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Amitabh Bachchan: ‘काम करता हूं कुली का और नाम है...इकबाल’, 10 दिलचस्प किरदारों में गंगा जमुनी तहजीब का झरोखा

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अमिताभ बच्चन - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
फिल्म ‘कुली’ का क्लाइमेक्स चल रहा है। लोग सांस बांधे परदे पर कहानी के खलनायक जफर को मुंबई की हाजी अली दरगाह में एक हाथ में पिस्तौल और दूसरे हाथ में सलमा को दबोचे घुसने की कोशिश करते देख रहे हैं। इकबाल उसे रोकने की कोशिश करता है। जफर उसे गोली मार देता है। मां दरगाह के सामने हाथ फैलाकर दुआ मांगती है। हवा चलती है। दरगाह की चादर उड़कर इकबाल के बदन से लिपट जाती है। जफऱ को अब भी पिस्तौल में बाकी बची तीन गोलियों का गुमान है। इकबाल की ललकार है, तो फिर चला गोलीतेरे हाथ में मौत का सामान है तो मेरे सीने पर खुदा का नाम है। देखते हैं ये चादर मुझे बचाती है या कफन बनकर मुझे कब्र तक पहुंचा देती है..!’ हर गोली पर वह अल्लाह को याद करता है। आखिरी गोली उसका सीना छलनी करती है तो उसके मुंह से आवाज निकलती है, ‘ला इलाहा इल्लाह, मुहम्मदुर रसूलुल्लाह.. !’ यहां इकबाल हैं भारतीय सिनेमा के सबसे करिश्माई सितारे अमिताभ बच्चन और एक मुस्लिम किरदार में उनकी ये फिल्म हिंदी सिनेमा के इतिहास की ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शामिल है। अमिताभ का हिंदी फिल्मों में मुस्लिम किरदारों से अपनी पहली फिल्म से नाता रहा है और ये नाता फिल्म ‘चेहरे’ तक बदस्तूर जारी रहा। एक नजर डालते हैं, अमिताभ के 10 नायाब मुस्लिम किरदारों पर...
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सात हिंदुस्तानी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
किरदार: अनवर अली फिल्मसात हिंदुस्तानी अमिताभ बच्चन को अपनी पहली फिल्म में ही जो किरदार मिला था, उसका नाम था, अनवर अली। बिहार का युवा अनवर अली, जो अपनी रचनाओं से इंकलाबी है। देश के अलग अलग सूबों के पांच और युवा मिलकर गोवा पहुंचते हैं और वहां साथ देते हैं मारिया का जिसने गोवा से पुर्तगालियों को खदेड़ने का बीड़ा उठा रखा है। मलयालम फिल्मों की उन दिनों की प्रसिद्ध कलाकार मधु ने फिल्म में सुबोध सान्याल का किरदार किया था। एक इंटरव्यू में मधु ने बताया, ‘अमिताभ बच्चन ने कभी ये महसूस नहीं होने दिया कि ‘सात हिंदुस्तानी’ में वह पहली बार कैमरे का सामना कर रहे हैं। लोगों को उनके भीतर शुरू से एक अजीब आत्मविश्वास नजर आता था। उनकी आवाज लोगों को खूब पसंद आती थी और इसे एक सुर में ढालने के लिए वह अपने पिता हरिवंश राय बच्चन की कविताएं खूब पढ़ा करते थे।’
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सौदागर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
किरदार: मुतल्लिब फिल्म: सौदागर अमिताभ बच्चन की बतौर हीरो जो फिल्म ऑस्कर पुरस्कारों में देश की आधिकारिक प्रविष्टि बनकर पहुंची, उसका नाम था, ‘सौदागर’। इस फिल्म में भी अमिताभ बच्चन ने एक मुस्लिम किरदार किया है। उनके किरदार का फिल्म में नाम है मुतल्लिब उर्फ मोती। और, नूतन उनकी पत्नी मजूबी बनी हैं। फिल्म ‘सौदागर’ को राजश्री पिक्चर्स ने बनाया है और ये साल 1973 में रिलीज हुई। फिल्म ‘सौदागर’ के निर्देशक थे सुधेंदु रॉय। अमिताभ बच्चन की ये फिल्म हालांकि बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही लेकिन एक गुड़ बेचने वाले के किरदार में अमिताभ अपनी छाप छोड़ने में सफल जरूर रहे।

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ईमान धरम - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
किरदार: अहमद रजा फिल्म: ईमान धरम और, इसके बाद अमिताभ बच्चन एक मुस्लिम किरदार में नजर आए निर्देशक देश मुखर्जी की फिल्म ‘ईमान धरम’ में। फिल्म में उनका किरदार अहमद रजा का है जो अपने दोस्त मोहन सक्सेना के साथ अदालतों के आसपास चक्कर लगाता रहता है। दोनों मुकदमों में झूठी गवाही देने के एक्सपर्ट हैं। सलीम जावेद की लिखी इस फिल्म में रेखा भी हैं, संजीव कुमार भी और हेलन से लेकर प्रेम चोपड़ा, ओम शिवपुरी, श्रीराम लागू, सत्येन कप्पू, मैक मोहन व जगदीश राज जैसे सहायक कलाकारों की भरमार भी है। 1977 में रिलीज हुई इस फिल्म में अहमद रजा के किरदार में अमिताभ बच्चन ने लोगों का खूब मनोरंजन किया हालांकि फिल्म को उतनी सफलता नहीं मिली जितनी इससे अपेक्षित थी।
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मुकद्दर का सिकंदर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
किरदार: सिकंदर फिल्म: मुकद्दर का सिकंदर अमिताभ बच्चन जिस फिल्म से सिनेमा के सिकंदर बने, उसी फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ ने उन्हें एक मुस्लिम किरदार में पहली बार कामयाबी दिलाई। हालांकि 1978 में रिलीज हुई इस फिल्म में उनके किरदार की शुरुआत एक अनाथ बच्चे के रूप में होती है जिसे एक धन्नासेठ के यहां काम करने वाली फातिमा अपना लेती है और नाम देती है सिकंदर। सिकंदर और जोहराबाई की प्रेम कहानी तो हर हिंदी फिल्मप्रेमी को पता ही है। फिल्म में राखी हैं, विनोद खन्ना हैं, अमजद खान हैं और रंजीत, कादर खान और गोगा कपूर जैसे कलाकार भी हैं, लेकिन फिल्म में सिकंदर का मोटरसाइकिल पर आना और गाना, ‘रोते हुए आते हैं सब, हंसता हुआ जो जाएगा..’ हिंदी सिनेमा के जानदार किरदारों की शान बन गया।
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अंधा कानून - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
किरदार: जां निसार अख्तर खां फिल्म: अंधा कानून और, इसके बाद तो अमिताभ को मुस्लिम किरदारों के तौर पर पेश करने की फिल्म निर्माता और निर्देशकों में होड़ सी लगी रही। लेकिन, अमिताभ को एक मुस्लिम किरदार के रूप में फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ के बाद पेश करने की सबसे बड़ी बोली लगाई निर्माता ए पूर्णचंद्र राव ने। उन्होंने निर्देशक टी रामाराव को लेकर फिल्म 1983 में रिलीज हुई फिल्म बनाई ‘अंधा कानून’। ये फिल्म अगर आपको याद होगी और साथ ही जरूर याद होगा फिल्म में जां निसार अख्तर खां का वह किरदार जो भरी अदालत में एक खून कर देता है लेकिन कानून उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता क्योंकि जिस शख्स का उसने भरी अदालत में कत्ल किया है, उसके कत्ल के इल्जाम में वह पहले ही उम्र कैद की सजा काट चुका है।
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कुली - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
किरदार: इकबाल फिल्म: कुली 1983 की ही रिलीज फिल्म है ‘कुली’ जिसके किरदार इकबाल का जिक्र मैंने शुरू में किया। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान ही अमिताभ मरते मरते बचे थे और एक तरह से जिस तरह उनके लिए सारे धर्मों को मानने वालों ने देश विदेश में प्रार्थनाएं कीं थीं, उसी तरह फिल्म में इकबाल को गोली लगने के बाद मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च में उसकी सलामती के लिए लोग दुआएं मांगते दिखते हैं। इकबाल हाजी अली दरगाह की गुंबद पर जफर की धुलाई करता है और उसे नीचे फेंकने के साथ नारा लगाता है, ‘अल्ला हू अकबर’। अपनी मां की गोद में बेहोश होने से पहले इकबाल दरगाह की एक मीनार पर 786 भी लिखता है, बाएं से दाहिनी तरफ। गोलियां निकाले जाने के बाद डॉक्टर ऑपरेशन थियेटर के बाहर आता है और वहीं अस्पताल के गलियारे में नमाज अता कर रहे उसके मां बाप से कहता है, ‘मुबारक हो, अब आपके बेटे की जान खतरे से बाहर है.. ’
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अजूबा - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
किरदार: शहजादा अली फिल्म: अजूबा फिल्म ‘अंधा कानून’ और ‘कुली’ के बाद अमिताभ बच्चन ने बड़े परदे पर मुस्लिम किरदार किया उन शशि कपूर के लिए जिनकी फिल्मों की शूटिंग कभी वह भीड़ के बीच खड़े होकर देखा करते थे। अमिताभ बच्चन और शशि कपूर का बहुत करीबी रिश्ता रहा और जब शशि कपूर ने जब उस समय के सोवियत संघ के साथ मिलकर एक इंडो सोवियत फिल्म ‘अजूबा’ बनाई तो उसमें सुल्तान के शहजादे का किरदार अमिताभ बच्चन ने ही निभाया। अजूबा को बचपन में ही मारने के जतन होते हैं लेकिन वह लहरों में बहकर बचता है और एक लुहार के यहां उसकी परवरिश होती है। फिल्म में अमिताभ बच्चन के फिल्म ‘शहंशाह’ की ही तरह दो रूप हैं। शशि कपूर निर्देशित इस फिल्म को सोवियत संघ में भारत में इसकी रिलीज से साल भर पहले 1990 में रिलीज किया गया।
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खुदा गवाह - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
किरदार: बादशाह खान फिल्म: खुदा गवाह भारत में फिल्म ‘अजूबा’ 1991 में रिलीज हुई और इसके ठीक साल भर बाद आई वह फिल्म जिसके संवाद अमिताभ बच्चन के हर प्रशंसक को आज भी मुंह जुबानी याद हैं। फिल्म का नाम ‘खुदा गवाह’ और किरदार का नाम बादशाह खान। अफगानिस्तान के मजार ए शरीफ के इलाके में शूट हुई थी अमिताभ बच्चन, श्रीदेवी की फिल्म ‘खुदा गवाह’। इस फिल्म की शूटिंग के लिए अमिताभ बच्चन जब अफगानिस्तान पहुंचे थे तो वहां के राष्ट्रपति नजीबुल्लाह अहमदजई ने उनकी खातिरदारी अपने निजी मेहमान की तरह की थी। अमिताभ बच्चन की हिफाजत के लिए लड़ाई में इस्तेमाल होने वाले हेलीकॉप्टर तो लगे ही और राष्ट्रपति ने अपना निजी सुरक्षा दस्ता भी उन्हें मुहैया कराया। नजीबुल्लाह 1987 से 1992 तक अफगानिस्तान के राष्ट्रपति रहे। सितंबर 1996 में तालिबान ने उनका कत्ल कर दिया था। फिल्म ‘खुदा गवाह’ की शूटिंग के दौरान ऐसे भी मौके आए जब पूरी यूनिट पानी के सिर्फ एक नलके से काम चलाती थी और शौचादि नित्यकर्म सब खुले में ही करना होता था। शूटिंग के बाद सब लोग वापस बस्ती पहुंचते और वहां से हेलीपैड या रनवे तक अमिताभ बच्चन को कोई न कोई कबीले का सरदार गोदी में उठाकर ले जाता था।
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ठग्स ऑफ हिंदोस्तान - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
किरदार: खुदाबख्श आजाद फिल्म: ठग्स ऑफ हिंदोस्तान लेकिन, अमिताभ बच्चन की मुस्लिम किरदारों के तौर पर हाल के दिनों की पिछली फिल्में दर्शकों को खास पसंद नहीं आईं। य़शराज फिल्म्स की बनाई पिक्चर ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ की तो इसके हीरो आमिर खान ने खुद ही बैंड बजा दी। 2018 में रिलीज हुई ये फिल्म इसके निर्देशक विजय कृष्ण आचार्य ने जैसी सोची थी, आमिर ने ये फिल्म वैसी बनने ही नहीं दी। उन्होंने फिल्म की मेकिंग में इतने हस्तक्षेप किए कि फिल्म में अमिताभ के किरदार खुदाबख्श आजाद की रंगत ही जाती रही। अमिताभ बच्चन ने इस फिल्म के लिए काफी वजनी पोशाक पहनी थी और फिल्म में कुछ स्टंट दृश्यों में भी अपनी फुर्ती दिखाई थी लेकिन धमाकेदार ओपनिंग के बावजूद ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरफ्लॉप फिल्म साबित हुई।
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गुलाबो सिताबो - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
किरदार: चुन्नन नवाब फिल्म: गुलाबो सिताबो और अमिताभ बच्चन का किसी मुस्लिम किरदार के चोले में परदे पर लखनवी अवतार रहा चुन्नन नवाब के रूप में फिल्म ‘गुलाबो सिताबो’ में। साल 20220 में कोरोना संक्रमण काल शुरू होने के बाद सीधे ओटीटी पर रिलीज होने वाली ये पहली हिंदी फिल्म भी रही। अमिताभ बच्चन ने इस फिल्म में शानदार काम किया। एक खास तरह से कमर झुकाकर चलने की उनकी मेहनत, 77 साल की उम्र में एक पुरानी हवेली के कोने कोने में अपने अभिनय की चमक दिखाने की हिम्मत, हर उम्र और तबके के दर्शक को राहत देती है। फिल्म ‘गुलाबो सिताबो’ की कहानी उन्हीं के इर्द गिर्द है लेकिन, इसे आयुष्मान खुराना की फिल्म बनाने के चक्कर में शूजीत सरकार ने फिल्म का असर खराब कर दिया।
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