संजित बंकर रॉय एक भारतीय सामाजिक आंदोलक और शिक्षक हैं। अनपढ़ लोगों को पढ़ाने और अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए उन्हें 2010 में टाइम 100 ने दुनिया के 100 प्रभावशाली व्यक्तियों में शामिल किया था।
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दादी नानी को पढ़ाता है ये शख्स, इसका मकसद है कुछ खास
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- फोटो : Getty Images
इसके अलावा उन्हें समाज के विकास में उनके योगदान के लिए कई अवार्ड्स मिल चुके हैं। बंकर रॉय ने गांधी जी के सिद्धांतों से प्रभावित होकर टिलोनिया राजस्थान में 1972 में बेयरफूट कॉलेज बनाया था।
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ये कॉलेज शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और सौर्य ऊर्जा के क्षेत्र में बहुत काम कर रहा है। कॉलेज से हर साल हजारों अध्यापक, डॉक्टर, डेन्टिस्ट, आर्किटेक्ट, स्वास्थ्यकर्मी, डिजाइनर कंप्यूटर प्रोग्रामर और अकाउंटेंट निकलते हैं।
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बेयरफूट कॉलेज का उद्देश्य बेहद गरीब या यूं कहें गरीबों में भी गरीब लोगों को शिक्षित करके उन्हें उनके पैरों पर खड़ा करना है।
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बेयरफूट कॉलेज गांव की गरीब महिलाओं को सोलर लैंप और वॉटर पंप बनाना सिखाता है। आज गांव की कई महिलाएं इनकी बदौलत सोलर पैनल को खुद इंस्टॉल कर सकती हैं, वो खुद ही इसके माइक्रोचिप्स भी बनाती हैं।
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संजित गांव की औरतों और गरीबों के जीवन में भगवान बनकर आए। उन्होंने बहुत से लोगों का जीवन स्तर उठाया है और उन्हें समाज में इज्जत के साथ जीने का मौका दिया है।
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रॉय का कहना है कि अगर आप किसी पुरुष को ट्रेनिंग देते हैं तो वो शहर जाकर अपना काम शुरु कर देता है। जबकि हम महिलाओं, माताओं और दादी मांओं को ट्रेनिंग देते हैं। ये महिलाएं कभी भी गांव नहीं छोड़ती और गांव के विकास में अपने कौशल का इस्तेमाल करती हैं।