बाइस्कोप
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
सहायक कलाकारों ने जमाया रंग
काजोल को विलेन बनाकर राजीव राय ने जो जुआ खेला, उसमें वह जीत गए। राजीव ने और भी तमाम एक्सपेरीमेंट इस फिल्म में किए हैं। जेम्स बॉन्ड की फिल्मो की शुरूआत की तरह ही फिल्म ‘गुप्त’ के ओपनिंग क्रेडिट्स डिजाइन उन्होंने बनवाए। लोगों को ये पसंद भी आए। महिलाओं की नाचती छायाओं के ऊपर उभरते कलाकारों और तकनीशियनों के नामों ने फिल्म का मूड सेट करने में काफी मदद की। राजीव ने फिल्म बनाई ही वयस्क दर्शकों को ध्यान में रखकर थी तो थोड़ा बहुत ओवरबोर्ड जाने में भी राजीव ने यहां परहेज नहीं किया। राजीव राय की असल जीत थी फिल्म के सहायक कलाकारों के लिए काबिल अभिनेताओं की पूरी लाइन लगा देना। फिल्म में राज बब्बर से लेकर परेश रावल, शरत सक्सेना, प्रेम चोपड़ा, रजा मुराद, सदाशिव अमरापुरकर, ओम पुरी, कुलभूषण खरबंदा, दलीप ताहिल, प्रिया तेंदुलकर और मुकेश ऋषि के अलावा तमाम कलाकार ऐसे रहे जिन्होंने अपने अपने छोटे लेकिन असरदार किरदारों में जान डालने में कसर नहीं छोड़ी।