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क्यों इस देश में नीले रंग से रंगी जा रही हैं सड़कें, भारत भी अपना सकता है तरीका?

Wed, 04 Sep 2019 01:58 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

  • एक देश जहां नीले रंग से रंगी जा रही हैं सड़कें
  • पायलट प्रोजेक्ट के बाद लॉन्च किया कैंपेन
  • वैज्ञानिकों का दावा - 50 फीसदी तक कम हो जाएगा रेडिएशन
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कतर में नीली सड़क - फोटो : Twitter
अब तक आपने हर जगह सड़कों का रंग काला ही देखा होगा। लेकिन एक ऐसा देश है जहां आपको नीले रंग की सड़कें देखने के लिए मिलेंगी। इस देश का नाम है कतर। जी हां, कतर ने अपनी सड़कों को नीले रंग में रंगना शुरू कर दिया है। इसकी शुरुआत उन्होंने अपनी राजधानी दोहा से की है। लेकिन यहां ऐसा क्यों किया जा रहा है? इस सवाल का जवाब हम आपको आगे दे रहे हैं।
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नीली सड़क - फोटो : Twitter
दरअसल, कतर के इस कदम का कारण है दिन प्रतिदिन बढ़ रही ग्लोबल वॉर्मिंग की समस्या। गल्फ न्यूज में प्रकाशित खबर के अनुसार, दोहा की पुरानी सड़कों को नीले रंग में रंगा गया है, ताकि यहां के तापमान को नियंत्रित किया जा सके। लेकिन रंग बदलने से क्या होगा असर? आगे है जवाब।
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नीले रंग की सड़क - फोटो : Twitter
गौरतलब है कि ग्लोबल वॉर्मिंग और बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने के लिए कई देश लगातार कदम उठा रहे हैं। इसी क्रम में कतर ने भी यह प्रयोग किया है।

कतर में 18 महीने तक इसके लिए पहले पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया। इसके बाद 19 अगस्त को शहर के एक प्रमुख रोड को पूरी तरह से नीले रंग में रंग कर कैंपेन लॉन्च किया गया।

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नीले रंग से रंगी जा रही हैं सड़कें - फोटो : Twitter
कतर ने यह जांचा कि पारंपरिक काले रंग की सड़कों की तुलना में नीले रंग की कोटिंग वाली सड़कों के तापमान में कितना फर्क आता है। इसके लिए बाकायदा सेंसर्स लगाए गए हैं। 

हालांकि वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह नीली कोटिंग सूर्य से निकलने वाले रेडिएशन को 50 फीसदी तक कमा कर सकेगी। इसके लिए सड़क पर नीले रंग की एक मिमी मोटी परत चढ़ाई गई है। 
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कतर में पायलट प्रोजेक्ट के बाद कैंपेन लॉन्च - फोटो : Twitter
वहीं, इंजीनियर साद अल-दोसारी ने ट्वीट किया है कि काले रंग की सड़क का तापमान उस जगह के वास्तविक तापमान से करीब 20 डिग्री से. तक ज्यादा होता है। क्योंकि काला रंग गर्मी सोख कर उसे फिर रेडिएट करता है।
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फीफा लोगो - फोटो : social Media
अब सवाल ये है कि अगर कतर का ये प्रयोग सफल होता है, तो क्या भारत में भी इस तकनीक को लागू किया जाना चाहिए? क्या भारत में इसके लिए पायटल प्रोजेक्ट चलाया जा सकता है?

बता दें कि कतर इस बार 2022 में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप की मेजबानी भी कर रहा है। इस देश में फीफा की तैयारियां भी जोरों पर चल रही हैं।
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