प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
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इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया था कि क्या इस काम को राजद्रोह कहा जा सकता है या फिर यह अदालत के दुरुपयोग से लोगों को परेशान करके उन्हें खामोश करने की कोशिश है। इस पर हस्ताक्षरकर्ताओं में लेखक अशोक वाजपेई, जेरी पिंटो, इरा भास्कर, कवि जीत तायल, लेखक शम्सुल इस्लाम जैसे लोगों के नाम भी हैं।