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सचिन तेंदुलकर, प्रणब मुखर्जी से लेकर बिल गेट्स तक.. कैसे उनके शिक्षकों ने उन्हें बड़ा बनाया

Thu, 05 Sep 2019 10:43 AM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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सचिन तेंदुलकर और बिल गेट्स
शिक्षकों का प्रभाव हम सभी के जीवन पर होता है। आज हम जीवन में जो कुछ भी कर रहे हैं, उसमें कहीं न कहीं हमारे शिक्षकों का भी योगदान है। देश दुनिया की कई प्रसिद्ध हस्तियों ने भी इस बात को माना है और अपनी कहानियां साझा की हैं। 

सचिन तेंदुलकर, प्रणब मुखर्जी से लेकर बराक ओबामा और बिल गेट्स तक... इन सभी बड़ी शख्सियतों ने अपने उन शिक्षकों के बारे में खुल कर बात की है। बताया है कि कैसे उनके शिक्षकों ने उन्हें बड़ा इंसान बनने, बड़ी पहचान दिलाने में मदद की है। यहां हम आपको ऐसी ही कुछ शख्सियतों और उनके शिक्षकों की वो कहानियां बता रहे हैं जो उन्होंने खुद शेयर की हैं।




 
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बिल गेट्स
बिल गेट्स
माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) के फाउंडर और दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक हैं बिल गेट्स। उन्होंने हमेशा अपनी कामयाबी का श्रेय अपनी शिक्षक ब्लांच कैफिरी को दिया है। 

अपने पर्सनल ब्लॉग पर बिल गेट्स ने लिखा कि वह हमेशा लोगों से यह सच छिपाते फिरते थे कि उन्हें पढ़ना पसंद है। क्योंकि लड़कों के लिए यह कूल नहीं माना जाता। लोगों की नजर में नहीं आना चाहते थे क्योंकि उनकी हैंडराइटिंग अच्छी नहीं थी। फिर उनकी टीचर कैफिरी ने उन्हें अपनी छांव दी और सिखाया कि अस्तव्यस्त और किताबी कीड़ा होना भी बुरा नहीं है। वह लिखते हैं, ' उन्होंने (कैफिरी) किताबों के प्रति अपना प्यार मेरे साथ साझा किया और मुझे मेरे शेल से खींच कर बाहर निकाला।'
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सचिन तेंदुलकर
सचिन तेंदुलकर
क्रिकेट का भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने हमेशा अपने शिक्षक और कोच रमाकांत अचरेकर के प्रति आभार व्यक्त किया है। सचिन कहते हैं, 'अपने स्कूल के दिनों में मैं सिर्फ जूनियर टीम के लिए खेलता था। हमारी सीनियर टीम वानखेड़े स्टेडियम में हैरिस शील्ड फाइनल्स खेल रही थी। तब मेरे कोच रमाकांत अचरेकर सर न मेरे लिए एक प्रैक्टिस मैच रखा। स्कूल के बाद वहां जाने को कहा और चौथे नंबर पर बैटिंग के लिए उतारा। कहा कि ये मेरी ट्रेनिंग है। मुझे सीखना है कि मिडल ऑर्डर में जा कर रन कैसे बनाने हैं।'

'लेकिन मैं उसे छोड़ कर वानखेड़े में चल रहा हैरिस शील्ड फाइनल देखने बैठ गया। मैच के बाद मैने अचरेकर सर को देखा और सोचना उन्हें विश करना अच्छा रहेगा। उन्होंने मुझसे पूछा, मैंने कितने रन बनाए। मैंने कहा मैं कभी खेलने ही नहीं गया क्योंकि मुझे अपनी सीनियर टीम को चीयर करना था। ये सुनकर उन्होंने मुझे सबके सामने खूब डांटा। कहा कि मुझे दूसरों के लिए तालियां बजाने की जरूरत नहीं है। खुद के खेल का ध्यान रखना चाहिए और कुछ ऐसा करना चाहिए कि दुनिया एक दिन मेरे लिए तालियां बजाए। वो मेरे जीवन की सबसे बड़ी सीख थी। उस दिन के बाद मैंने कभी कोई मैच नहीं छोड़ा।'

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ओपरा विनफ्रे - फोटो : obamawhitehouse.archives.gov
ओपरा विनफ्रे
प्रसिद्ध अमेरिकन टॉक शो की होस्ट और सेलिब्रिटी ओपरा विनफ्रे अपने आत्मनिर्भर, बोल्ड और स्ट्रॉन्ग होने के लिए अपनी शिक्षक डंकैन को श्रेय देती हैं। ओपरा बताती हैं, 'एक बारे मेरे शो पर अचानक मेरी फोर्थ ग्रेड की टीचर मिसेज डंकैन को बुला लिया गया। वो मेरे लिए बेहद खूबसूरत लम्हा था। मेरी आंखों में आंसू आ गए।'  

वह कहती हैं, 'मुझे याद है कि डंकैन हमेशा स्कूल के बाद भी मेरे लिए रुकती थीं। मुझे लगता था कि मैं भी एक दिन फोर्थ ग्रेड की टीचर बनूंगी। जब मैं छोटी थी मुझे लगता था कि क्लास के बाहर मिसेज डंकैन की कोई जिंदगी ही नहीं है। उनकी क्लास में मैं अपने वास्तविक रूप में होती थी। इतने सालों बाद मैं कह सकती हूं कि ये वो महिला है जिनका मेरे जीवन पर बेहद गहरा और शक्तिशाली प्रभाव है।'
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बराक ओबामा
बराक ओबामा
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने हमेशा अपने शिक्षकों के बारे में बात की है। एक बार उन्होंने कहा, 'हमारे दैनिक जीवन में जो महिला व पुरुष हमारे बच्चों को पढ़ाते हैं, वे आगे बढ़ रहे देश में अपनी भूमिका अदा करते हैं। क्योंकि हर पीढ़ी की ये जिम्मेदारी है कि वो अगली पीढ़ी की मदद कर देश और दुनिया को जीने के लिए एक बेहतर जगह बनाए।'

ओबामा कहते हैं 'यह ऐसा पेशा है जिसमें आपके पास बदलाव लाने की क्षमता होती है। इसलिए शिक्षक सिर्फ हमारा धन्यवाद या आभार के ही भागी नहीं होते। बल्कि उन्हें हमारी तरफ से पूरा सहयोग मिलना चाहिए।'

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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी
प्रणब मुखर्जी
भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी अपना करियर एक शिक्षक के रूप में शुरू किया था। राजनीति में आने से पहले वह एक शिक्षक थे। 2016 में दिए एक भाषण में उन्होंने कहा था, 'प्रेरित शिक्षक एक अच्छी शिक्षा प्रणाली को बनाने वाली ईंट की तरह होते हैं। एक प्रेरित शिक्षक किसी एक स्टूडेंट के लक्ष्य को पूरे समाज और राष्ट्र के लक्ष्य से जोड़ते हैं।'

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