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मुशर्रफ ही नहीं, दुनिया के इन राष्ट्रपतियों व प्रधानमंत्रियों को भी मिल चुकी है सजा-ए-मौत

Thu, 19 Dec 2019 10:05 AM IST
Mohit Mudgal एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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मौत की सजा पाने वाले राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री
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पाकिस्तान के पू्र्व राष्ट्रपति और तानाशाह परवेज मुशर्रफ को फांसी की सजा सुनाई गई है। मंगलवार को इस्लामाबाद की विशेष अदालत ने मुशर्रफ को राजद्रोह का दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है। लेकिन ये पहली बार नहीं है जब किसी राष्ट्र प्रमुख को किसी जुर्म के लिए मौत की सजा सुनाई गई है। पहले भी ऐसा हो चुका है। दुनिया के कई देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को सजा-ए-मौत दी गई है। किसी को उन्हीं के देश की न्यायालय ने मौत की सजा दी तो किसी को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय से सजा-ए-मौत मिली। ऐसे ही कुछ राष्ट्रपतियों व प्रधानमंत्रियों के बारे में हम आपको आगे की स्लाइड में बता रहे हैं। देखें आगे की स्लाइड्स।

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आयन एंटोन्सक्यू , रोमनिया

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Ion Antonescu - फोटो : social media
  • आयन एंटोन्सक्यू का जन्म 14 जून 1882 को हुआ था। वो सैनिक और सत्तावादी राजनेता थे।
  • द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान साल 1940 से 1944 तक वह रोमानिया के प्रधानमंत्री रहे।
  • तानाशाही शासन के दौरान वह खुद प्रधानमंत्री के साथ-साथ विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री के पद पर भी बने रहे।
  • विश्व युद्ध के बाद आयन को युद्ध अपराधों, शांति भंग करने और राजद्रोह का दोषी ठहराया गया और मौत की सजा सुनाई गई।
  • 1 जून 1946 को सेना के फायरिंग दस्ते ने उन्हें गोली मारकर सजा-ए-मौत दे दी।
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इवान इवानोव बैग्रीआनोव, बल्गेरिया

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Ivan Ivanov Bagryanov - फोटो : social media
  • इवान इवानोव बैग्रीआनोव का जन्म 17 अक्तूबर 1891 को हुआ।
  • वे एक प्रमुख बल्गेरियाई राजनेता थे, जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान (1 जून 1944 से 2 सितंबर 1944 तक) बल्गेरिया के प्रधानमंत्री थे।
  • बैग्रीआनोव को उनके पश्चिमी समर्थक विचारों के लिए जाना जाता था।
  • वे चाहते थे कि रेड आर्मी के आने से पहले बल्गेरिया को युद्ध से बाहर निकाल लें। इसके लिए उन्होंने पश्चिमी देशों से बातचीत के दरवाजे खोले पर इसमें पूरी तरह विफल रहे।
  • एक संघर्ष के बाद उन्होंने सभी यहूदी विरोधी कानूनों को समाप्त किया। जिसके बाद बल्गेरिया में कम्युनिस्ट नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आई, जिसने उन्हें युद्ध अपराधों का दोषी करार देकर 1 फरवरी 1945 को फांसी दे दी।

जुल्फिकार अली भुट्टो, पाकिस्तान

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  • जुल्फिकार अली भुट्टो का जन्म 5 जनवरी 1928 को अविभाजित भारत के बॉम्बे प्रेसिडेंसी (वर्तमान में पाकिस्तान का सिंध प्रांत) में हुआ था।
  • वह साल 1973 से 1977 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे और इससे पहले अय्यूब खान के शासनकाल में विदेश मंत्री रहे थे।
  • अय्यूब खान से मतभेद होने के कारण साल 1967 में  उन्होंने अपनी नई पार्टी (पीपीपी) की स्थापना की।
  • साल 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1965 और 1971 के पाकिस्तान युद्ध, तीनों के समय भुट्टो महत्वपूर्ण पदों पर थे।
  • साल 1979 में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद उन्हें फांसी पर लटका दिया गया था। इसमें उस समय के सैन्य शासक जिया उल हक का हाथ माना जाता है।
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डोबरी बोझिलोव, बल्गेरिया

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Dobri_Bozhilov - फोटो : social media
  • डोबरी बोझिलोव का जन्म 13 जून 1884 को हुआ। वे बल्गेरिया के 29वें प्रधानमंत्री थे।
  • द्वितीय विश्व युद्ध के समय बोझिलोव प्रधानमंत्री थे और उन्होंने जर्मन के साथ मिलकर काम किया, उनके बारे में यह कहा जाता है कि वो युद्ध के दौरान उनकी कठपुतली बन गए थे।
  • वह नाजियों की केवल एक चीज के समर्थन में नहीं थे कि सरकार सभी यहूदियों को कन्सेंट्रेशन कैंपों में भेज दें और उन्होंने ऐसा किया भी नहीं।
  • बोझिलोव को भी कम्युनिस्ट नेतृत्व वाली सरकार ने युद्ध अपराधों का दोषी करार देते हुए फरवरी 1945 में मौत की सजा दे दी थी।
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हिदेकी तोजो, जापान

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hideki tojo - फोटो : social media
  • हिदेकी तोजो का जन्म 30 दिसम्बर 1884 को हुआ। वे जापान के एक सैनिक अधिकारी और राजनीतिक नेता थे।
  • उनकी शिक्षा इंपीरियल मिलिटरी अकादमी से हुई, जिसके बाद उनकी नियुक्ति उप-लेफ्टिनेंट के पद पर कर की गई थी।
  • साल 1960 में हिदेकी युद्धमंत्री बने। जिसके एक साल बाद उन्होंने प्रधानमंत्री का पद संभाला।
  • मरियाना द्वीपसमूह पर अमेरिका के सफल आक्रमण के बाद जापानी सरकार निर्बल हो गई। 1945 में जापान ने औपचारिक आत्मसमर्पण किया।
  • आत्मसमर्पण के बाद तोजो ने आत्महत्या का प्रयास किया पर उनकी जान बच गई। इसके बाद उन्हें सैनिक अपराधी ठहराकर उन पर अभियोग चलाया गया और 23 दिसंबर 1948 को फांसी दे दी गई।
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सद्दाम हुसैन

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सद्दाम हुसैन - फोटो : फाइल फोटो
  • सद्दाम हुसैन का जन्म 28 अप्रैल 1937 को बगदाद के उत्तर में स्थित तिकरित के पास अल-ओजा गांव में हुआ।
  • साल 1957 में 20 साल के सद्दाम ने बाथ पार्टी की सदस्यता ली। पार्टी में सद्दाम ने सुन्नियों के बीच खुद को स्थापित किया और पीछे-पीछे एक समूह तैयार कर लिया। 16 जुलाई 1979 को अल बकर को सत्ता से हटाकर वो खुद इराकी गद्दी पर बैठ गया। उसने इराक के राष्ट्रपति की गद्दी हासलि की। 
  • सद्दाम हुसैन पर हजारों कुर्द, शिया और तुर्की के मुसलमानों की मौत का इल्जाम है। एक अंदाजे के मुताबिक सद्दाम हुसैन के शासनकाल में करीब 20 लाख लोगों की हत्या करवाई गई थी। सद्दाम ने करीब एक लाख कुर्दिश पुरुष, महिलाओं और बच्चों को रसायनों के जरिए मौत के घाट उतरवा दिया था।
  • 5 नवंबर 2006 को सद्दाम हुसैन को मौत की सजा सुनाई गई। इसके बाद उसे उत्तरी बगदाद के खदीमिया इलाके के कैंप जस्टिस में फांसी दे दी गई थी।
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