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इस बड़े विश्वविद्यालय की टॉपर ने दिए 10वीं, 12वीं के छात्रों के लिए कुछ सुनहरे टिप्स

Sun, 21 Apr 2019 04:24 PM IST
Jaya Tripathi एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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सरकारी नौकारी हर किसी युवा का सपना होता है। कोई डॉक्टर तो कोई अधिकारी व बैंक में नौकरी करना चाहता है पर आजकल देखा जाएं तो युवाओं का रुझान शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ा रहा है। तो आज हम बात करेंगे संध्या शर्मा से जिंहोंने न सिर्फ आगरा यूनिवर्सिटी में टॉप किया बल्कि आज एसोसिएट प्रोफेसर ए.एन.डी. डिग्री  कॉलेज, कानपुर में कार्यरत होकर अपने सपने को पूरा किया हैं। टीचिंग प्रोफेशन में आप स्कूल में ही नहीं बल्कि अपने कोचिंग सेंटर्स भी खोल सकते हैं। टीचिंग के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। 

 
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सबसे पहले अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में बताइये?
  • मैंने 12वीं वृंदावन के एक कॉलेज से की और इसके बाद B. Ed व P.hd वृंदावन (मथुरा) से उत्तीर्ण की। मैंने अपने पिता की दी हुई शिक्षा का भरपूर उपयोग किया और उनकी गाइडेंस में आगे बढ़ती गई। मैंने परास्नातक हिंदी विषय के साथ पास किया। मैंने अपनी जिंदगी में कई स्वर्ण पदक हासिल किए, कॉलेज में सर्वोच्च अंक हासिल कर टॉप किया और गवर्नर द्वारा मुझे सम्मानित भी किया गया।
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क्या यह आपका प्रथम प्रयास था?
  • जी, हां यह मेरा प्रथम प्रयास रहा है। मैंने कभी कोई और प्रतियोगी परीक्षा नहीं दी। मैंने उच्च शिक्षा आयोग द्वारा P.hd की मौखिक परीक्षा जोकि 45 मिनट तक चली थी, उसमें द्वितीय स्थान प्राप्त किया और आज अपनी मेहनत को सफलता में बदलकर खुश हूं।

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आपने हिंदी विषय को ही क्यों चुना?
  • मैंनं 78 प्रतिशत अंकों से साहित्य हिंदी विषय के साथ परास्नातक किया और हिंदी साहित्य बचपन से ही मेरे रग-रग में बसा था मैं एक ब्रज शहर में रहती हूं और मेरा पूरा परिवार हिंदी साहित्य से जुड़ा था और मुझे हिंदी साहित्य रोचक भी लगता है। यही कारण कि मैंने इसी क्षेत्र में पहचान बनाई।
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युवाओं को इंटरव्यू से संबंधित कोई टिप्स दीजिए?
  • मैं इंटरव्यू में कभी नहीं घबराई और खुद के नोट्स तैयार करना मेरी आदत थी। खुद को आत्मविश्वास से परिपूर्ण दिखाया और जवाब दिए। इसके अतिरिक्त मैंने अपने विषय की ज्यादा से ज्यादा जानकारी एकत्र कर ली थी। इसलिए मुझे किसी बात का डर नहीं था। प्रतियोगी युवाओं को बेसिक शिक्षा के ज्ञान के साथ संबंधित विषय पर भी अच्छी पकड़ होनी चाहिए।
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अब स्मार्ट होंगे सरकारी स्कूल के टीचर - फोटो : file
युवा प्रतियोगी परीक्षा के समय आने वाली परेशानियों पर कैसे आत्मविश्वास बनाएं?
  • युवाओं से बस यह कहना है कि शुरू से ही मैं बहुत ज्यादा प्रतिस्पर्धा में भाग लेती थी। मै यही मानती हूं कि असफलता को एक सबक के तौर पर लेकर चलना चाहिए न कि उससे निराश होकर तैयारी छोड़नी चाहिए। बहुत से छात्र असफल होकर ऐसा सोचते हैं पर यह गलत है। आपनी कमियों को देखकर उन्हें दूर करें और ऐसा विचार आपने मन में कभी न लाएं कि एक बार असफल होने के बाद दोबारा सफलता नहीं मिल सकती। मैं कई बार असफल रही हूं पर मैं उन असफलताओं से निराश नहीं होती थी। अंत में यही कहना चाहूंगी की आत्मविश्वास बनाएं और तैयारी पर फोकस करें। 
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