भोजपुरी सिनेमा की शुरुआत फिल्म 'गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो' से हुई। एक लंबे अरसे तक भोजपुरी सिनेमा के शीर्षकों में मिट्टी की खुशबू और इसकी संस्कृति की मिठास कायम रही। 'धरती मइया', 'गंगा किनारे मोरा गांव', 'हमार भौजी', 'दूल्हा गंगा पार के', 'बैरी कंगना' जैसे शीर्षकों से सैकड़ों फिल्में बनीं। फिर आया 'विवाह', 'संघर्ष', 'गुलामी', 'गॉडफादर', 'जीना तेरी गली में', 'बागी', 'अंधा कानून', 'कभी खुशी कभी गम' जैसी भोजपुरी फिल्मों का जमाना। हिंदी सिनेमा कहानियों की कमी से जूझ रहा है और भोजपुरी सिनेमा शीर्षकों के नाम सोच न पाने के दौर से। भोजपुरी फिल्मों के नाम हिंदी फिल्मों के नाम पर रखने की क्या वजह रही है, आइए जानते हैं भोजपुरी सिनेमा के इन दिग्गजों से.....