अभय देओल
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अभय देओल ने पोस्ट में आगे लिखा, 'मैंने जब किताब पढ़ी और अपने किरदार के बारे में जाना कि वह कितना अराजकवादी, मिथ्यावादी, हकदार और अभिमानी था। फिर भी वह दशकों से रोमांटिक था! वहीं महिला किरदार मजबूत और ईमानदार थे, अपने पति से प्यार करें, चाहे कुछ भी हो। मैं इस फिल्म के इस नजरिए को बदलना चाहता था। मैं उन महिला किरदारों को अच्छी और समर्पित महिला की छवि देना चाहता था। मैं उन्हें फिल्म में एक आजाद महिला दिखाना चाहता था जो सिर्फ आदमी के प्यार तक ही सीमित नहीं थी। जो कि आज तक बाकी कहानियों में दिखाया गया है। यही कारण है कि पारो देव के अवगुणों को दूर करती है और उसे एक अलग जगह पर रखती है।'