युवाओं में पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए तरह-तरह की कोशिशें की जाती हैं लेकिन सकारात्मक नतीजा नहीं आते। लेकिन इस निराशा में एक उम्मीद की किरण साबित हुई हैं कर्नाटक की 103 साल की सालुमरादा टिम्माक्का वह इस उम्र में भी पेड़ पौधों को लगाती हैं और उनका ख्याल भी रखती हैं। वैसे यह उम्र घर पर आराम करने की होती है लेकिन सालुमरादा पर्यावरण के करीब जाकर ही खुद को ऊर्जवान महसूस करती हैं। जानें उनकी जिंदगी।
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सालुमरादा टिम्माक्का
- फोटो : wikipedia
सालुमरादा काफी गरीब हैं उनका जीवन सरकार की 500 रुपए की पेंशन पर चल रहा है। इसके बावजूद उन्होंने 384 पेड़ लगा रखे हैं, वह यह पौधे मॉनसून के समय लगाती हैं ताकि पानी की कोई समस्या न हो।
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सालुमरादा टिम्माक्का
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टिम्मक्का द्वारा पर्यावरण जागरुकता को बढ़ाने के प्रयासों को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर काफी सराह गया और उन्हें नेशनल सिटीजन अवार्ड से भी नवाजा गया। टिम्मक्का जंगल से बहुत प्रेम करती हैं और जंगल बचाने के लिए लोगों को जागरुक भी करती हैं।
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टिम्मक्का ने औपचारिक शिक्षा हासिल नहीं की है वह साधारण परिवार से हैं उनके परिवार में केवल उनके पति थे लेकिन कई साल पहले उनकी मृत्य़ु हो गई। उन्होंने बाद में एक लड़के को गोद लिया जिसे वह पर्यावरण से प्रेम करने के लिए प्रेरित करती हैं।
सालुमरादा टिम्माक्का एक अस्पताल शुरू करने चाहती है उनका सपना है कि मैं एक अस्पलाल बनवाऊं और उन्हें उम्मीद है कि यह एक दिन जरूर पूरा होगा। अस्पताल के लिए वह अभी भी कोशिश कर रही हैं और उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है।