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ढाई रुपये रोजाना कमाने वाला शख्स गलियों में बोलता था-'साड़ी ले लो', आज करोड़ों का मालिक

Mon, 09 Jul 2018 02:10 PM IST
जॉब डेस्क, अमर उजाला
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कोलकाता की गलियों में, 'साड़ी ले लो' की आवाज लगाने वाले बिरेन कुमार बसाक ने अपनी किस्मत के आगे कभी हार नहीं मानी और सफलता हासिल करने के लिए जी जान लगी दी। दरअसल, बसाक अपने कंधे पर साड़ियों को लादकर गली-गली घूमकर साड़ी बेचा करते थे। वह कभी एक बुनकर के यहां 2.50 रुपये दिहाड़ी पर साड़ी बुनने का काम किया करते थे लेकिन उनकी मेहनत ने अपना रंग दिखाया और अब वह साड़ी कंपनी के मालिक हैं। आपको बता दें कि बिरेन कुमार बसाक, 'बसाक एंड कंपनी' के मालिक हैं। उनकी साड़ी कंपनी का वार्षिक टर्नओवर 50 करोड़ रुपये है।
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नदिया जिले के बिरेन कुमार बसाक ने 20 साल पहले 6 गज की एक साड़ी बुनी थी जिस पर उन्होंने रामायण के सात खंडों को उकेरा था। धागों में रामायण उकेरने की तैयारी में उन्हें एक साल लग गया था जबकि उसे बुनने में करीब 2 साल लगे थे। उन्होंने साल 1996 में इस साड़ी को तैयार किया था। नदिया जिले के फुलिया इलाके के हथकरघा बुनकर बिरेन को ब्रिटेन की एक यूनिवर्सिटी ने उनके इस कार्य के लिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया था। सिर्फ इतना ही नहीं  ब्रिटेन की वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी ने भी उन्हें डॉक्टरेट की डिग्री से सम्मानित किया था। 
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बसाक की 6 गज की यह जादुई कलाकृति उन्हें इससे पहले भी राष्ट्रीय पुरस्कार, नेशनल मेरिट सर्टिफिकेट अवॉर्ड, संत कबीर अवॉर्ड दिला चुकी है। इसके अलावा लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड, इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और वर्ल्ड यूनिक रिकॉर्ड्स में भी उनका नाम दर्ज है। खबर थी कि मुंबई की एक कंपनी ने साल 2004 में बिरेन कुमार बसाक को इस साड़ी के बदले में 8 लाख रुपये ऑफर किए थे लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया था। 

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बाद में उन्हें नदिया जिले के फुलिया में एक बुनकर के यहां 2.50 रुपये दिहाड़ी पर साड़ी बुनने का काम मिला था। यहां उन्होंने करीब 8 साल काम किया। इसके बाद उन्होंने खुद का बिजनेस शुरू करने का फैसला लिया और इसके लिए उन्होंने अपना घर गिरवी रख दिया। घर के बदले में उन्हें 10 हजार रुपये का लोन मिला। अपने बड़े भाई के साथ मिलकर वो बुनकर के यहां से साड़ी लेकर उन्हें बेचने के लिए कोलकाता जाते रहते थे।
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उन्होंने साल 1987 में साड़ी की अपनी पहली दुकान खोली। उस वक्त उनके पास सिर्फ 8 लोग काम करते थे। धीरे-धीरे बिजनेस बढ़ता चला गया। आज वह हर महीने हाथ से बनी 16 हजार से ज्यादा साड़ियां देश भर में बेचते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं अब उनके यहां कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 24 हो गई और वह करीब 5 हजार बुनकरों के साथ काम कर रहे हैं। अब उनकी कंपनी का टर्नओवर 50 करोड़ रुपए हो गया है।
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