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जलवायु संकट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों से पता चलता है कि गर्मी सभी मौसमों में हो रही है, गर्मी और सर्दियों के तापमान में औसत अंतर 1901 में चार डिग्री सेल्सियस की तुलना में पांच डिग्री सेल्सियस है। रिकॉर्ड देखें तो पता चलता है कि 2020 पर आठवां सबसे गर्म वर्ष था और 2009 के बाद 2016 अब तक का सबसे गर्म वर्ष था। वहीं, 2006-2020 के दौरान पिछले 15 वर्षों में से 12 सबसे गर्म वर्षों में दर्ज किए गए और 2011-20 रिकॉर्ड सबसे गर्म दशक रहा है।
यह भारत के लिए एक चेतावनी है, जिसमें 2020 में औसत वार्षिक तापमान 25.78 डिग्री सेल्सियस रहा है। सीएसई की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत के सबसे गरीब और आबादी वाले राज्य बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, असम, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जलवायु संकट की चपेट में सबसे अधिक थे। इसके आकलन का भेद्यता सूचकांक 14 संकेतकों पर आधारित है, जिसमें लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल राज्यों की क्षमता आदि बिंदु शामिल हैं।
जलवायु संकट का सबसे बड़ा मानवीय परिणाम बड़े पैमाने पर विस्थापन है। आंतरिक विस्थापन निगरानी केंद्र (IDMC) के अनुसार, भारत दुनिया का चौथा सबसे खराब जलवायु प्रेरित आपदा प्रभावित देश है, और मई तक 2020 और 2021 में बाढ़, तूफान और चक्रवात जैसी कई आपदाओं का सामना कर चुका है। भारत भूकंप, सुनामी, चक्रवात, तूफानी लहरों और सूखे सहित अन्य अचानक और धीमी गति से शुरू होने वाले खतरों से भी ग्रस्त है। सीएसई ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2011-2020 के दशक में 33 चक्रवात देखे गए, जो 1971 के बाद सबसे अधिक हैं। भारत में 2008 और 2020 के बीच औसतन लगभग 37 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए। इनमें से अधिकांश बाढ़ के कारण विस्थापित हुए हैं।