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कौन हैं शालिजा धामी, जो बनीं देश की पहली महिला फ्लाइट कमांडर

Wed, 28 Aug 2019 10:44 AM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

  • फ्लाइट कमांडर बनने वाली देश की पहली महिला वायुसेना अधिकारी बनीं शालिजा धामी
  • शालिजा को मिलेगा स्थाई कमीशन
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शालिजा धामी - फोटो : Facebook
देश की एक बेटी ने फिर साबित कर दिखाया है कि जमीं से लेकर आसमान तक वो किसी का भी मुकाबला कर सकती हैं। इस बार महिलाओं के नाम ये गौरव दिलाने का श्रेय जाता है शालिजा धामी को। शालिजा फ्लाइट कमांडकर बनी हैं। इसके साथ ही वह फ्लाइट कमांडर बनने वाली देश की पहली महिला वायुसेना अधिकारी बन गई हैं।

लेकिन क्या आप इससे ज्यादा शालिजा धामी के बारे में जानते हैं? कौन है यह महिला? कहां की रहने वाली हैं और कितनी बहादुर हैं? क्या होता है फ्लाइट कमांडर का पद? इन सभी सवालों के जवाब हम आपको आगे बता रहे हैं।
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शालिजा धामी - फोटो : Facebook
शालिजा धामी एक विंग कमांडर हैं जो पिछले 15 सालों से भारतीय वायुसेना का हिस्सा बन कर देश की सेवा कर रही हैं। अब उन्हें उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हिंडन एयरबेस पर चेतक हेलीकॉप्टर यूनिट में फ्लाइट कमांडर का पद संभालने की जिम्मेदारी दी गई है।

बता दें कि फ्लाइट कमांडर वायुसेना में पहली प्रमुख लीडरशिप पोजिशन होती है।
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शालिजा धामी अन्य महिला पायलट्स के साथ - फोटो : Facebook
भारतीय वायुसेना में अपने 15 साल के करियर में शालिजा चेतक और चीता हेलीकॉप्टर्स उड़ाती रही हैं। उनके नाम कई रिकॉर्ड्स दर्ज हैं। वह चेतक और चीता हेलीकॉप्टर्स के लिए वह भारतीय वायुसेना की पहली महिला योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी हैं।

इतना ही नहीं, शालिजा धामी वायुसेना की पहली महिला अधिकारी हैं, जिन्हें लंबे कार्यकाल के लिए फ्लाइंग ब्रांच में स्थाई कमीशन दिया जाएगा। उन्हें 2300 घंटे तक उड़ान भरने का अनुभव है।

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शालिजा धामी - फोटो : Facebook
शालिजा पंजाब के लुधियाना की रहने वाली हैं। वहीं उनकी पढ़ाई भी पूरी हुई है। उनका एक बेटा भी है जिसकी उम्र करीब 9 साल है। शालिजा बताती हैं कि वह बचपन से ही पायलट बनना चाहती थीं। उन्होंने अपना यह सपना पूरा किया।

शालिजा को जिस हेलीकॉप्टर (चेतक) को उड़ाने की जिम्मेदारी दी गई है वह एक लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर है, जिसमें 6 पैसेंजर बैठ सकते हैं। इसकी अधिकतम स्पीड 220 किमी प्रति घंटा है।

आगे पढ़ें, पहली बार वायुसेना में कब शामिल हुईं महिलाएं

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शालिजा धामी - फोटो : Facebook
पहली बार साल 1994 में भारतीय वायुसेना में महिलाओं को शामिल किया गया था। लेकिन तब उन्हें नॉन कॉम्बैट रोल दिया गया था। समय के साथ महिलाओं ने अपने अधिकार के लिए संघर्ष किया और कॉम्बैट रोल हासिल किए।

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट में चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद भारतीय वायुसेना में महिला अधिकारियों को पुरुषों के समकक्ष स्थाई कमीशन पाने का अधिकार मिला है।

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चेतक हेलीकॉप्टर - फोटो : HAL

किसे मिलता है स्थाई कमीशन

वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल बीएस धनोआ के अनुासर, महिलाओं को स्थाई कमीशन मिलना रिक्तियां और मेरिट पर निर्भर करता है। साथ ही स्थाई कमीशन के लिए महिला अधिकारी के पास कम से कम 13 साल का वायुसेना में अनुभव होना जरूरी है।

गौरतलब है कि वैसे महिलाएं शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत भारतीय वायुसेना में नियुक्त की जाती हैं।

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