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इन 10 गानों में आनंद बक्शी ने समझाया जिंदगी का असली फलसफा, सुनिए खुद उनकी आवाज में सुपरहिट बोनस गाना

Mon, 30 Mar 2020 07:47 AM IST
Mishra Mishra अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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anand bakshi - फोटो : Social Media
जब मन कुछ ऐसा सुनने को करता है, जो दिल को छुए। तो ऐसे में याद आते हैं आनंद बक्शी के गीत। जी हां.. अंग्रेजों के जमाने में फौज की नौकरी करने वाले आनंद बक्शी तब की बंबई आए तो थे गायक बनने लेकिन उनके गाने हिंदुस्तानियों के हर हौसले की मिसाल बन चुके हैं। गीतकार तो बहुत हुए हैं, लेकिन आनंद बक्शी के गीतों की खासियत उनकी सादगी ही रही। उनके बोल इतने सरल होते हैं कि आम आदमी की जुबान उन शब्दों के साथ पल भर में ही सहज महसूस करती है। हर गाने में एक फलसफा और फलसफे का अपना अलग अंदाज। यही वजह रही है कि उन्हें लोगों का भरपूर प्यार मिला। यह उनके लिए लोगों का प्यार ही है जिसकी वजह से उन्हें सबसे ज्यादा 41 बार फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया। चार बार के फिल्मफेयर पुरस्कार विजेता रहे इस शब्दों के बाजीगर की पुण्यतिथि पर आज हम आपको उनके कुछ यादगार गीत सुनाते हैं। और आखिरी में है वह गीत जो आनंद बक्षी ने खुद गाया .. 
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एक था गुल और एक थी बुलबुल - फोटो : Social Media
गीत : एक था गुल और एक थी बुलबुल
फिल्म : जब जब फूल खिले (1965)

आनंद बक्शी का लिखा ये गीत अपने आप में पूरी एक सरल कहानी है। जितनी तसल्ली से आनंद ने इसे लिखा है, उतने ही सुर में मोहम्मद रफी ने इसे गाया है। गीत के एक एक बोल जाने पहचाने से लगते हैं। कल्याणजी आनंदजी की मशहूर जोड़ी ने इस गीत को संगीत दिया है। यह सुपरहिट गाना आनंद बक्शी के करियर की सुनहरी शुरुआत लेकर आया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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सावन का महीना - फोटो : Social Media
गीत : सावन का महीना
फिल्म : मिलन (1967)

मुकेश और लता मंगेशकर की आवाज में यह गाना सावन के महीने के बिना भी सावन जैसा सुहावना महसूस कराता है। इसकी वजह आनंद बक्शी के लिखे शानदार बोल ही हैं, जो लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत के साथ बेहतरीन तालमेल बनाते हैं। इस गाने के लिए आनंद बक्शी को पहली बार फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया था।    

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कोरा कागज था - फोटो : Social Media
गीत : कोरा कागज था
फिल्म : आराधना (1969)

हिंदी सिनेमा के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना को कामयाब बनाने में आनंद बक्शी के लिखे गीतों का बहुत बड़ा हाथ रहा है। लता मंगेशकर और किशोर कुमार की आवाज में इस गीत को आज भी रेडियो पर खूब बजाया जाता है। राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर पर फिल्माए गए इस गीत को एस डी बर्मन ने संगीत दिया है। इस गीत के लिए आनंद बक्शी को फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया।

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हम तुम एक कमरे में बंद हों - फोटो : Social Media
गीत : हम तुम एक कमरे में बंद हों
फिल्म : बॉबी (1973)

इस गीत में दो प्रेमियों की दिली ख्वाहिश को सटीक शब्दों में पिरोने का काम आनंद बक्शी से बेहतर शायद ही कोई कर सके। डिंपल कपाड़िया और ऋषि कपूर पर फिल्माए इस गीत को शैलेन्द्र सिंह और लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी है। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की प्रतिष्ठित जोड़ी के संगीत से सजे इस सदाबहार गीत के लिए आनंद बक्शी को फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया।  

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महबूबा महबूबा - फोटो : Social Media
गीत : महबूबा महबूबा
फिल्म : शोले (1975)

फिल्म के गंभीर हालात को हल्का करने वाला ये आइटम नंबर उस समय के गिने चुने हिट आइटम गीतों में से एक है। सलमान खान की मां हेलेन पर फिल्माए गए इस गीत को आर डी बर्मन ने संगीत दिया है और गाया भी उन्होंने ही है। इस शानदार गीत को लिखने के लिए आनंद बक्शी को फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया।  

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आदमी मुसाफिर है - फोटो : Social Media
गीत : आदमी मुसाफिर है
फिल्म : अपनापन (1977)

आनंद बक्शी के लिखे इस गाने को भी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने संगीत दिया है। मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर की आवाज से सजा ये गाना जिंदगी का फलसफा समझाता है। इस गाने को जीतेन्द्र और रीना रॉय पर फिल्माया गया है। तमाम नामांकन के बाद आखिरकार इस गीत के लिए आनंद बक्शी को अपना पहला फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। 

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ओम शांति ओम   - फोटो : Social Media
गीत : ओम शांति ओम  
फिल्म : कर्ज (1980)

नौजवानों को पुरजोर से गाने पर मजबूर कर देने वाला ये गाना उस समय का होने पर भी आज के समय जैसा लगता है। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत से सजा ये गाना आज भी बहुत लोकप्रिय है। आनंद बक्शी के लिखे इस गीत को किशोर कुमार ने भी अपनी आवाज देकर रही बची कसर पूरी कर दी। इस गीत के लिए आनंद बक्शी को फिल्मफेयर के लिए नामित किया गया। 

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तेरे मेरे बीच में - फोटो : Social Media
गीत : तेरे मेरे बीच में
फिल्म : एक दूजे के लिए (1981)

रति अग्निहोत्री और कमल हासन पर फिल्माए गए इस गीत को लता मंगेशकर और एस पी बालासुब्रह्मण्यम ने अपनी आवाज दी है। सुपरहिट फिल्म के इस ब्लॉकबस्टर गीत को लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने अपने अनमोल संगीत से संवारा और कर दिया लोकप्रिय। आनंद बक्शी को इस गीत के लिए दूसरे फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजा गया। इस फिल्म का गीत सोलह बरस की बाली उमर को सलाम भी एक कालजयी गीत है।  

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तुझे देखा तो ये जाना सनम - फोटो : Social Media
गीत : तुझे देखा तो ये जाना सनम
फिल्म : दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (1995)

हिंदी सिनेमा की अब तक की सबसे बड़ी रोमांटिक फिल्म में आनंद बक्शी अपनी कलम का जादू न दिखाएं, ऐसा तो मुमकिन ही नहीं था। शाहरुख खान और काजोल की सुपरहिट जोड़ी पर फिल्माए गए इस गाने के शब्दों को आनंद ने एक धागे में पिरोया है। इस गीत को लता मंगेशकर और कुमार सानू ने गाया है, और संगीत दिया है जतिन-ललित ने। इस सदाबहार गाने के लिए आनंद को फिल्मफेयर अवार्ड से सुशोभित किया गया।

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इश्क बिना - फोटो : Social Media
गीत : इश्क बिना
फिल्म : ताल (1999)

गायक बदलते गए और संगीतकार भी बलदते गए, लेकिन आनंद बक्शी ने अपनी कलम का तिलिस्म बरकरार रखा। इस गीत को ऑस्कर विजेता संगीतकार ए आर रहमान ने संगीत दिया और सोनू निगम, अनुराधा श्रीराम और सुजाता मोहन ने अपनी आवाज दी। ऐश्वर्या राय और अक्षय खन्ना पर फिल्माए इस गीत के लिए आनंद बक्शी को फिल्मफेयर अवार्ड से अलंकृत किया गया।

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बागों में बहार आई.. - फोटो : Social Media
गीत : बागों में बहार आई..
फिल्म : मोम की गुड़िया (1972)  

और, अब आनंद बक्शी का एक बोनस गाना। जैसा कि शुरू में ही हमने बताया कि आनंद बक्शी मुंबई गायक बनने आए थे। वह अपने गाने उर्दू में लिखते थे और संगीतकारों व गायकों को उन्हें गाकर सुनाया करते थे। जिस कांटेस्ट में राजेश खन्ना विनर बनके हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार बने उसी कांटेस्ट में हिस्सा लेने वाले रतन चोपड़ा की फिल्म मोम की गुड़िया में दो गाने आनंद बक्शी ने खुद गाए हैं। इसमें से एक गाना ये है। सुनिए और नीचे कमेंट बॉक्स में लिखिए कि कैसी लगी आपको आनंद बक्शी की आवाज और उनकी आवाज में ये गाना।



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