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Self-Balance: सफलता की दौड़ में दूसरों को थामें, पर खुद को गिरने न दें; संतुलन ही है असली जीत

Wed, 08 Oct 2025 02:41 PM IST
शाहीन परवीन जोलांटा बर्क, सीनियर लेक्चरर आरसीएसआई यूनिवर्सिटी

सार

True Success: जीवन में दूसरों की मदद करना इंसानियत की निशानी है, लेकिन हर कदम पर याद रखें। आपका अपना लक्ष्य भी उतना ही जरूरी है। दूसरों के लिए सहारा बनें, पर अपने सपनों की डोर कभी न छोड़ें। संतुलन ही वह कला है जो आपको थकने नहीं देती और सफलता तक पहुंचाती है।
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
Self-Growth: क्या आपने कभी महसूस किया है कि कई बार आप दूसरों की भावनाओं को इतनी गहराई से महसूस करते हैं कि उनका दर्द, उनकी परेशानी आपको अपनी लगने लगती है। दूसरों के प्रति सहानुभूति रखना एक खूबसूरत गुण है, लेकिन आज के प्रतिस्पर्धी युग में आप खुद एक लक्ष्य का पीछा कर रहे होते हैं और इस वजह से रुकने, सोचने और जरूरी काम करना तक भूल जाते हैं, जिससे आपका संतुलन बिगड़ने लगता है। 

ऐसे में, एक सीमा से ज्यादा दूसरों की भावनाओं में खुद को शामिल करने से होने वाला तनाव, थकान व भावनात्मक दबाव आपको कमजोर कर सकता है। धीरे-धीरे यह आपकी काम करने की क्षमता, आत्मविश्वास और खुशी को भी खोखला करने लगता है। इसलिए, दूसरों की भावनाओं को अपने ऊपर हावी न होने दें। ऐसी स्थिति में खुद को समय दीजिए, अपने मन की सुनिए और मानसिक संतुलन बनाए रखिए। ऐसा करने के कुछ तरीके हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

भीतर से बनें मजबूत 

जब कोई खबर आपको भीतर तक झकझोर दे या मन भारी लगे, तो लविंग काइंडनेस मेडिटेशन आपका सहारा बन सकता है। इसमें आप अपने और दूसरों के लिए दयालुता, शुभकामनाएं व सकारात्मक ऊर्जा से भरे संदेश भेजने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, चाहे वे आपके प्रिय हों या वे लोग, जो किसी मुश्किल दौर से गुजर रहे हों।

इससे आप भीतर से इतने मजबूत बनते हैं कि चुनौतियों में भी सोच-समझकर, स्पष्ट और सकारात्मक रवैये के साथ कदम बढ़ाते हैं। यह नकारात्मक भावनाओं को दबाती नहीं, बल्कि आपके मन में स्नेह, आशा और जुड़ाव जैसी ऊर्जावान भावनाओं को बढ़ाती है, जिससे आप ज्यादा संतुलित महसूस करते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

खुद के प्रति भी बनें दयालु 

क्या आप दूसरों की मदद न कर पाने पर खुद को कोसते हैं? या फिर दूसरों के दर्द को देखकर अपने सुखी जीवन के लिए अपराधबोध महसूस करते हैं? अगर हां, तो ऐसी स्थिति में अपने प्रति दयालु बनना सीखें। याद रखें, दुखी होना इन्सान होने की स्वाभाविक खूबी है।

इसलिए, दुख को समझिए, स्वीकारिए, उसमें खो मत जाइए। जब आप खुद के प्रति करुणा दिखाते हैं, तो मन का बोझ हल्का होने लगता है। इससे आपको थकान, तनाव और भावनात्मक दबाव से उबरने की ताकत मिलती है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

नेक काम में खुद को करें शामिल

दूसरों के दुख को गहराई से महसूस करना व लगातार प्रभावित होना सहानुभूति संबंधी संकट कहलाता है। यह स्थिति आपके मन में तनाव, भावनात्मक थकान और कभी-कभी अकेलेपन का एहसास पैदा करा सकती है। ऐसे दौर से बाहर आने का सबसे प्रभावी तरीका किसी की मदद के लिए हाथ बढ़ाना या किसी नेक काम में खुद को शामिल करना माना जाता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

डूमस्क्रॉलिंग से बचें

डुमस्क्रॉलिंग यानी फोन या सोशल मीडिया पर निराशाजनक खबरों को बार-बार देखना मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होती है। इसके विपरीत, छोटी-छोटी सकारात्मक आदतें, जैसे काइंडस्क्रॉलिंग, आपको जागरूक व प्रेरित रखती हैं।

- द कन्वर्सेशन
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