सूफी गायिका हर्षदीप कौर, अपनी निजी जिंदगी और गानों के कारण काफी चर्चा में रहती हैं। वे आज अपना जन्मदिन मना रही हैं। आइए आपको बताते हैं हर्षदीप कौर के जीवन की कुछ खास बातें।
पिता से विरासत में मिला संगीत
हर्षदीप कौर का जन्म 16 दिसंबर 1986 को दिल्ली में हुआ था। संगीत की विरासत हर्षदीप को अपने पिता से विरासत में मिली है। उनके पिता संगीत वाद्ययंत्र की फैक्ट्री रही है।
बचपन के दोस्त से कर ली शादी
हर्षदीप कौर और मनकीत बचपन के दोस्त रहे, उनकी दोस्ती गहरी होती गई और प्यार में बदल गई। हर्षदीप कौर और मनकीत के साथ 20 मार्च 2015 में शादी की, दोनों का एक बेटा भी है, जिसका नाम हुनर सिंह है।
बचपन से सीखती थीं गायन
हर्षदीपक कौर बचपन से ही गाने गाती थीं। वे सिंह ब्रदर्स के नाम से चर्चित तेजपाल सिंह से संगीत सीखती थीं। इसके बाद उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत और दिल्ली म्यूजिक थिएटर से शास्त्रीय संगीत भी सीखा।
पगड़ी पहनती हैं हर्षदीप कौर
हर्षदीप कौर गाने गाते वक्त पगड़ी पहनना चाहती हैं। वे एक शो जुनून कुछ कर दिखाने का में सिर ढककर गाना चाहती थीं। उनके जीजा ने इस बात की सलाह दी और तब से वे पगड़ी पहनकर ही गाना गाती हैं।
इन भाषाओं में गाना गाती हैं हर्षदीप कौर
हर्षदीप कौर पंजाबी भाषा के अलावा हिंदी, पंजाबी, मलयालम, तमिल और उर्दू समेत कई भाषाओं पर गाना गाती हैं। वे कई बड़े संगीत निर्देशकों के साथ काम कर चुकी हैं।
गाने को मिला था ऑस्कर
हर्षदीप कौर के गाने को ए आर रहमान का रचित गाना रहा। इस गाने को ऑस्कर पुरस्कार मिला। ये गाना डैनी बॉयल की फिल्म '127 ऑवर्स' का गाना था।
लाइव कॉन्सर्ट के लिए भी जानी जाती हैं हर्षदीप
हर्षदीप कौर अपनी कॉन्सर्ट के कारण जानी जाती हैं। वे ए आर रहमान के जय हो कॉन्सर्ट के लिए जानी जाती हैं। वहीं, रॉकस्टार कॉन्सर्ट के लिए भी चर्चा में रहीं।
इन गानों के कारण चर्चा में रही हर्षदीप कौर
हर्षदीप कौर ने कई शानदार गाने गाए हैं। हर्षदीप को 'दिलबरो', 'हीर', 'इक ओंकार', 'जालिमा', 'नचदे ने सारे', 'बारी बरसी', 'कबीरा', 'जुगनी जी', 'ट्विस्ट कमरिया' जैसे गानों के लिए चर्चा में रहीं हैं।
गायन के लिए मिले ये पुरस्कार
हर्षदीप कौर को कई सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका पुरस्कार मिले। उन्हें 'बानी-इश्क दा कलमा' के लिए भारतीय टेलीविजन अकादमी पुरस्कार, राजी के लिए स्क्रीन अवॉर्ड, जी सिने अवॉर्ड और भारतीय फिल्म अकादमी पुरस्कार मिला।