हिंदी सिनेमा में 70 और 80 के दशक में अपने बेहतरीन अभिनय से लाखों दिलों को जीतने वाले कलाकार अमजद खान का निधन 27 जुलाई 1992 में हुआ था। अमजद खान को बॉलीवुड में गब्बर सिंह के नाम से भी जाना जाता है। फिल्म शोले में उनके सवांद भी अमर हो गए। केवल शोले ही अमजद खान की ऐसी फिल्म नहीं, जिनके संवाद इतने मशहूर हुए हों, उन्होंने और भी कई फिल्मों में अपने संवाद से फिल्मी परदे पर धमाल मचाया है। आइए अमजद खान की पुण्यतिथि पर जानते हैं फिल्मों में उनके शानदार संवाद।
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Amjad Khan
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डायलॉग- कितने आदमी थे..?? फिल्म- शोले (1975)
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अमजद खान
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डायलॉग- दौलत के पेड़ जब भी उगते हैं, पाप की जमीन में ही उगते हैं फिल्म- कालिया (1981)
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अमजद खान
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डायलॉग- औलाद न हो दुख होता है, औलाद हो और मर जाए बहुत दुख होता है.... लेकिन औलाद हो और नालायक हो तो बर्दाश्त नहीं होता फिल्म- लावारिस (1981)
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अमजद खान
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डायलॉग- कभी-कभी दुश्मन की जिंदगी उसकी मौत के ज्यादा फायदेमंद होती है फिल्म- कसमें वादे (1978)
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amjad khan
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डायलॉग- इसमें सिर्फ इतनी जिंदगी बाकी छोड़ना कि ये अपनी मौत अपनी आंखों से देख सके फिल्म- मिस्टर नटवरलाल (1978)
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अमजद खान
डायलॉग- लगता है सोडे के बोतल की तरह जोश खत्म हो गया है फिल्म- कुर्बानी ( 1980)
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अमजद खान
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डायलॉग- यहां से 50-50 कोस दूर गांव में जब बच्चा रात हो सोता नहीं है तो, मां कहती है बेटा सो जा, सो जा नहीं तो गब्बर आ जाएगा। फिल्म- शोले (1975)