आज के दौर में बालों को सुरक्षित और साफ रखने में शैंपू का अहम योगदान है। लेकिन आज से 30 साल पहले ऐसा नहीं था। उस समय तमिलनाडु के एक छोटे से कस्मे से निकले 22 साल के नौजवान ने सोच नहीं था कि उसका एक इरादा काफी आएगा। रंगनाथन...ये वहीं नाम है जो घर से 15 हजार रुपये लेकर निकला था। उसका इरादा खुद का बिजनेस खोलने का था। आज उनकी ऐसी किस्मत है कि सालाना टर्नओवर 1450 करोड़ से ऊपर का हो गया है।
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फाइल फोटो
रंगनाथन आज मशहूर शैंपू चिक बनाने वाली कंपनी केवनिकेयर प्राइवेट लिमिटेड के मालिक हैं। ये शैंपू श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, मलेशिया और सिंगापुर जैसे देशों में भी बिकने लगा। आज उनकी कंपनी में 4,000 से भी ज्यादा लोग काम करते हैं। इस प्रॉडक्ट ने उन्हें इतनी सफलता दी कि आज उनका टर्नओवर 1450 करोड़ जा पहुंचा है। उन्होंने जो फैक्ट्री ली थी उसका किराया हर महीने सिर्फ 300 रुपये था। उन्होंने मशीन और बाकी चीजों पर 3,500 रुपये खर्च किए थे।
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वो इंसान कोई और नहीं मशहूर शैंपू चिक बनाने वाली कंपनी केवनिकेयर प्राइवेट लिमिटेड के मालिक रंगनाथन हैं। उनकी कंपनी शैंपू के अलावा, डेयरी, बेवरेज और सलून के बिजनेस में भी काम कर रही है। घर से 15,000 रुपये निकलने के बाद रंगनाथन ने सबसे पहले अपने रहने का इंतजाम किया। लेकिन यह जगह उनके घर से सिर्फ कुछ कदमों की दूरी पर ही थी। शुरू में तो वह शैंपू के ही बिजनेस में उतरकर अपने भाई से नहीं लड़ना चाहते थे। उन्होंने पोल्ट्री फार्म जैसे बिजनेस में हाथ आजमाने के बारे में सोचा, लेकिन जानकारी होने की वजह से उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि किया क्या जाए।
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उन्हें लगा कि जानकारी तो सिर्फ शैंपू बनाने की है, तो फिर किसी और बिजनेस में हाथ डालने का जोखिम क्यों लिया जाए। उन्होंने अपने घर से 20 किलोमीटर दूर पुडुचेरी के पास फैक्ट्री लगाने के बारे में सोचा। सिर्फ एक हफ्ते में ही उन्हें शैंपू बनाने का लाइसेंस ले लिया। उन्होंने चिक ब्रैंड के नाम से शैंपू बनाना शुरू किया जिसका एक छोटा सा 7ml का शैशे सिर्फ 75 पैसे में मिला करता था। इस प्रोडक्ट को लोगों ने इतना पसंद किया कि सिर्फ एक महीने के भीतर वह काफी पॉप्युलर हो गया।
इस नाम को चुनने के पीछे के बारे में वह बताते हैं कि उनके पिता का नाम चिन्नी कृष्णन था। वहीं से उन्होंने यह नाम उठाया। इस प्रॉडक्ट ने उन्हें इतनी सफलता दी कि आज उनका टर्नओवर 1450 करोड़ जा पहुंचा है। उन्होंने जो फैक्ट्री ली थी उसका किराया हर महीने सिर्फ 300 रुपये था। उन्होंने मशीन और बाकी चीजों पर 3,500 रुपये खर्च किए थे।