जब मन कुछ ऐसा सुनने को करता है, जो दिल को छुए। तो ऐसे में याद आते हैं आनंद बक्शी के गीत। जी हां.. अंग्रेजों के जमाने में फौज की नौकरी करने वाले आनंद बक्शी तब की बंबई आए तो थे गायक बनने लेकिन उनके गाने हिंदुस्तानियों के हर हौसले की मिसाल बन चुके हैं। गीतकार तो बहुत हुए हैं, लेकिन आनंद बक्शी के गीतों की खासियत उनकी सादगी ही रही। उनके बोल इतने सरल होते हैं कि आम आदमी की जुबान उन शब्दों के साथ पल भर में ही सहज महसूस करती है। हर गाने में एक फलसफा और फलसफे का अपना अलग अंदाज। यही वजह रही है कि उन्हें लोगों का भरपूर प्यार मिला। यह उनके लिए लोगों का प्यार ही है जिसकी वजह से उन्हें सबसे ज्यादा 41 बार फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया। चार बार के फिल्मफेयर पुरस्कार विजेता रहे इस शब्दों के बाजीगर की पुण्यतिथि पर आज हम आपको उनके कुछ यादगार गीत सुनाते हैं। और आखिरी में है वह गीत जो आनंद बक्षी ने खुद गाया ..