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भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान, जानिए पहले कब और कहां हुआ ऐसा

Fri, 15 Jan 2021 08:38 PM IST
Devesh Devesh एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान - फोटो : iStock
16 जनवरी, 2021 का दिन वैश्विक इतिहास में बड़े गर्व के साथ भारत के नाम पर दर्ज किया जाएगा। इसकी प्रमुख वजह बनेगा भारत सरकार द्वारा जनस्वास्थ्य क्षेत्र में उठाया जा रहा एक बड़ा कदम। यह कदम कुछ और नहीं बल्कि संक्रामक वैश्विक महामारी कोविड-19 यानी कोरोना वायरस के खिलाफ भारत में शुरू किया जा रहा दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान ( COVID-19 Vaccination Drive) है।  आइए जानते हैं भारत में कोरोना टीकाकरण अभियान और इससे पहले विभिन्न देशों में बड़े स्तर पर चलाए गए प्रमुख टीकाकरण अभियानों के बारे में ...
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : अमर उजाला
भारत में कोरोना टीकाकरण अभियान 
भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण प्रसार के खिलाफ दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शनिवार, 16 जनवरी, 2021 से शुरू हो रहा है। इस दिन देशभर में 3006 केंद्रों पर कोविड-19 के टीके लगाने की शुरुआत की जाएगी। पहले दिन 3,00,600 लोगों को टीके की पहली खुराक दी जाएगी। ये सभी स्वास्थ्यकर्मी होंगे, जो कोरोना संक्रमितों के उपचार के कारण सीधे वायरस के संपर्क में आ रहे हैं। अभियान की सतत निगरानी के लिए एक पोर्टल भी बनाया गया है। 
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कोल्ड चेन कक्ष में रखी गईं वैक्सीन - फोटो : अमर उजाला
देश में 30 करोड़ लोगों को लगेगा टीका 
इसके जरिये देश में करीब 30 करोड़ लोगों को टीका लगाए जाने की योजना है। अभियान के तहत सबसे पहले 01 करोड़ स्वास्थ्यकर्मियों, 02 करोड़ फ्रंटलाइन वर्कर्स ( इनमें पुलिस, सैन्य कर्मी, सरकार से संबंद्ध आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मी), 26 करोड़ बुजुर्ग ( 50 से अधिक उम्र वाले नागरिक) और 01 करोड़ वे युवा जो किसी न किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं। टीकाकरण अभियान में करीब पांच लाख से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी टीके लगाने का काम करेंगे।  

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भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान - फोटो : अमर उजाला
इंडोनेशिया में 18.15 करोड़ का टीकाकरण 
इंडोनेशिया ने बुधवार को दुनिया के सबसे बड़े कोरोना टीकाकरण अभियानों में से एक का शुभारंभ किया। वहां चीनी वैक्सीन कोरोनावैक की खुराक सबसे पहले राष्ट्रपति जोको विडोडो को दी गई। यहां अभियान का उद्देश्य 18.15 करोड़ लोगों को टीका लगाना है। इंडोनेशिया ने सोमवार को ही आपातकालीन उपयोग के लिए चीन की सिनोवैक बायोटेक से प्राप्त कोरोनावैक वैक्सीन को अधिकृत किया था। यहां फरवरी तक लगभग 15 लाख चिकित्साकर्मियों का टीकाकरण किया जाएगा। इसके बाद 15 महीनों के भीतर लोक सेवक और सामान्य आबादी में टीका लगाया जाएगा। 
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भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान - फोटो : अमर उजाला
चीन में 70 फीसदी आबादी का लक्ष्य, फरवरी तक 05 करोड़ को लगेगा 
चीन फरवरी में स्प्रिंग फेस्टिवल सीजन से पहले 5 करोड़ लोगों को टीका लगाने की योजना में है। सामूहिक टीकाकरण के माध्यम से हर्ड इम्युनिटी का लक्ष्य रखते हुए चीन ने चीनी नव वर्ष से पहले उच्च जोखिम वाले समूहों अस्पताल, स्कूल, पुलिस स्टेशन और उद्योगों में 05 करोड़ लोगों को टीका लगाएगा। हालांकि, इसके बाद वहां 70 फीसदी आबादी के टीकाकरण का लक्ष्य पर काम किया जाएगा। 
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वैक्सीन लगने के बाद भी बरतें ये सावधानियां - फोटो : Amar Ujala
भारत का यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम 
भारत का यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (यूआईपी) सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में से एक है, जो सालाना 2.67 करोड़ नवजात शिशुओं और 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं को लक्षित करता है। यूआईपी के तहत, 12 अलग-अलग बीमारियों के खिलाफ वैक्सीन का नि: शुल्क टीकाकरण होता है। इसमें राष्ट्रीय स्तर पर 9 बीमारियों - डिप्थीरिया, पर्टुसिस, टेटनस (Td), पोलियो (IPV), खसरा, रूबेला (MR), तपेदिक, हेपेटाइटिस बी और मेनिनजाइटिस और निमोनिया हेमोफिलिया इन्फ्लुएंजा प्रकार बी है। इसके अलावा, क्षेत्र विशेष में 03 बीमारियों रोटावायरस दस्त, न्यूमोकोकल निमोनिया और जापानी इन्सेफलाइटिस शामिल हैं; हालांकि, रोटावायरस वैक्सीन (RVV) और न्यूमोकोकल निमोनिया (PCV) वैक्सीन विस्तार की प्रक्रिया में हैं। 
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लेडी लॉयल में ड्राई रन के दौरान स्वास्थ्यकर्मी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता - फोटो : अमर उजाला
भारत में चेचक के खिलाफ अभियान 
चेचक की बीमारी की वजह से 20वीं सदी में दुनियाभर में करीब 30 करोड़ लोगों की मौत हुई थी। डब्ल्यूएचओ ने दिसंबर 1979 में इसके खात्मे की पुष्टि की थी। आजादी के बाद भारत में इस महामारी के खिलाफ टीका बनाने के प्रयास शुरू हुए। तब मद्रास के किंग्स इंस्टीट्यूट में बीसीजी टीके को बनाने के लिए लैब बनाई गई थी। 1949 में स्कूल स्तर पर और 1951 से देशभर में व्यापक टीकाकरण की शुरुआत हुई थी। 1962 में राष्ट्रीय चेचक उन्मूलन कार्यक्रम (NSEP) की शुरुआत भी की गई। 1974 में चेचक के 1,88,000 मामले सामने आए। उस दौरान 31,000 लोगों की जान भी गई। खैर 1977 भारत चेचक मुक्त घोषित हुआ। 
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polio
भारत में पोलियो के खिलाफ लड़ाई 
देश में जब पोलियो का संक्रमण चरम पर था तब यहां 6.4 लाख पोलियो बूथ बनाए गए थे। देश के पोलियो उन्मूलन अभियान में लगभग 23 लाख लोगों ने काम किया। देश में एक दिन के अभियान में करीब दो करोड़ पोलियो खुराक पिलाई जाती थी। देश में सालाना लगभग 12 करोड़ बच्चों को पोलियो खुराक दी जाती है। े मार्च 2014 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत को पोलियो मुक्त घोषित कर दिया।
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