यश चोपड़ा, रेखा, अमिताभ बच्चन
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
आदित्य चोपड़ा ने आगे लिखा, 'मेरे पिताजी एक शायर की कुछ पंक्तियों से अपने सफर का वर्णन किया करते थे- 'मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल मगर... लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया'। मुझे इस बात को पूरी तरह समझने में 25 साल लग गए। यश राज फिल्म्स 50 का राज लोग हैं... वो कलाकार जिन्होंने अपनी रूह निचोड़ कर किरदारों में जान डाली। वो डायरेक्टर्स जिन्होंने अपनी फिल्मों को परफेक्शन दी। वो लेखक जिन्होंने यादगार कहानियां लिखीं। वो संगीतकार और गीतकार जिन्होंने हमें ऐसे गीत दिए जो हमारे जीवन का हिस्सा बन गए। वो सिनेमेटोग्राफर्स और प्रोडक्शन डिजाइनर्स जिन्होंने हमारे दिमागों पर कभी न मिटने वाले दृश्य छोड़े। वो कॉस्ट्यूम डिजाइनर्स, मेक-अप और हेयर स्टाइलिस्ट्स जिन्होंने साधारण दिखने वालों को भी हसीन बना दिया। वो कोरियोग्राफर्स, जिन्होनें हमें ऐसे डांस स्टेप्स दिए जो हमारे सभी समारोहों का हिस्सा हैं। वो स्पॉट-ब्वायज, लाइटमेन, सेटिंग वर्कर्स, ड्रेसमेन, जुनियर आर्टिस्ट, स्टंटमेन, डांसर्स और क्रू का हर सदस्य जिसने हमारी सभी फिल्मों के लिए अपना खून और पसीना बहाया। वो सीनियर एक्जेक्टिब्ज और यश राज फिल्म्स के वो सभी कर्मचारी जिन्होंने किसी व्यक्तिगत नामवरी या शौहरत की ख्वाहिश के बिना मेहनत की। और अंत में, दर्शक, जिन्होंने हमारी फिल्मों को अपना प्यार और विश्वास दिया।'