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रॉयल फैमिली की लड़की के प्यार में पड़ गया था ये एक्टर, 'दद्दू' बनकर किया बॉलीवुड पर राज

Thu, 21 Feb 2019 07:40 AM IST
shrilata biswas एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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om prakash actor - फोटो : file photo
30 साल तक अपनी एक्टिंग से हंसाने वाले एक्टर ओम प्रकाश मुख्यत: फिल्मों में कैरेक्टर रोल करते थे। उनका जन्म 19 दिसंबर, 1919 को जम्मू में हुआ था। उन्होंने 12 साल की उम्र से ही क्लासिकल संगीत सीखना शुरू कर दिया था। 78 साल की उम्र में उन्होंने 21 फरवरी 1998 को दुनिया को अलविदा कह दिया।
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om prakash actor - फोटो : file photo
ओम प्रकाश को संगीत के अलावा थियेटर और फिल्मों में दिलचस्पी थी। दीवान मंदिर स्टेज, जम्मू से जुड़े युद्ववीर सेठी पुराने लोगों से सुने ओमप्रकाश के किस्सों को आज भी शिद्दत से बयां करते हैं। पूरे लाहौर और पंजाब में ‘फतेहदीन’ के रूप में उनके कार्यक्रम बहुत लोकप्रिय हुए। बॉलीवुड में उनकी एंट्री साल 1942 में हुई। जब डायरेक्टर डी पंचोली की नजर उन पर पड़ी। दोनों एक शादी को अटेंड करने पहुंचे थे।
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om prakash actor - फोटो : file photo
डी पंचोली का ऑफिस लाहौर में था। उन्होंने ओमप्रकाश को लाहौर आने का न्योता दिया। इस तरह फिल्म दासी में उन्हें पहला ब्रेक मिला। उन्होंने अपने करियर में 300 से ज्यादा फिल्में की हैं। जिनमें दस लाख, अन्नदाता, चरणदास, साधु और शैतान, दिल-दौलत-दुनिया, अपना देश, चुपके-चुपके, जूली, जोरू का गुलाम, आ गले लग जा, प्यार किए जा, पड़ोसन, बुड्ढा मिल गया, शराबी,  भरोसा, तेरे घर के सामने, मेरे हम-दम मेरे दोस्त, लोफर, दिल तेरा दीवाना जैसी फिल्में शुमार हैं।

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om prakash actor
ओम प्रकाश को भले ही फिल्मों में काम की कमी नहीं पड़ी लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब 14 साल की उम्र में वो 30 रुपए महीना काम करने को तैयार हो गए थे। ओम प्रकाश की लव स्टोरी भी बड़ी इंटरेस्टिंग थी। एक किस्सा शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे एक सिख लड़की से प्यार हो गया था लेकिन लड़की के घरवाले मेरे खिलाफ थे क्योंकि मैं हिंदू था। मेरी मां उनके घर बात भी करने गई लेकिन उसके घरवाले नहीं मानें। जिसके बाद हमने अलग हो जाने का फैसला किया।
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om prakash - फोटो : social media
एक्टिंग के साथ-साथ ओम प्रकाश ने फिल्म निर्माण में भी हाथ आजमाया। उन्होंने 60 के दशक में फिल्म संजोग, जहांआरा और गेटवे आफ इंडिया जैसी फिल्में बनाईं। ओम प्रकाश को दिल का दौरा पड़ने पर उन्हें मुंबई में ही लीलावती अस्पताल ले जाया गया, जहां वह कोमा में चले गए। 21 फरवरी, 1998 को उन्होंने आखिरी सांस ली।
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