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25 Years Of Gupt: काजोल ने इस फिल्म में लिया करियर का सबसे बड़ा रिस्क, इसलिए रवीना टंडन हुईं फिल्म से बाहर

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बाइस्कोप - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
डिजिटल और सैटेलाइट के दौर से पहले हिंदी सिनेमा में फिल्मों की कामयाबी उनके बॉक्स ऑफिस पर इस दबदबे से आंकी जाती थीं कि वे सिनेमाघरों मे कितने दिनों तक चलीं। शानदार सौ दिन, 25 हफ्ते पूरे होने पर सिल्वर जुबली और 50 हफ्ते पूरे होने पर गोल्डन जुबली मनाने का सिलसिला खूब चला। सौ करोड़ रुपये की कमाई के आंकड़े पर इतराने का चलन तब तब आया नहीं था और साल 1997 में जब निर्माता निर्देशक यश चोपड़ा की फिल्म ‘दिल तो पागल है’ ने 71 करोड़ रुपये की कमाई की तो ये भी एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड माना गया। इस साल कमाई के मामले में दूसरे नंबर पर रही जे पी दत्ता की फिल्म ‘बॉर्डर’, तीसरे पर इंद्र कुमार की ‘इश्क’, चौथे पर सुभाष घई की फिल्म ‘परदेस’ और पांचवें नंबर पर निर्देशक राजीव राय की फिल्म ‘गुप्त’। ‘दिल तो पागल है’ और ‘परदेस’ की कामयाबी का सेहरा शाहरुख खान के सिर बंधा। ‘इश्क’ की कामयाबी अजय देवगन और आमिर खान के खाते में जुड़ी। ‘बॉर्डर’ मल्टीस्टारर फिल्म रही और इस साल की चौंकाने वाली कामयाबी मिली फिल्म ‘गुप्त’ को जो इसके हीरो बॉबी देओल की दूसरी फिल्म थी। लेकिन, फिल्म में उनके साथ रहीं काजोल ने जो कर दिखाया, उसे लोग अब भी याद करते हैं। बॉबी, काजोल और मनीषा कोइराला तीनों ने मिलकर ऐसा खेल परदे पर खेला कि जमाना भी बस गाता रह गया, ‘गुप्त, गुप्त, ये है गुप्त गुप्त...!’ आज के बाइस्कोप में इसी फिल्म के कुछ किस्से..
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बाइस्कोप - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

बॉबी से पहले अक्षय और सनी के नाम फिल्म ‘गुप्त’ की कहानी लिखते समय इसके लेखक, निर्दशक राजीव राय के दिमाग में लीड रोल के लिए दो नाम थे, अक्षय कुमार और सनी देओल। सनी देओल के साथ वह ‘त्रिदेव’ और ‘विश्वात्मा’ बना चुके थे और अक्षय कुमार के साथ फिल्म ‘मोहरा’। राजीव राय ने कहानी का जिक्र अक्षय कुमार से भी किया और सनी देओल से भी। सनी देओल ने ही राजीव को सलाह दी कि ये फिल्म उन्हें बॉबी देओल के साथ बनानी चाहिए क्योंकि उनकी पहली फिल्म ‘बरसात’ तब बस रिलीज ही होने वाली थी और बॉबी के करियर की दूसरी फिल्म के लिए ये कहानी सनी को परफेक्ट लगी। राजीव राय को भी बात सही लगी और उन्होंने बॉबी देओल को साइन करके फिल्म की शूटिंग 1996 के शुरू में ही करने की तैयारी शुरू कर दी। फिल्म में सबसे पहले बॉबी के साथ साइन हुई हीरोइन थीं रवीना टंडन। रवीना के साथ बॉबी का फोटोशूट भी कराया गया जो फिल्म के टीजर के तौर पर कुछ जगहों पर छपा भी। लेकिन, तभी ‘बरसात’ के आखिरी शेड्यूल में बॉबी देओल अपनी टांग तुड़वा बैठे।

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बाइस्कोप - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

रवीना और करिश्मा के बाद मनीषा तारीखों के चक्कर में रवीना टंडन फिल्म ‘गुप्त’ का हिस्सा नहीं रहीं। रवीना को फिल्म में वही रोल करना था जो बाद में मनीषा कोइराला के हिस्से आया। फिल्म में बॉबी देओल की मंगेतर शीतल चौधरी का ये किरदार मनीषा से पहले करिश्मा कपूर को भी ऑफर हुआ था लेकिन बात किन्हीं वजहों से बन नहीं सकी। बॉबी देओल और करिश्मा कपूर की जोड़ी इसके बाद पहली बार बनी थी निर्देशक कुंदन शाह की फिल्म ‘हम तो मोहब्बत करेगा’ में। मनीषा कोइराला के पास भी राजीव राय पहले फिल्म में बॉबी देओल के निभाए किरदार साहिल सिन्हा की बचपन की दोस्त ईशा दीवान के रोल के लिए ही गए थे लेकिन मनीषा ने लिया शीतल चौधरी का किरदार और ईशा के रोल में इसके बाद आईं काजोल।

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बाइस्कोप - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

एक कहानी पर बनी तीन फिल्में फिल्म ‘गुप्त’ की कहानी बहुत कुछ 1976 में प्रकाशित अंग्रेजी उपन्यास ‘गुड चिल्ड्रेन डोंट किल‘’ के आसपास की कहानी है। इसी उपन्यास पर ऋषि कपूर के करियर की दूसरी फिल्म ‘खेल खेल में’ भी बनी थी। और, इसी उपन्यास की कहानी पर बनी अक्षय कुमार का करियर चमका देने वाली फिल्म ‘खिलाड़ी’। ‘खिलाड़ी’ की रिलीज के पांच साल बाद जब ‘गुप्त’ लिखी गई तो राजीव राय ने इसमें तमाम सारी बातें ऐसी डालीं जो उस वक्त के सिने दर्शकों को खूब भाईं। काजोल को फिल्म में जिस तरह पेश किया गया, वह पूरा आइडिया राजीव राय का ही था। शब्बीर बॉक्सवाला ने सह पटकथा लेखक के रूप में इस पूरे विचार को पूरी फिल्म में बुन दिया। काजोल ने जब ये फिल्म साइन की तो वह ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ की कामयाबी में झूम रही थीं। उन्होंने अपने करियर का ये बड़ा रिस्क लिया और ‘डीडीएलजे’ में फिल्मफेयर का बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड जीतने के बाद इस फिल्म में फिल्मफेयर का बेस्ट विलेन अवार्ड जीतकर उन्होंने अपनी काबिलियत की चमक चारों तरफ बिखेर दी।

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बाइस्कोप - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

काजोल का बेहतरीन अभिनय फिल्मफेयर बेस्ट परफॉर्मेंस इन ए निगेटिव रोल का अवार्ड अभिनेत्रियों में काजोल के अलावा सिर्फ प्रियंका चोपड़ा ने फिल्म ‘एतराज’ के लिए जीता है। इस पुरस्कार के लिए नामित होने वाली अदाकाराओं में फिल्म ‘प्यार तूने क्या किया’ के लिए उर्मिला मातोंडकर, फिल्म ‘मकड़ी’ के लिए शबाना आजमी, फिल्म ‘जिस्म’ के लिए बिपाशा बसु, फिल्म ‘अरमान’ के लिए प्रीति जिंटा और फिल्म ‘कलयुग’ के लिए अमृता सिंह शामिल हैं। काजोल से इस किरदार पर अब भी बात करो तो वह चहक उठती हैं। वह मानती हैं, ‘फिल्म ‘गुप्त’ में इशा दीवान का किरदार करना एक बहुत बड़ी चुनौती भी थी और करियर के लिहाज से बहुत बड़ा खतरा भी। लेकिन, लाइफ मे थोड़ा रिस्क तो लेना ही चाहिए।’ काजोल को कंफर्ट जोन से बाहर जाकर कुछ अलग करना शुरू से पसंद रहा है। हां, ये वह बिल्कुल नहीं मानतीं कि गुप्त जैसी फिल्म का भी कोई सीक्वेल बन सकता है। वह तो यहां तक कहती हैं कि उन्होंने जितनी भी फिल्में अब तक अपने करियर में की हैं, उनमें से किसी का ना तो रीमेक होना चाहिए और न ही उसकी सीक्वेल बननी चाहिए।

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बाइस्कोप - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

सहायक कलाकारों ने जमाया रंग काजोल को विलेन बनाकर राजीव राय ने जो जुआ खेला, उसमें वह जीत गए। राजीव ने और भी तमाम एक्सपेरीमेंट इस फिल्म में किए हैं। जेम्स बॉन्ड की फिल्मो की शुरूआत की तरह ही फिल्म ‘गुप्त’ के ओपनिंग क्रेडिट्स डिजाइन उन्होंने बनवाए। लोगों को ये पसंद भी आए। महिलाओं की नाचती छायाओं के ऊपर उभरते कलाकारों और तकनीशियनों के नामों ने फिल्म का मूड सेट करने में काफी मदद की। राजीव ने फिल्म बनाई ही वयस्क दर्शकों को ध्यान में रखकर थी तो थोड़ा बहुत ओवरबोर्ड जाने में भी राजीव ने यहां परहेज नहीं किया। राजीव राय की असल जीत थी फिल्म के सहायक कलाकारों के लिए काबिल अभिनेताओं की पूरी लाइन लगा देना। फिल्म में राज बब्बर से लेकर परेश रावल, शरत सक्सेना, प्रेम चोपड़ा, रजा मुराद, सदाशिव अमरापुरकर, ओम पुरी, कुलभूषण खरबंदा, दलीप ताहिल, प्रिया तेंदुलकर और मुकेश ऋषि के अलावा तमाम कलाकार ऐसे रहे जिन्होंने अपने अपने छोटे लेकिन असरदार किरदारों में जान डालने में कसर नहीं छोड़ी।

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बाइस्कोप - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
रिलीज से पहले ही हिट हो गया संगीत फिल्म ‘गुप्त’ का एक और विनिंग प्वाइंट रहा इसका म्यूजिक। संगीतकार जोड़ी कल्याणजी आनंदजी की विरासत संभालने वाले विजू शाह (कल्याणजी के बेटे) ने राजीव राय की पिछली तीनों फिल्मों ‘विश्वात्मा’, ‘त्रिदेव’ और ‘मोहरा’ की तरह इस फिल्म का संगीत भी उस वक्त की युवा पीढ़ी को ध्यान में रखकर तैयार किया। राजीव राय और विजू शाह ने जोड़ी बनाकर एक साथ लगातार चार हिट फिल्में देने का हिंदी सिनेमा में अपनी तरह का अनोखा रिकॉर्ड बनाया। उन दिनों फिल्मों के गानों के कैसेट की पायरेसी खूब होती थी, इसके बावजूद गुप्त के गानों के कैसेट खूब बिके। विजू शाह को फिल्म के बैकग्राउंड के लिए फिल्मफेयर का पुरस्कार मिला। काजोल और वीजू शाह के अलावा इस फिल्म के लिए राजीव राय को बेस्ट एडिटिंग का फिल्मफेयर अवार्ड मिला।
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