Nobel Prize: अपने क्षेत्र में इंसानियत की भलाई और ज्ञान के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाले लोगों को नोबेल पुरस्कार दिया जाता है। इस बार चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान और साहित्य के क्षेत्र में कुल दस (3+3+3+1) लोगों को चुना गया है। इसके अलावा, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता के नाम की घोषणा भी हो चुकी है। इस बार यह पुरस्कार मारिया कोरिना मचाडो को दिया गया है। आइए इन सब की पढ़ाई-लिखाई और करियर के बारे में जानें...
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नोबेल शांति पुरस्कार समेत अब पांच श्रेणियों में पुरस्कार विजेताओं के नाम की घोषणा हो चुकी है
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
Nobel Prize 2025: हर साल नोबेल पुरस्कार दुनिया के उन लोगों को दिया जाता है, जिन्होंने इंसानियत की भलाई और ज्ञान के क्षेत्र में कोई बड़ी मिसाल कायम की हो। 2025 में भी विज्ञान और साहित्य के 10 ऐसे लोगों को चुना गया जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र को नई दिशा दी। इसके अलावा, नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की मारिया कोरिना मचाडो को दिया गया है।
शांति: नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की मारिया कोरिना मचाडो को दिया गया है।
चिकित्सा: चिकित्सा के क्षेत्र में मैरी ई. ब्रुनको, फ्रेड राम्सडेल और शिमोन साकागुची को उनकी अभूतपूर्व खोजों के लिए 2025 का फिजियोलॉजी या मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार मिला।
भौतिकी: फिजिक्स के क्षेत्र में जॉन क्लार्क, मिशेल एच. डेवोरेट और जॉन एम. मार्टिनिस को यह सम्मान मिला, जिन्होंने क्वांटम सर्किट की दुनिया में नई क्रांति लाई।
रसायन विज्ञान: कैमिस्ट्री का नोबेल सुसुमु कितागावा, रिचर्ड रॉबसन और उमर एम. याघी को मिला, जिनके काम ने रेटिकुलर और फ्रेमवर्क केमिस्ट्री को आगे बढ़ाया।
साहित्य: साहित्य का सबसे बड़ा सम्मान इस बार हंगरी के लेखक लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई को दिया गया, जिनकी कहानियां मानव जीवन के गहरे पहलुओं को उजागर करती हैं।
Nobel Peace Prize 2025: मारिया कोरिना मचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार
मारिया कोरिना मचाडो वेनेजुएला की एक प्रमुख राजनेता और मानवाधिकारों की वकालत करने वाली शख्सियत हैं। उन्होंने लंबे समय से अपने देश में लोकतंत्र, चुनाव की पारदर्शिता और नागरिक स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया है
मारिया का जन्म 7 अक्तूबर 1967 को कराकस, वेनेजुएला में हुआ। उन्होंने एन्ड्रेस बेल्लो कैथोलिक यूनिवर्सिटी से औद्योगिक इंजीनियरिंग में डिग्री ली। इसके बाद उन्होंने इंस्टीट्यूटो डी एस्टुडिओस सुपीरियरेस डी एडमिनिस्ट्रेशन (IESA) से वित्त (फाइनेंस) में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की।
मचाडो ने 2002 में वेनेज़ुएला के चुनाव निगरानी और नागरिक अधिकार समूह, सुमाते की सह-संस्थापक और नेता के रूप में राजनीति में प्रवेश किया। उन्होंने 2010 से 2015 तक संसद सदस्य के रूप में कार्य किया और सभी उम्मीदवारों में सबसे अधिक मतों से निर्वाचित हुईं। सुश्री मचाडो को वेनेजुएला में लोकतंत्र को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिल रहा है।
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भौतिकी नोबेल पुरस्कार 3 अमेरिकी वैज्ञानिक जॉन क्लार्क, माइकल डेवोरेट, जॉन मार्टिनिस को मिला है।
- फोटो : अमर उजाला
Nobel Prize in Physics 2025: भौतिकी में तीन लोगों को नोबेल पुरस्कार
भौतिकी का नोबेल पुरस्कार 2025 कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले के जॉन क्लार्क, येल यूनिवर्सिटी और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सांता बारबरा के मिशेल एच. डेवोरेट और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सांता बारबरा के जॉन एम. मार्टिनिस को प्रदान किया जाएगा। इसकी घोषणा 7 अक्तूबर 2025 को की गई थी।
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प्रसिद्ध भौतिक इंग्लिश विज्ञानी जॉन क्लार्क
- फोटो : Nobel Prize
John Clarke: जॉन क्लार्क के बारे में
प्रसिद्ध भौतिक इंग्लिश विज्ञानी जॉन क्लार्क का जन्म 1942 में यूनाइटेड किंगडम के कैम्ब्रिज में हुआ था। जॉन क्लार्क ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से बीए (1964), पीएचडी (1968) और साइंस-डेमोक्रेट (2005) की उपाधि प्राप्त की। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, बर्कले से पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप के बाद, वे 1969 में भौतिकी संकाय में शामिल हो गए। उन्हें 2004 में रॉयल सोसाइटी के ह्यूजेस मेडल से सम्मानित किया गया था। 2005 में वे कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले संकाय अनुसंधान व्याख्याता थे।
क्लार्क ने सुपरकंडक्टिंग सर्किट और SQUID जैसे उपकरणों पर काम किया। ये उपकरण बहुत नाजुक विद्युत-प्रयोग बताते हैं और क्वांटम विज्ञान के प्रयोगों के लिए जरूरी रहे। उनके प्रयोगों ने दिखाया कि बड़े (हमारे रोजमर्रा के माप में बड़े) इलेक्ट्रिक सर्किट में भी क्वांटम प्रभाव साफ दिख सकते हैं। उनकी टीम ने दिखाया कि बड़े सर्किट में क्वांटम टनलिंग और ऊर्जा-स्तर आते हैं, यह आज के क्वांटम कंप्यूटिंग के बुनियादी विचारों में से एक है।
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मिशेल एच. डेवोरेट फ्रांस में जन्मे भौतिक विज्ञानी
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Michel H. Devoret: मिशेल एच. डेवोरेट के बारे में
मिशेल एच. डेवोरेट फ्रांस में जन्मे भौतिक विज्ञानी हैं। वे Yale और UC Santa Barbara से जुड़े रहे और क्वांटम सर्किट के डिजाइन में अग्रणी हैं। डेवोरेट ने पेरिस की École Nationale Supérieure des Télécommunications से इंजीनियरिंग की डिग्री ली और University of Paris-Sud (Orsay) से पीएचडी की उपाधि (1982) हासिल की। बाद में वे क्लार्क की लैब में पोस्ट-डॉक के रूप में काम करने गए।
डेवोरेट ने नए-नए तरह के क्यूबिट और सर्किट-आधारित डिजाइन (जैसे transmon, fluxonium के विकास में योगदान) किए। उन्होंने प्रयोगों से दिखाया कि कैसे नियंत्रित सर्किट में आर्टिफिशियल एटोम (क्यूबिट) बनाए जा सकते हैं। उन्होंने और उनकी टीम ने इलेक्ट्रिक सर्किट में मैक्रोस्कोपिक क्वांटम टनलिंग और ऊर्जा-क्वांटाइज़ेशन को साफ दिखाया। यही काम 2025 के नोबेल के लिए मान्य किया गया।
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जॉन एम. मार्टिनिस एक अमेरिकी भौतिक विज्ञानी
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John M. Martinis: जॉन एम. मार्टिनिस के बारे में
जॉन एम. मार्टिनिस एक अमेरिकी भौतिक विज्ञानी हैं जिनका काम सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स और क्वांटम कंप्यूटिंग के निर्माण से जुड़ा है। मार्टिनिस ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले से भौतिकी में स्नातक की डिग्री (1980) और डॉक्टरेट की उपाधि (1987) प्राप्त की। डॉक्टरेट की पढ़ाई के दौरान, उन्होंने क्लार्क की प्रयोगशाला में काम किया, जहां उनकी मुलाकात डेवोरेट से हुई। 2004 में, उनका शैक्षणिक करियर उन्हें कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सांता बारबरा ले गया, जहां उन्होंने बाद में प्रायोगिक भौतिकी में वर्स्टर चेयर का कार्यभार संभाला।
2020 में मार्टिनिस क्वांटम कंप्यूटिंग स्टार्टअप सिलिकॉन क्वांटम कंप्यूटिंग में शामिल होने के लिए ऑस्ट्रेलिया चले गए। बाद में उन्होंने क्यूलैब नामक एक कंपनी की सह-स्थापना की और उसके मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी के रूप में कार्य किया, जिसका उद्देश्य सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स में सुसंगतता में सुधार करके अधिक विश्वसनीय संचालन और दोष-सहिष्णु क्वांटम कंप्यूटिंग को सक्षम बनाना था।
मार्टिनिस ने क्लार्क और डेवोरेट के साथ मिलकर शुरुआती प्रयोग किए जो दिखाते थे कि माइक्रोवेव तरंगों से जोसेफसन जंक्शन के क्वांटम स्तर चुने जा सकते हैं। बाद में उन्होंने गूगल और अन्य प्रयोगशालाओं में क्वांटम चिप्स पर काम किया। उनका काम यह दिखाने में महत्वपूर्ण था कि किस तरह व्यावहारिक सर्किटों में क्वांटम व्यवहार दिखता है, जो आज के क्यूबिट-आधारित कंप्यूटरों की नींव है।
Nobel Prize in Chemistry 2025: रसायन विज्ञान में भी तीन लोगों को नोबेल पुरस्कार
रसायन में नोबेल पुरस्कार 2025 की घोषणा हो चुकी है। स्वीडन की रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने बुधवार (08 अक्तूबर) को इसका ऐलान किया। इस साल ये सम्मान तीन वैज्ञानिक सुसुमु कितागावा (जापान), रिचर्ड रॉबसन (ऑस्ट्रेलिया) और उमर एम. याघी (अमेरिका) को मिला है। यह घोषणा 8 अक्तूबर, 2025 को की गई।
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सुसुमु कितागावा जापान के विद्वान
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Susumu Kitagawa: सुसुमु कितागावा के बारे में
सुसुमु कितागावा जापान के विद्वान हैं, जिनका काम ठोस पदार्थों और उनकी संरचनाओं पर केंद्रित है, खासकर उन सामग्रियों पर जो गैस/आणविक नियंत्रण में काम आती हैं। उनका जन्म 4 जुलाई, 1951 को जापान के क्योटो में हुआ था। उन्होंने क्योटो विश्वविद्यालय से बीएससी (1941), एमएससी (1976) और पीएचडी की उपाधि (1979) हासिल की। उन्होंने किंडाई विश्वविद्यालय, टोक्यो मेट्रोपॉलिटन विश्वविद्यालय, KUIAS और क्योटो विश्वविद्यालय में कार्य किया।
कितागावा ने क्रिस्टल/मॉलिक्युलर स्ट्रक्चर और उनकी प्रतिक्रियाशीलता पर बेहद उपयोगी शोध किए। उन्होंने ऐसी सामग्री और संरचनाएँ समझाईं और बनाईं जिनसे गैसों को पकड़ना, बदलना और नियंत्रित करना आसान हुआ। इन सामग्रियों के बहुत से (ऊर्जा, भंडारण, सेंसरिंग) उपयोग हैं।
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रिचर्ड रॉबसन
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Richard Robson: रिचर्ड रॉबसन के बारे में
रिचर्ड रॉबसन का जन्म 4 जून, 1937 को इंग्लैंड के यॉर्कशायर में ग्लुसबर्न नामक गावं में हुआ था। उन्होंने 1955 में ऑक्सफोर्ड के ब्रैसेनोज कॉलेज से रसायन विज्ञान में मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की और 1959 में बीए की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने ऑक्सफोर्ड की डायसन पेरिंस प्रयोगशाला में जॉन बार्लट्रॉप से डीफिल की पढ़ाई पूरी की, जिसे उन्होंने 1962 में पूरा किया। इसके बाद वे कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में पोस्टडॉक्टरल शोध के लिए कैलिफोर्निया चले गए। 1966 में वे मेलबर्न विश्वविद्यालय चले गए, जहां वे अपने पूरे करियर के दौरान रहे और अब मानद प्रोफेसर फेलो हैं।
रॉबसन ने ठोस-रचना और मेटल-ऑर्गेनिक नेटवर्क्स पर काम किया। इन संरचनाओं को डिजाइन करने के तरीके और उनके उपयोग उनके मुख्य योगदान रहे। रॉबसन ने उन सिद्धांतों और तरीकों को आगे बढ़ाया जिनसे वैज्ञानिक तय कर सकें कि किस तरह की जाली-सी संरचना किस उद्देश्य के लिए बनाई जाए। ये MOF (metal-organic frameworks) और जुड़ी टेक्नोलॉजी में बहुत मददगार हैं।
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उमर एम. याघी, जॉर्डन-अमेरिकी केमिस्ट
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Omar M. Yaghi: उमर एम याघी के बारे में
उमर एम. याघी जॉर्डन-अमेरिकी केमिस्ट हैं, जो reticular chemistry के प्रणेता माने जाते हैं, यानी ऐसी केमिस्ट्री जो जाल-नुमा भवन (frameworks) बनाती और जोड़ती है। याघी कई विश्वविद्यालयों से जुड़े रहे और कैलिफॉर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले में प्रोफेसर हैं। उन्होंने अर्बाना-शैंपेन स्थित इलिनोइस विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में अपनी पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है और हार्वर्ड विश्वविद्यालय में एनएसएफ पोस्टडॉक्टरल फेलो रहे हैं। वे कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में रसायन विज्ञान के जेम्स और नील्जे ट्रेटर चेयर प्रोफेसर हैं।
उमर एम. याघी का कार्य अकार्बनिक और कार्बनिक यौगिकों के संश्लेषण, संरचना और गुणों तथा नए क्रिस्टलीय पदार्थों के डिज़ाइन और निर्माण पर केंद्रित है। उन्होंने MOFs और COFs जैसे नए पदार्थों के डिजाइन और निर्माण को लोकप्रिय और व्यवहारिक बनाया। उनके विचारों से वैज्ञानिक अब बड़े-पेमाने पर ऐसी जाली-आधारित सामग्री बना सकते हैं जो गंध/गैस पकड़ने, ऊर्जा और विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं में काम आती हैं, इसलिए उन्हें 2025 के केमिस्ट्री नोबेल में शामिल किया गया।
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हंगरी के लेखक लास्जलो क्रास्नाहोरकाई को साहित्य का नोबेल
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Nobel Prize in Literature 2025: साहित्य में लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई को नोबेल पुरस्कार
लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई यूरोपीय देश हंगरी के एक प्रसिद्ध उपन्यासकार हैं। क्रास्जनाहोरकाई जन्म 5 जनवरी, 1954 को में हंगरी के ग्युला शहर में हुआ। क्रास्जनाहोरकाई ने 1985 में अपने पहले उपन्यास सतांतंगो (Sátántangó) से अपनी पहचान बनाई। इस उपन्यास ने तीन दशक बाद, 2015 में अंग्रेजी में मैन बुकर इंटरनेशनल पुरस्कार जीता। इस उपन्यास पर निर्देशक बेला तार ने सात घंटे की एक प्रसिद्ध फिल्म भी बनाई।
उन्होंने कानून और हंगेरियन भाषा एवं साहित्य का अध्ययन किया। विश्वविद्यालय की शिक्षा पूरी करने के बाद से, क्रास्जनाहोरकाई एक स्वतंत्र लेखक के रूप में अपना जीवनयापन कर रहे हैं। उनकी दो बार शादी हो चुकी है और उनके तीन बच्चे हैं। उनकी रचनाएं भविष्यमय, भय और कला-सत्ता के बीच की जड़ता/बलिदान जैसी भावनाओं को उजागर करती हैं। नोबेल समिति ने उन्हें इस कारण चुना कि उनकी रचनाएं कलात्मक शक्ति को पुनः साबित करती हैं।
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चिकित्सा क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार
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Nobel Prize in Physiology or Medicine 2025: फिजियोलॉजी या मेडिसिन में नोबेल पुरस्कार
मैरी ई. ब्रुनको, फ्रेड राम्सडेल और शिमोन साकागुची को उनकी अभूतपूर्व खोजों के लिए 2025 का फिजियोलॉजी या मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार मिला। यह पुरस्कार शरीर की रक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को बेहतर समझने की खोज- पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस के लिए मिला है।
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मैरी एलिजाबेथ ब्रुनको, अमेरिकी आणविक जीवविज्ञानी
- फोटो : Nobel Prize
Mary E. Brunkow: मैरी एलिजाबेथ ब्रुनको के बारे में
मैरी एलिजाबेथ ब्रुनको एक अमेरिकी आणविक जीवविज्ञानी और प्रतिरक्षा विज्ञान (immunology) की शोधकर्ता हैं। उन्हें 2025 का नोबेल पुरस्कार “peripheral immune tolerance” (प्रतिरक्षण तंत्र की वह प्रक्रिया जो हमारी कोशिकाओं को यह बताती है कि शरीर की अपनी कोशिकाएं न मारें) पर उनके योगदान के लिए दिया गया। मैरी का जन्म 1961 में हुआ। उन्होंने University of Washington से बीएससी (मॉलिक्युलर और सेलुलर बायोलॉजी) की डिग्री (1983) ली। फिर उन्होंने Princeton University से पीएचडी ((1991) की। बाद में वे Institute for Systems Biology, सीए (Seattle) में सीनियर प्रोग्राम मैनेजर रहीं।
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फ्रेड रामस्डेल, अमेरिकी प्रतिरक्षा विज्ञानी
- फोटो : Nobel Prize
Fred Ramsdell: फ्रेड रामस्डेल के बारे में
फ्रेड रामस्डेल एक अमेरिकी प्रतिरक्षा विज्ञानी (immunologist) हैं। उनका जन्म 4 दिसंबर 1960 को एल्महर्स्ट, इलिनोइस, यूएस (Elmhurst, Illinois, U.S.) में हुआ। उन्होंने 1983 में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, सैन डिएगो से बीएससी (biochemistry & cell biology) की डिग्री ली। उसी वर्ष उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, लॉस एंजलिस (UCLA) में प्रवेश किया और 1987 में Microbiology & Immunology में पीएचडी की डिग्री ली। पीएचडी के बाद उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) में पोस्टडॉक फेलोशिप की। वर्तमान में, वे सोनोमा बायोथेरेप्यूटिक्स (Sonoma Biotherapeutics) में साइंटिफिक एडवाइजर हैं।
शिमोन साकागुची, जापान के प्रतिरक्षा विज्ञानी
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Shimon Sakaguchi: शिमोन साकागुची के बारे में
शिमोन साकागुची जापान के एक प्रतिष्ठित प्रतिरक्षा विज्ञानी हैं। साकागुची का जन्म 19 जनवरी 1951 को नागाहामा, शिगा, जापान में हुआ था। उन्होंने क्योटो विश्वविद्यालय से 1976 में एमडी की डिग्री प्राप्त की। उसके बाद उन्होंने 1982 में उसी विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री ली। पीएचडी के बाद उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका में Johns Hopkins University और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय (Stanford University) में पोस्टडॉक्टोरल शोध (1983–1987) किया। वर्तमान में वह ओसाका विश्वविद्यालय, जापान में प्रोफेसर हैं।
साकागुची ने 1995 में उन कोशिकाओं (regulatory T cells) की खोज की जो प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करती हैं और यह दिखाया कि वे शरीर की कोशिकाओं पर हमला होने से रोकती हैं। बाद के वर्षों में उन्होंने यह भी बताया कि FOXP3 जीन कैसे उस नियंत्रण को सुनिश्चित करता है। नोबेल पुरस्कार समिति ने कहा कि उनकी खोजों ने प्रतिरक्षा विज्ञान की समझ बदल दी और प्रतिरक्षा विकारों तथा कैंसर जैसी स्थितियों में नए उपचार की उम्मीद जगाई।