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Movie Review: 21वीं सदी के परिवारों के चुभते सवालों का गुदगुदाता जवाब है 'दे दे प्यार दे'

Fri, 17 May 2019 11:57 AM IST
अरविंद अरविंद एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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De De Pyaar De - फोटो : twitter
  • Movie Review: दे दे प्यार दे
  • कलाकार: अजय देवगन, रकुल प्रीत सिंह, तब्बू, आलोक नाथ, जावेद जाफरी, जिमी शेरगिल और सन्नी सिंह आदि
  • निर्देशक: अकील अली
  • पटकथा: लव रंजन, तरुण जैन और सुरभि भटनागर
  • निर्माता: भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, लव रंजन और अंकुर गर्ग
  • रेटिंग: ***1/2
गाजियाबाद के लव रंजन ने हिंदी सिनेमा में कॉमेडी का एक नया यूनीवर्स तैयार किया है। प्यार का पंचनामा, प्यार का पंचनामा 2 और सोनू के टीटू की स्वीटी से उन्होंने युवाओं का दिल जीता। बतौर निर्देशक उनकी अगली फिल्म में रणबीर कपूर, दीपिका पादुकोण, अजय देवगन और तब्बू तय हो चुके हैं। लेकिन उस फिल्म तक जाने से पहले लव ने बनाई है आज के दौर में प्यार के उलझते धागों की एक अतरंगी फिल्म, दे दे प्यार दे। फिल्म प्यार के बीच आने वाले पीढ़ियों के अंतर को नए नजरिए से देखती है।

 
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de de pyaar de - फोटो : social media
समय बदल चुका है। कभी 50 के होते ही बुजुर्गों की श्रेणी में शामिल हो जाने वाले अब इस उम्र में भी चुस्त दुरुस्त रहते हैं और जिंदगी को अपने हिसाब से जीने की उनकी तमन्नाएं भी इनकी तरह जवान ही रहती हैं। ऐसा ही है दे दे प्यार दे की कहानी का नायक, आशीष। लंदन में रहता है। स्टार्ट अप्स में निवेश करता है। आयशा उसे पसंद करती है। वह भारत से लंदन पढ़ने आई है और अपने खर्चे निकालने के लिए बार में काम करती है। दोनों मिलते हैं। दोनों एक दूसरे को पसंद करते हैं। लेकिन बात आगे बढ़े उससे पहले आशीष उसे अपने घर वालों से मिलवाने भारत ले आता है। घरवाले यानी आशीष की पत्नी और दो बच्चे। बच्चे बड़े हो चुके हैं। बेटी की उम्र आयशा के आसपास है। आयशा और आशीष की प्रेम कहानी यहीं आकर एक भंवरजाल में उलझती है और सोचने को बहुत सारे सवाल दर्शकों को दे जाती है।

 
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De De Pyar De - फोटो : Amar Ujala
तमाम सुपरहिट फिल्मों का संपादन कर चुके अकीव अली की बतौर निर्देशक ये पहली फिल्म है। हालांकि, फिल्म पूरी तरह लव रंजन के सिनेमाई विजन का विस्तार है। लव रंजन बदलते समय के दौर की ऐसी प्रेम कहानियां पकड़ते हैं, जहां नायक आदर्शवादी न होकर यथार्थवादी होता है। वह आज जीना चाहता है। बीता हुआ कल याद नहीं रखना चाहता और आने वाले कल के बारे में उसने सोचा नहीं है। ऐसे में जब अपने से 24 साल छोटी लड़की को वह अपनी पत्नी बनाने के मकसद से घर वालों से मिलाने लाता है तो भूचाल खड़ा हो जाता है। सवाल यहां ये है कि आखिर लोग दूसरों के सुख के लिए अपने सुख क्यों कुर्बान कर देते हैं? क्यों जमाने के पैमाने पर सही साबित होते रहने के लिए लोग अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जी नहीं पाते?

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De De Pyaar De - फोटो : social media
आशीष के किरदार में अजय देवगन ने इस फिल्म में बड़ा रिस्क लिया है। रिस्क लेने में अजय कभी पीछे नहीं रहे। भगत सिंह की बायोपिक से लेकर गोलमाल और धमाल सीरीज की फिल्मों तक अजय ने खुद को लगातार विकसित किया है। ये शायद पहली हिंदी फिल्म है जिसमें हीरो उसी उम्र का किरदार कर रहा है जिस उम्र का वह है और अपनी इस उम्र को छुपाने का उसका कोई इरादा भी नहीं है। अजय देवगन ने 50 की उम्र के एक शख्स के अपनी बेटी की उम्र की लड़की के प्यार में पड़ने वाले किरदार का अभिनय बहुत ही सहजता से किया है। तारीफ करने लायक काम फिल्म में तब्बू का भी है। वह दो बड़े हो चुके बच्चों की मां होते हुए भी खुद को छोड़ गए पति की भावनाएं समझने वाली पत्नी के किरदार में अपनी छाप छोड़ती हैं। रकुल प्रीत को ये फिल्म हिंदी सिनेमा में उन्हें तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर जैसी दमदार अभिनेत्रियों के साथ ला खड़ा करती है। उनकी शोखियां और उनका चुलबुलापन तो खैर हम यारियां और अय्यारी में देख ही चुके हैं, लेकिन दे दे प्यार दे उनको एक बेहतर अभिनेत्री के तौर पर सामने आने का मौका देती है। फिल्म में सन्नी सिंह और जावेद जाफरी उत्प्रेरक का काम करते हैं।
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De De Pyar De - फोटो : Amar Ujala
फिल्म को सुधीर चौधरी की सिनेमैटोग्राफी के अलावा अमाल मलिक और रोचक कोहली के संगीत से भी काफी मदद मिली है। अरिजीत सिंह के दोनों गाने तू मिला तो है ना और दिल रोई जाए, इस सीजन के हिट गाने बनने जा रहे हैं। दिल रोई जाए में गीतकार कुमार ने अपने उस हुनर को भी दिखाया है जिसके बारे में कम लोग जानते हैं। पार्टी नंबर्स लिखते रहे कुमार के पास संवेदनशील गानों की जो समझ है, उसे कम निर्देशक ही हिंदी सिनेमा में निखार पाए हैं। दे दे प्यार दे एक कॉमेडी फिल्म तो है ही साथ ही ये नए जमाने के नए सवालों का भी जवाब तलाशने की कोशिश करती है। एवेंजर्स एंडगेम के हैंगओवर में झूलते रहे दर्शकों को वापस हिंदी सिनेमा तक लौटाने में दे दे प्यार दे कामयाब रही है। अमर उजाला के मूवी रिव्यू में इसे मिलते हैं साढ़े तीन स्टार।
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