आनंद राज आनंद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
'हद कर दी आपने' के बाद तो आपने गोविंदा के साथ कई फिल्में की। जब किसी स्टार के लिए संगीत की रचना करते हैं, तो उस स्टार की छवि को कितना ध्यान में रखना पड़ता है?
गोविंदा जी के साथ मेरा अनुभव बाकी संगीतकारों जैसा नहीं रहा। गोविंदा जी मेरे पास सबसे पहले 'परदेसी बाबू' आई, तो उन्होंने मुझे एक जिम्मेदारी दे दी कि मनोज कुमार की फिल्म ' पूरब और पश्चिम ' का गीत 'जब जीरो दिया मेरे भारत ने' जैसा देश भक्ति का गाना चाहिए। लेकिन गाना ऐसा हो, जिसमें परफॉर्म कर सकूं। फिर मैंने गाना लिखा 'जहां पांव में पायल, हाथ में कंगन, हो माथे पे बिंदिया, इट्स हैपेन्स ओनली इन इंडिया' यह गाना गोविंदा जी बहुत पसंद आया। फिल्म में इस गाने की गुंजाइश बिलकुल भी नहीं थी, लेकिन उन्होंने डायरेक्टर मनोज अग्रवाल को बोल दिया कि मुझे नहीं पता कि गाना कैसे और कहां गाना फिट बैठेगा, लेकिन यह गाना फिल्म में चाहिए। आज भी मुझे खुशी होती है कि जब यह गाना 15 अगस्त और 26 जनवरी को बजता है।