sharat saxena
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उन्होंने आगे बताया कि, 'मेरे पिता इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एथलीट हुआ करते थे। हम उससे प्रेरित हुए और अपने शरीर पर काम किया। दुर्भाग्य से जब मैं मुंबई आया तो मैं काफी फिट था और जब प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स मुझे देखते थे, तो उन्होंने कभी अभिनेता नहीं देखा, बल्कि केवल एक फाइटर और एक जूनियर कलाकार ही देखा। इसलिए 30 सालों तक मैं केवल जूनियर कलाकारों का काम किया, जब अभिनय की बात आई, तो मुझे, यस बॉस, नो बॉस, मुझे माफ कर दीजिए बॉस जैसे डायलॉग ही बोलने को मिले।'