Self-Growth: क्या आपने कभी महसूस किया है कि कई बार आप दूसरों की भावनाओं को इतनी गहराई से महसूस करते हैं कि उनका दर्द, उनकी परेशानी आपको अपनी लगने लगती है। दूसरों के प्रति सहानुभूति रखना एक खूबसूरत गुण है, लेकिन आज के प्रतिस्पर्धी युग में आप खुद एक लक्ष्य का पीछा कर रहे होते हैं और इस वजह से रुकने, सोचने और जरूरी काम करना तक भूल जाते हैं, जिससे आपका संतुलन बिगड़ने लगता है।
ऐसे में, एक सीमा से ज्यादा दूसरों की भावनाओं में खुद को शामिल करने से होने वाला तनाव, थकान व भावनात्मक दबाव आपको कमजोर कर सकता है। धीरे-धीरे यह आपकी काम करने की क्षमता, आत्मविश्वास और खुशी को भी खोखला करने लगता है। इसलिए, दूसरों की भावनाओं को अपने ऊपर हावी न होने दें। ऐसी स्थिति में खुद को समय दीजिए, अपने मन की सुनिए और मानसिक संतुलन बनाए रखिए। ऐसा करने के कुछ तरीके हैं।