सना मकबूल
- फोटो : इंस्टाग्राम- सना मकबूल
सना ने कहा, "पहले दो हफ्ते सब कुछ ठीक लगता है, लेकिन जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ता है, चीजें बदलती चली जाती हैं। जो लोग साथ बैठते थे वे आपके बारे में बुरा-भला कहने लगते हैं और जो साथ नहीं बैठते वे आपकी पीठ पीछे और भी ज्यादा बातें करने लगते हैं। उन्होंने कहा, "एक समय ऐसा आया जब मैं बिल्कुल अकेली रह गई। घर में अलग-अलग समूह बनने लगे। फिर एक पल ऐसा आया जब मेरे दोस्त दूर होने लगे और ऐसा लगा कि मेरे जो दोस्त थे, जो मुझे समझते थे, मुझे लाड़-प्यार करते थे और मुझे हंसाते थे, वे अब नहीं रहे। उनके साथ रहना, उनके साथ खाना-पीना अच्छा लगता था। मेरे लिए कुछ और मायने नहीं रखता था, क्योंकि ये चार लोग मेरे साथ थे, लेकिन जैसे-जैसे वे जाने लगे, यह और भी बुरा लगने लगा और घर मेरे खिलाफ होता चला गया। लेकिन मुझे लगता है कि यह मेरी दृढ़ इच्छाशक्ति थी कि आपको हार नहीं माननी चाहिए और मैं बहुत केंद्रित थी।"