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आनंद बख्शी के सहारे सुपरस्टार बने राजेश खन्ना, सेना की नौकरी छोड़ थामी कलम और बन गए गीतकार

Sun, 21 Jul 2019 06:19 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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आनंद बख्शी
अपने सदाबहार गीतों से लोगों को दीवाना बनाने वाले बॉलीवुड के मशहूर गीतकार आनंद बख्शी ने लगभग चार दशकों तक सभी के दिलों पर राज किया। अपने लगभग 45 वर्ष लंबे फिल्म जीवन में उन्होंने 4000 से ज्यादा गीत लिखे थे। गीतकार आनंद बक्शी का जन्म आज ही के दिन साल 1930 में मौजूदा पाकिस्तान के शहर रावलपिंडी शहर में हुआ था। 72 वर्ष की उम्र में साल 2002 में निधन हो गया था। आइए आपको बताते हैं उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें...
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आनंद बख्शी

आनंद बख्शी के पिता रावलपिंडी में बैंक मैनेजर थे। किशोरावस्था में आनंद टेलीफोन ऑपरेटर बनकर सेना में शामिल हो गए लेकिन बम्बई और सिनेमा दुनिया में आने की ख्वाहिश ने उन्हें इससे बांधे रखा। बंटवारा हुआ तो बक्शी साहब का परिवार शरणार्थी बनकर हिन्दुस्तान आ गया। जब मायानगरी में कुछ ना हुआ तो आनंद बख्शी ने फिर से सेना ज्वाइन कर ली और कुछ समय तक वहीं काम करते रहे।

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आनंद बख्शी

तीन वर्ष सेना में नौकरी करने के बाद उन्होंने तय किया कि उनकी जिंदगी का मकसद बंदूक चलाना नहीं गीत लिखना है। अपने फिल्मी करियर में बख्शी ने 4000 से ज्यादा गीत लिखे। उन्हें पहली बार गीत लिखने का मौका 1957 में मिला लेकिन सफलता उनसे दामन चुराती रही। 1963 में अभिनेता और निर्देशक राज कपूर ने उन्हें अपनी फिल्म 'मेंहदीं लगे मेरे हाथ' के लिए गीत लिखने का अवसर दिया। उसके बाद सफलता ने कभी आनंद बक्शी का साथ नहीं छोड़ा।

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आनंद बख्शी - फोटो : SELF
आनंद बक्शी के करियर का शुरुआती माइलस्टोन बनी ‘आराधना’, ‘अमर प्रेम’ और ‘कटी पतंग’ जैसी फिल्में, जिनके कांधे चढ़कर राजेश खन्ना भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार बने। आनंद बक्शी ने फिल्मकारों की कई पीढ़ियों के साथ काम किया। उनकी सबसे बड़ी खूबी ये थी कि समय के साथ उनके गीतों का लहजा बदलता रहा।
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आनंद बख्शी

वर्ष 1965 में  'जब जब फूल खिले' प्रदर्शित हुयी तो उन्हे उनके गाने 'परदेसियों से न अंखियां मिलाना' 'ये समां.. समां है ये प्यार का' ,' एक था गुल और  एक थी बुलबुल' सुपरहिट रहे और गीतकार के रूप में उनकी पहचान बन गई। आनंद बख्शी वो नाम है जिसके बिना म्यूजिकल फिल्मों को शायद वो सफलता नहीं मिलती जिनको बनाने वाले गर्व करते हैं। इनका नाम उन गीतकारों में शुमार हैं, जिन्होंने साल दर साल एक से बढ़कर एक गीत फिल्म इंडस्ट्री को दिए हैं।

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