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14 साल की उम्र में ही शादी के बंधन में बंध गईं थीं अमिताभ की 'मां', इस कारण पिता ने हमेशा के लिए तोड़ा था रिश्ता

Mon, 04 Jan 2021 06:20 PM IST
विजयाश्री गौर एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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nirupa roy - फोटो : Social Media
आज तो पर्दे पर मां के किरदार में  किरण खेर और फरीदा जलाल जैसी कई एक्ट्रेसेज देखने को मिल जाती हैं। हालांकि हिंदी सिनेमा का एक दौर वो भी था जब मां के किरदार में सबसे ज्यादा निरूपा रॉय को पसंद किया जाता था। 4 जनवरी 1931 को गुजरात के वलसाड़ शहर के एक मध्यमवर्गी परिवार में जन्मी निरूपा रॉय ने बॉलीवुड में मां के किरदार को बेहद खास बनाया था। अपने पांच दशक के लंबे करियर में उन्होंने 275 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। आज उनके जन्मदिन के मौके पर बताते हैं निरूपा रॉय के फिल्मी और निजी जीवन के किस्सों के बारे में।
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Nirupa Roy - फोटो : twitter
फिल्मों में मां को रोल निभाकर मशहूर हुईं एक्ट्रेस निरूपा को निजी जिंदगी में कई दुख झेलने पड़े थे। निरूपा का जन्म गुजरात के वलसाड़ में गुजराती चौहान फैमिली में हुआ था। उनके पिता किशोर चंद्र बलसारा रेलवे में कर्मचारी थे। फिल्मों में आने से पहले निरूपा का नाम कांता चौहान था। उनके माता-पिता उन्हें प्यार से 'छीबी' कहकर बुलाते थे। कांता जब स्कूल में थीं तभी उनके पिता ने उनकी शादी कमल रॉय से कर दी। उस वक्त कांता यानी कि निरूपा महज 14 साल की थीं।
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Nirupa Roy - फोटो : twitter
बचपन में कांता कहलाने वाली निरूपा का शादी के बाद नाम रखा गया 'कोकिला'। 1945 में वो अपने पति के साथ मुंबई आ गईं। निरूपा के पति कमल रॉय राशन इंस्पेक्टर की नौकरी कर रहे थे। वो एक्टर बनने की ख्वाहिश रखते थे और इसलिए ऑडिशन देते रहते थे। शादी के बाद कमल निरूपा को लेकर एक गुजराती फिल्म के लिए ऑडिशन देने गए। इत्तेफाक से कमल को इस फिल्म के लिए रिजेक्ट कर दिया गया और निरूपा को फिल्म में लीड एक्ट्रेस के तौर पर कास्ट कर लिया गया।

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nirupa roy - फोटो : Social Media
निरूपा को उनके पति ने फिल्म 'रनकदेवी' में काम करने के लिए कहा और इस फिल्म के साथ ही कोकिला का नाम निरूपा हो गया। निरूपा ने फिल्म तो कर ली लेकिन मध्यम वर्गी परिवार में उस समय लड़कियों का फिल्में करना खराब माना जाता था। उनकी एक्टिंग की खबर ने घर में कोहराम मचा दिया था। यहां तक की उनके पिता ने तो उनसे मरते दम तक बात नहीं की थी।
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nirupa roy - फोटो : social media
निरूपा के परिवार ने धीरे-धीरे उन्हें अपना लिया, लेकिन पिता ने उनसे फिर कभी बात नहीं की। हालांकि निरूपा ने अपना फिल्मी सफर जारी रखा। फिल्म 'हमारी मंजिल' से उन्होंने करियर की शुरूआत की शुरूआत की। साल 1951 में आई फिल्म 'हर हर महादेव' में उनके पार्वती के किरदार को लोगों ने काफी पसंद किया। इसके अलावा फिल्म 'वीर भीमसेन' में द्रौपदी के रोल में लोग उनकी एक्टिंग के कायल हो गए।
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nirupa roy - फोटो : social media
निरूपा ने फिल्में तो कई की लेकिन 1975 में रिलीज हुई यश चोपड़ा की फिल्म 'दीवार' उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। इस फिल्म में निरूपा ने अमिताभ और शशि की मां का रोल निभाया। उनके किरदार को इस कदर पसंद किया गया कि उस दौर की बहुत सी फिल्मों में निरूपा मां के ही रोल में नजर आईं। दीवार के बाद निरूपा 'खून पसीना', 'मुकद्दर का सिंकदर', 'अमर अकबर एंथोनी', 'सुहाग', 'इंकलाब', 'गिरफ्तार', 'मर्द' और 'गंगा-यमुना-सरस्वती' में भी वो अमिताभ के मां के रोल में ही दिखाई दीं। आखिरी बार निरूपा अमिताभ बच्चन की फिल्म 'लाल बादशाह' में उनके मां के रोल में नजर आई थीं। इसके बाद साल 2004 में 13 अक्टूबर को अमिताभ की ऑनस्क्रीन मां कहलाने वाली निरूपा हमेशा-हमेशा के लिए इस दुनिया ले चली गईं।
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