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उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया : 74 सालों से है दुश्मनी! क्या है विवाद, क्या फिर होंगे एक? यहां समझें

Tue, 22 Jun 2021 08:31 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

  • अगस्त 1948 में दक्षिणी भाग में रिपब्लिक ऑफ कोरिया यानी कोरियाई गणतंत्र की स्थापना हुई और वह आधिकारिक तौर पर दक्षिण कोरिया कहलाया। 
  • इसी तर्ज पर, उत्तरी भाग में सितंबर 1948 में सुप्रीम पीपल्स असेंबली का चुनाव हुआ और डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया की स्थापना हुई और वह उत्तर कोरिया बना।
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उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया विवाद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
कोरियाई प्रायद्वीप एक ऐसा क्षेत्र जो दशकों से जंग के साये में है। यह जंग सामान्य जंग जैसी नहीं है। इस जंग से दुनिया में तीसरा विश्वयुद्ध छिड़ने और परमाणु हथियारों का प्रयोग होने तक का खतरा मंडरा रहा है। कोरियाई प्रायद्वीप का विवाद द्वितीय विश्वयुद्ध के काल का है।
द्वितीय विश्वयुद्ध से पहले तक कोरियाई प्रायद्वीप पर जापान के अधीन हुआ करता था। लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान यह जंग का मैदान बन गया। द्वितीय महायुद्ध के समय तत्कालीन सोवियत संघ रूस और अमेरिका से हारकर जब जापान ने आत्मसमर्पण किया था। 
तब 1945 ई. में याल्टा संधि के अनुसार 38 उत्तरी अक्षांश रेखा द्वारा इस देश को दो भागों में विभाजित कर दिया गया। उत्तरी भाग यानी उत्तरी कोरिया पर रूस का और दक्षिणी भाग यानी दक्षिणी कोरिया पर अमेरिका का अधिकार हुआ। लेकिन जनता इस विभाजन के पक्ष में नहीं थी।

शुरुआती चुनाव के जरिये लोकतंत्र की कोशिश
  • इसके बाद, 1947 में अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में चुनाव के जरिये दोनों देश को एकजुट करने का प्रयास किया।
  • मई 1948 में दक्षिणी भाग में चुनाव हुआ। अगस्त 1948 में दक्षिणी भाग में रिपब्लिक ऑफ कोरिया यानी कोरियाई गणतंत्र की स्थापना हुई।
  • वह आधिकारिक तौर पर दक्षिण कोरिया कहलाया। सियोल को दक्षिण कोरिया की राजधानी चुना गया। 
  • इसी तर्ज पर, सोवियत संघ के नेतृत्व वाले उत्तरी भाग में सुप्रीम पीपल्स असेंबली का चुनाव हुआ।
  • इसके साथ ही सितंबर 1948 में उत्तरी भाग में डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) की स्थापना हुई और वह उत्तर कोरिया बना।
  • प्योंगयांग को उत्तर कोरिया की राजधानी बनाया गया।
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दक्षिण और उत्तर कोरिया के तत्कालीन नेता - फोटो : फाइल फोटो
इस प्रकार कोरियाई प्रायद्वीप के दो टुकड़े हो गए। लेकिन 20वीं सदी का यह विभाजन आज भी दुनिया के लिए बड़े विवाद के रूप में कायम है। इसके बाद उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया में लोकतंत्र और साम्यवाद के बीच लेकर संघर्ष शुरू हुआ। 

आजादी के दो साल बाद ही कोरियाई युद्ध
  • चुनावों के दो साल बाद ही 1950 में कोरियाई युद्ध (1950-53) का आगाज हो गया।
  • 25 जून, 1950 को उत्तरी कोरिया ने दक्षिणी कोरिया पर आक्रमण कर दिया।
  • भीषण संघर्ष में दक्षिण कोरिया का एक बड़ा हिस्सा उत्तर कोरिया ने कब्जा लिया।
  • इसे यह शीत युद्ध काल में लड़ा गया सबसे पहला और सबसे बड़ा युद्ध कहा जाता है।
  • इसमें सैनिकों समेत करीब चार लाख लोगों की जान गई और इतने ही घायल हुए होंगे।

जब अमेरिका और चीन में हुई तनातनी 
इस युद्ध में जब दक्षिण कोरिया कमजोर पड़ा तो अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव पारित कराया और मदद के लिए 15 अन्य देश दक्षिण कोरिया के साथ आ गए। जबकि दूसरी ओर उत्तर कोरिया के साथ सोवियत रूस और चीन की सेनाएं थीं। अमेरिका के सहयोग से दक्षिण कोरिया ने अपना थोड़ा हिस्सा को वापस पा लिया, मगर उस दौरान अमेरिका और चीन में तनातनी हो गई थी। खैर, अंतरराष्ट्रीय दबाव और भारत जैसे गुट निरपेक्ष देशों के हस्तक्षेप से 1953 में यह युद्ध समाप्त हो गया। 
 
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दक्षिण कोरिया - फोटो : ट्विटर
एक ने तरक्की की तो दूसरा बर्बाद हुआ
इसके बाद, दोनों मुल्कों में कुछ समय सब ठीक रहा। इस बीच, जनरल पार्क चुंग-ही ने सैन्य तख्तापलट करते हुए दक्षिण कोरिया की सत्ता हथिया ली थी, मगर 1979 में उनकी हत्या हो गई। उधर, उत्तर कोरिया में किम इल सुंग ने तानाशाह के तौर पर शासन किया। उत्तर कोरिया किम राजवंश के शासन में लगातार पिछड़ता रहा तो वहीं, दूसरी तरफ दक्षिण कोरिया ने अमेरिका की मदद से ओद्यौगिक विकास की नई ऊंचाइयों को छूता रहा।

लेकिन थमे नहीं विवाद 
गौरतलब है कि 1968 में उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की हत्या की कोशिश की थी। इसके बाद 1983 में म्यांमार में एक धमाके में 17 दक्षिण कोरियाई नागरिक मारे गए थे। इस हमले के तार उत्तर कोरिया से जोड़े गए।  उत्तर कोरिया पर कई दक्षिण कोरिया में हमले करवाने के आरोप लगे हैं। वहीं, अब उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षणों और कथित परमाणु हथियार कार्यक्रम ने दक्षिण कोरिया समेत अमेरिका तक की नाक में दम कर रखा है। 

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North Korea, kim jong un
सात दशकों में सत्ता, शासक बदले, मगर दुश्मनी नहीं
कभी एक प्रायद्वीप के तौर पर रहे इन दोनों देशों के सात दशक पुराने संबंध अब तक नहीं सुधरे हैं। कई बार वैश्विक नेताओं के माध्यम से वार्ता प्रयास भी हुए, लेकिन विफल रहे। इस बीच, जहां दक्षिण कोरिया एक सुसंपन्न लोकतांत्रिक राष्ट्र के तौर पर उभरा तो वहीं उत्तर कोरिया एक तानाशाही वाले पिछड़े मुल्क के तौर पर रह गया। जहां दक्षिण कोरिया में चुनाव होते रहे और राष्ट्रपति चुने गए। लेकिन उत्तर कोरिया में किम राजवंश कायम है।  

उत्तर कोरिया में किम राजवंश का तानाशाह शासन
  • उत्तर कोरिया में किम इल सुंग के तानाशाही शासन के बाद उसके बेटे किम जोंग इल और जोंग इल के बाद सत्ता की बागडोर किम जोंग उन के पास है।
  • जानकारी के अनुसार, किम इल सुंग ने 1948 में सोवियत संघ की मदद से सत्ता हासिल की थी।
  • इल सुंग का जन्म 1912 में हुआ था। इसी वर्ष से उत्तर कोरिया के आधिकारिक कैलेंडर वर्ष की शुरुआत मानी जाती है।
  • 1980 की पार्टी की बैठक में इल सुंग ने अपने बेटे किम जोंग इल को सत्ता का उत्तराधिकारी घोषित किया था।
  • 1994 में किम इल सुंग का निधन हो गया। इसके बाद किम जोंग इल ने देश की सत्ता संभाली।
  • इस दौरान देश में सिर्फ किम राजवंश का ही महिमामंडन किया जाता रहा। 
     
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उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग उन - फोटो : PTI
किम जोंग उन ने बनाई मजबूत पकड़ 
  • जोंग इल ने कई शादियां कीं। उसके तीन बच्चे थे। 2009 में किम जोंग इल ने अपने छोटे बेटे किम जोंग उन को अपना उत्तराधिकारी चुना।
  • 2011 में किम जोंग इल की भी मौत हो गई। अब सत्ता की बागडोर किम जोंग उन के पास आ चुकी थी। कहा जाता है कि किम जोंग उन का जन्म 1982 से 1984 के बीच हुआ है। इस युवा तानाशाह ने सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाने के साथ ही उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लगातार आगे बढ़ाया है।
  • इससे दक्षिण कोरिया और अमेरिका समेत पूरी दुनिया एक खौफ के साये में है।
  • इन परमाणु परीक्षण कार्यक्रमों के कारण, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगाए हुए हैं। 

क्या जर्मनी की फिर से एक हो पाएंगे कोरियाई देश
सात दशक लंबे विवाद के बीच, कई वाकये ऐसे हुए जब लगा कि दोनों कोरियाई देश दुश्मनी भूला रहे हैं और एक साथ आ रहे हैं। इससे एक बड़ा सवाल पैदा होता है कि क्या ये दोनों देश ठीक उसी तरह एक हो पाएंगे, जैसे 1990 में पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी को बर्लिन की दीवार तोड़कर एक कर दिया गया था। हाल ही की कुछ घटनाएं संकेत तो ऐसे ही देती हैं। 
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North Korea-South Korea
दोनों देशों के बीच पुन: जुड़ाव के संकेत
  • उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच बचाव का एक सबसे अहम हिस्सा असैन्य क्षेत्र वाली 250 किलोमीटर लंबी सीमा है।
  • यह सीमा चार किलोमीटर चौड़ी है, जो दोनों देशों को विभाजित करती है। वहीं, भाषा और संस्कृति भी दोनों देशों की एक ही है। 
  • दोनों देश हाल ही में दक्षिण कोरिया के प्योंगचांग में आयोजित शीतकालीन ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों में एक साथ आए हैं। 
  • दोनों देशों ने ओलंपिक और पैरालंपिक के उद्घाटन समारोह में एक ही ध्वज तले एक साथ मार्च किया और संयुक्त महिला आइस हॉकी टीम भी उतारी। 
  • सुलह की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए उत्तर कोरिया ने अपने देश का मानक समय दक्षिण कोरिया के साथ फिर से मिलाने पर सहमति जताई है। 
  • अभी उत्तर कोरिया का मानक समय दक्षिण कोरिया के समय से आधा घंटा आगे है। उत्तर कोरिया ने अगस्त 2015 में मानक समय में बदलाव किया था।  
     
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किम जोंग-उन-मून जेई-इन
सुलह संभव, एकीकरण आसान नहीं 
  • हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार मानते हैं कि दोनों देशों में सुलह तो आसान हैं लेकिन एकीकरण इतना आसान नहीं है। 
  • अगर सुलह होती है तो दोनों देशों में व्याप्त अशांति और दुश्मनी का खात्मा होगा। एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप बंद होंगे।
  • कोरियाई देशों में शांति स्थापना से ही दुनिया में तीसरे विश्वयुद्ध और परमाणु युद्ध का अदृश्य खतरा कम हो जाएगा। 
  • वहीं, अगर एकीकरण होता है तो इससे उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा और जनता को राहत मिलेगी।
  • जबकि, दक्षिण कोरिया की आर्थिक स्थिति वर्तमान स्थिति से काफी पीछे चली जाएगी। इससे उसकी जनता और जीडीपी को नुकसान होगा। 
  • हालांकि, कुछ जानकार यह मानते हैं कि भविष्य में दोनों देश चीन और हांगकांग मॉडल पर राजी हो सकते हैं। 
  • इस मॉडल में हांगकांग की सत्ता और प्रशासन समेत मूल नीतियों पर चीन का नियत्रंण है।
  • जबकि कहने को हांगकांग एक स्वायत्त शहर है। यहां चीन की एक देश दो प्रशासन वाली नीतियां लागू हैं। 
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