावजूद मुख्य अभिनेता पर भरी पड़ते हैं। किसी को सीख देना और अपने धंधे के बारे में बताने का ढंग पक्का बनिया होने का संकेत देता है। पटकथा का कमाल हो या अनिल कपूर ने खुद ही इतना शोध किया हो, पर्दे पर लाजवाब ही दिखा है। संगीत से दूर दूर तक कोई वास्ता न होने के बावजूद म्यूजिक कंपोजर का इतना बढ़िया अभिनय एक मंझा हुआ अभिनेता ही कर सकता है। इसके लिए इनाम स्वरूप उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहयोगी कलाकार का फिल्मफेयर अवार्ड मिला।  

9 of 11
Pukar - फोटो : Social Media
किरदार : मेजर जयदेव राजवंश
फिल्म : पुकार (2000)

"मेरे देश के लिए मेरा जज्बा मेरी वर्दी में नहीं, मेरी रगों में दौड़ रहा है। ये तू नहीं समझेगा राणा। तू तो पैसे के लिए अपनी मां को भी बेच देगा।" संवाद से ही अंदाजा हो गया होगा कि इसमें अनिल कपूर देश पर मर मिटने वाले एक सिपाही का किरदार निभा रहे हैं। एक ऐसा किरदार जो अपने देश की तरफ उठने वाले हर गलत हाथ को काटने की ताकत और हिम्मत रखता है। एक फौजी के रूप में अनिल कपूर युवाओं का खून खौला देने वाले अवतार में नजर आए। वह किरदार में अपने अभिनय से देशप्रेम की सच्ची परिभाषा बताते हैं। उनके अभिनय की चकाचौंध में बाकी सब धुंधले नजर आते हैं। कहने को फिल्म में एक खूंखार विलेन के रूप में डैनी हैं, लेकिन मेजर जयदेव राजवंश की आवाज से उनके भी पसीने छूट जाते हैं। इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिए अनिल कपूर को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया और फिल्मफेयर अवार्ड के लिए भी नामित किया गया।

10 of 11
Nayak - फोटो : Social Media
किरदार : शिवाजी राव
फिल्म : नायक (2001)

एक पत्रकार से एक दिन का मुख्यमंत्री बनकर जो सुधार शिवाजी राव ने महाराष्ट्र में किए। उसके बाद तो वह सभी महाराष्ट्रियन के चहेते बन गए। हर तरफ सिर्फ शिवाजी के ही चर्चे। अनिल कपूर का यह किरदार एक अलग ही दुनिया दिखता है। एक कलाकार एक झटके में कितने रंग बदल सकता है? उसकी गवाही यह किरदार चिल्ला-चिल्ला कर देता है। पूरी फिल्म में एक्शन हैं, रोमांस है, बेटे का मां-बाप के प्रति प्यार है, जनता के बीच अनिल कपूर का एक अलग रंग है। विपक्ष के प्रति एक कुशल राजनीतिज्ञ की सीख भी देता है। जितनी विविधताएं भारत देश में हैं, उतनी ही यह किरदार अपने अंदर समेटे हुए है। इस फिल्म में अभिनय के लिए अनिल कपूर को फिल्मफेयर अवार्ड की सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की कैटेगरी में नामांकन मिला था।  
विज्ञापन

11 of 11
Welcome - फोटो : Social Media
किरदार : मजनू भाई/सागर पांडे
फिल्म : वेलकम (2007)

इस फिल्म में अनिल कपूर का एक अलग ही रूप देखने को मिला। अंडरवर्ल्ड डॉन के रूप में ऐसे भाई जो हंसा-हंसा कर लोट-पोट होने पर मजबूर कर दे। काफी वजनदार संवाद और रौबदार डील डौल होने के बावजूद आप सिर्फ हंसेंगे। उनका चलने का तरीका, बात करने का ढंग और लोगों से अपनी बात मनवाने का ढंग आपको लम्बे समय तक याद रह सकता है। फिल्म में बोले गए उनके संवाद और कोई-कोई तो पूरा सीन ही आपके दिमाग में घर कर सकता है। गुदगुदाने का काम उन्होंने पहले भी किया है लेकिन ये अभिनय आपके सिर चढ़कर बोलेगा। रोमांस, इमोशन, कॉमेडी, ड्रामा सबकुछ वह अपनी हरकतों से ही कर देते हैं। कभी-कभी तो बोलने की जरूरत ही नहीं होती और आप खिलखिलाकर हंस पड़ेंगे। इस फिल्म से वह अपनी विविधताओं की पहचान कराते हुए नजर आते हैं। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड की सहयोगी कलाकार की सूची में नामांकन मिला था।  

बेटी बचाओ अभियान के एंबेसडर से नहीं हटाई थीं परिणीति चोपड़ा, विवाद के बाद अब सामने आया सच
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें