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राजघराने की बहू के परदे पर बिकिनी पहनने से मचा था बवाल, जानिए मुनमुन सेन की 10 अनसुनी कहानियां

Sat, 28 Mar 2020 07:28 AM IST
Mishra Mishra अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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Moon Moon Sen - फोटो : Social Media
हिंदी सिनेमा में बंगाल के जादू का असली करिश्मा दिखाने वाले मुनमुन सेन ने पहली हिंदी फिल्म “अंदर बाहर” के वक्त इसके दोनों हीरो अनिल कपूर और जैकी श्रॉफ का तिलिस्म फीका कर दिया था। एक ही झटके में परवीन बाबी से लेकर जीनत अमान तक को बिंदासपन और बेलौसी में पीछे छोड़ देने वाली मुनमुन सेन की दोनों बेटियां रिया सेन और राइमा सेन भी फिल्मों में काम करती हैं। तृणमूल कांग्रेस की सांसद रह चुकीं मुनमुन सेन की आइए आपको बताते हैं 10 अनसुनी कहानियां।
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Moon Moon Sen - फोटो : Social Media

चांदी के चम्मच के साथ जन्म
मुनमुन सेन का जन्म 28 मार्च 1978 में कोलकाता के एक हिन्दू परिवार में हुआ। उनके पिता नाम दीबानाथ सेन और माता बंगाल की सुप्रसिद्ध अभिनेत्री सुचित्रा सेन थीं। इनके पिता कोलकाता के बालीगंज के एक बहुत रईस और व्यापारी परिवार से आते थे। इनके दादा दीनानाथ सेन त्रिपुरा की सरकार में मंत्री हुआ करते थे।

विदेश में पढ़ाई
मुनमुन की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई लोरेटो कॉन्वेंट शिलॉन्ग में और बाद में इन्होंने लोरेटो हाउस कोलकाता में दाखिला लिया। अपनी स्नातक की डिग्री हासिल करने से लिए मुनमुन ने लंदन का रास्ता अख्तियार किया और वहां के समरविल कॉलेज ऑक्सफोर्ड में दाखिला लिया। शायद उन्हें अपने देश से ज्यादा प्यार था इसलिए वे फिर अपने देश लौटकर आईं और स्नातकोत्तर की डिग्री जाधवपुर यूनिवर्सिटी से ही हासिल की।

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Moon Moon Sen - फोटो : Social Media

डीएनए में एक्टिंग
मुनमुन की मां सुचित्रा सेन का भारतीय सिनेमा में बहुत बड़ा नाम रहा है। जब मुनमुन छोटी थीं तब वह अपनी मां के उनकी फिल्मों की शूटिंग देखने जाया करती थीं। अपनी मां को काम करते देखना उन्हें बहुत अच्छा लगता था। लोग उनकी मां के काम की तारीफ भी बहुत किया करते थे इसलिए मुनमुन भी अभिनय करने की जिद करती थीं।

पेंटिंग का शौक
मुनमुन पढ़ाई में तो होशियार थीं ही साथ ही उनकी कला भी उतनी ही रुचि थी। अपनी पढ़ाई खत्म करने के बाद उन्होंने चित्रकारी करने का हुनर सीखा। सिखाने वाला कोई और नहीं बल्कि खुद एक महान चित्रकार जैमिनि रॉय थे। इसके बाद तो उन्हें चित्रकारी की ऐसी लत लगी की अक्सर सारे सारे दिन वे पेंटिंग ही करती रहती थीं। उन्हें पुरानी वस्तुएं इकट्ठा करने का भी बहुत शौक था।

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Moon Moon Sen - फोटो : Social Media

सरकारी स्कूल में शिक्षिका बनीं
मुनमुन ने अपना ज्ञान सिर्फ अपने तक ही सीमित नहीं रखा बल्कि उन्होंने बालीगंज के ही एक सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाना भी शुरू किया। वह बच्चों को अंग्रेजी की शिक्षा दिया करती थीं। इसके बाद उन्होंने फिल्म की तकनीकियां सिखाने वाले स्कूल चित्रबानी में छात्रों को ग्राफिक्स करना भी सिखाया। इसके साथ ही वे समाज सेवा में भी बहुत व्यस्त रहती थीं।   


शादी के बाद फिल्मों में एंट्री
कहते हैं कि भारतीय सिनेमा में अभिनेत्रियों का करियर उनकी शादी के बाद खत्म हो जाता है। लेकिन अगर बात करें मुनमुन के फिल्मी करियर की तो उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अपनी शादी के बाद ही की। उन्होंने राजघराने से ताल्लुक रखने वाले भारत देव वर्मा से शादी की। उनसे उन्होंने दो बेटियों राइमा सेन और रिया सेन को जन्म दिया। उनकी दोनों ही बेटियों ने भी भारतीय सिनेमा में खूब काम किया। उनकी दिवंगत सास इला देवी कूचबिहार की राजकुमारी इंदिरा राजे की बेटी थीं, और जयपुर की महारानी गायत्री देवी की बड़ी बहन थीं।

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Moon Moon Sen - फोटो : Social Media

बिकिनी गर्ल बनकर मचाया हंगामा
मुनमुन ने वर्ष 1984 में आई फिल्म 'अंदर बाहर' से हिंदी सिनेमा में अपना करियर शुरू किया। इस फिल्म में अनिल कपूर और जैकी श्रॉफ मुख्य भूमिका में हैं। मुनमुन की ये पहली फिल्म थी और उन्होंने इस फिल्म में ही बहुत बोल्ड अवतार दिखाया। इसकी वजह से बात कुछ बिगड़ी भी और खूब हो हल्ला भी हुआ। इसके बाद भी वे बिकिनी में कई मैगजीन्स के कवर पर नजर आईं।


कई भाषाओं की फिल्मों में काम
मुनमुन ने हिंदी सिनेमा की धक धक गर्ल माधुरी दीक्षित के साथ भी फिल्म '100 डेज' में काम किया। उन दिनों वे फिल्मों में बहुत व्यस्त हुआ करती थीं, उन्हें कोलकाता और मुंबई के बीच में बहुत चक्कर लगाने पड़ते थे। क्योंकि मुनमुन सिर्फ हिंदी फिल्मों में ही नहीं, बल्कि बंगाली, मराठी, मलयालम, कन्नड़, तमिल और तेलुगू भाषाओं की फिल्मों में भी बराबर काम कर रही थीं।

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Moon Moon Sen - फोटो : Social Media

पूरे करियर में सिर्फ एक अवार्ड
मुनमुन सेन ने तेलुगू भाषा की सिर्फ दो ही फिल्मों 'सिरिवेनेला' और 'मंजू' में काम किया। इनमें से 'सिरिवेनेला' में बेहतरीन अदाकारी पेश करने के लिए आंध्रप्रदेश सरकार ने मुनमुन सेन को सहायक कलाकार के नंदी अवॉर्ड से नवाजा गया। यही वो इकलौता पुरस्कार है जो उन्हें उनके फिल्मी करियर के दौरान उनके काम के लिए मिला। इसके अलावा वे कलाकेंद्र स्क्रीन अवार्ड, भारत निर्माण अवार्ड और कलाकार अवार्ड भी जीत चुकी हैं।


लाल किले को ढहाया, भगवा से हारीं
2014 में मुनमुन सेन ने ममता बनर्जी के राजनीतिक दल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दामन थामा। उन्हें लोकसभा चुनाव में बांकुर सीट से खड़ा किया गया, जहां उन्होंने नौ बार सांसद रह चुके कम्युनिस्ट पार्टी के नेता बासुदेव आचार्या को भारी अंतर से हराया। 2019 के लोकसभा चुनावों में मुनमुन को भाजपा के बाबुल सुप्रियो के सामने हार का सामना करना पड़ा।

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