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Tips: ज्ञान के साथ कौशल भी जरूरी; इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट्स और सॉफ्ट स्किल्स से करें खुद को नौकरी के लिए तैयार

Tue, 02 Sep 2025 11:59 AM IST
आकाश कुमार चेतनादित्य आलोक, एजुकेशन एक्सपर्ट

सार

Career Tips: आज के समय में केवल किताबों का ज्ञान काफी नहीं है, बल्कि व्यावहारिक अनुभव और कौशल जरूरी हैं। छात्रों को इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट्स, ऑनलाइन कोर्स और सॉफ्ट स्किल्स सीखकर खुद को नौकरी बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करना चाहिए।
 
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Career Growth Skills - फोटो : Freepik
Career Tips By Expert: वर्तमान समय में शिक्षा पद्धति को लेकर एक बड़ा सवाल है कि क्या शिक्षण का आधार केवल ज्ञान होना चाहिए या फिर कौशल भी समान रूप से महत्वपूर्ण है? पारंपरिक दृष्टिकोण में शिक्षा का फोकस ज्ञान पर रहा है, जिसमें जानकारी, तथ्य और अवधारणाओं की समझ शामिल होती है। 

ज्ञान-आधारित शिक्षा का अर्थ है पड़ना, सुनना और समझना। वहीं दूसरी ओर, कौशल-आधारित शिक्षा में हासिल किए नए ज्ञान को जमीनी स्तर पर उतार कर वास्तविक जीवन में उसका उपयोग करना शामिल है। आज के प्रतिस्पर्धात्मक और बदलते दौर में शिक्षण पद्धति में व्यावहारिक कौशल का समावेश अनिवार्य हो गया है, जिसे समझना प्रत्येक छात्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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Career, Skills - फोटो : Adobe Stock

नौकरी जगत की मांग को समझें

कई शिक्षण संस्थानों ने ऐसे पाठ्यक्रम शुरू किए हैं, जो प्रयोगशालाओं, अस्पतालों, कंपनियों में इंटर्नशिप और समुदाय-आधारित कार्यों के माध्यम से छात्रों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करते हैं। हालांकि, सच यह है कि छात्रों द्वारा सीखे गए कौशल और उद्योग की वास्तविक जरूरतों के बीच अंतर अभी भी बना हुआ है। इसलिए छात्रों को इंटर्नशिप और लाइव प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ ऐसे ऑनलाइन सर्टिफिकेशन कोर्स भी करने चाहिए, जो नवीनतम तकनीक और नौकरी बाजार की मांगों के अनुरूप हों। इसके अलावा, उन्हें संचार, टीमवर्क और प्रॉब्लम-सॉल्विंग जैसी सॉफ्ट स्किल्स सीखने पर भी जोर देना चाहिए।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

कौशल के बिना ज्ञान अधूरा है

आज के जमाने में सिर्फ ज्ञान हासिल कर लेना ही काफी नहीं है, बल्कि जीवन में उसका सही ढंग से इस्तेमाल करने की कला भी आनी चाहिए। कौशल-आधारित शिक्षा का उद्देश्य छात्रों को केवल थ्योरी तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि उसे व्यावहारिक रूप से लागू करने की क्षमता देना है। उदाहरण के लिए, यदि किसी छात्र को टाइपिंग आती है, तो इसका अर्थ केवल की-बोर्ड की संरचना जानना नहीं है, बल्कि तेज और सटीक टाइपिंग करना भी है। यही अंतर सैद्धांतिक जानकारी और वास्तविक दक्षता में है।

इसलिए छात्रों को केवल थ्योरी याद करने के बजाय प्रैक्टिकल पर ध्यान देना चाहिए, सीखे हुए ज्ञान को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में लागू करने की आदत डालनी चाहिए और लाइव प्रोजेक्ट्स व सिमुलेशन में हिस्सा लेना चाहिए।

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Skilling - फोटो : Freepik

सिर्फ पारंपरिक विषयों तक सीमित न रहें

आज का समय "नॉलेज-बेस्ड इकॉनमी" का है, जहाँ ज्ञान से जुड़े कौशल सबसे ज्यादा मायने रखते हैं। ये कौशल छात्रों को बेहतर निर्णय लेने, उच्च स्तर पर प्रदर्शन करने और तेजी से बदलते माहौल में खुद को अनुकूलित करने की क्षमता देते हैं। छात्रों को चाहिए कि वे सिर्फ पारंपरिक विषयों तक सीमित न रहें, बल्कि रुचि क्षेत्र के अनुसार अकादमिक रिसर्च आधारित विषय या व्यावसायिक (वोकेशनल) कोर्सेज का चयन करें। ऑनलाइन और ऑफलाइन स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स का लाभ उठाकर वे खुद को जॉब मार्केट के लिए बेहतर तरीके से तैयार कर सकते हैं।
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Career Tips (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : freepik

छात्रों के लिए समाधान

छात्रों को दसवीं बोर्ड के बाद नियमित विषयों के साथ उच्च स्तर के व्यावसायिक पाठ्यक्रम चुनने पर जोर देना चाहिए। इससे उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ रोजगार योग्य कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा और नौकरी के क्षेत्र में बेहतर संभावनाएँ बन सकेंगी।
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