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ये सरकारी संस्थान सुपर 30 को देते हैं टक्कर, फिल्म देखने से पहले जान लें ये बात

Fri, 12 Jul 2019 05:20 PM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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जब आनंद कुमार ने 2002 में इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा के लिए वंचित छात्रों को कोच बनाने के लिए सुपर 30 शुरू किया, तो उन्हें नहीं पता था कि यह सैकड़ों उज्ज्वल छात्र-छात्राओं का जीवन बदल देगा। कुमार के सुपर 30 ने उन प्रतिभशाली इंजीनियरिंग उम्मीदवारों को मुफ्त कोचिंग प्रदान की, जिनके पास बिहार में महंगे कोचिंग संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए पैसे नहीं थे।
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आपको बता दें कि सुपर 30 के बाद, कई सरकारी संस्थान हैं जो अच्छे परिणाम दिखा रहे हैं। उनमें से, 11 ने जेईई एडवांस 2019 को क्लीअर किया है। ये संगठन अपने केंद्रों में मुफ्त आवास, कोचिंग और सलाह प्रदान करते हैं।
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रेलटेल ने सेंटर फॉर सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) एंड लीडरशिप के साथ जुड़कर अभयानंद सुपर 30 की शाखा वर्ष 2015 में देहरादून में खोली। बता दें कि उत्तराखंड के तीस छात्रों को एक लिखित परीक्षा के आधार पर चुना गया था, जिसके बाद उनकी मेंटल एबिलिटी का परीक्षण करने के लिए एक साक्षात्कार राउंड बनाया गया था।

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बता दें ये छात्र मजदूरों के घर से लेकर किसान तक के अलग-अलग पेशों से संबंधित गरीब सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से हैं। लाभार्थियों में से एक वंदना है, जिसके पिता देहरादून के एक होटल में वेटर के रूप में काम करते हैं।
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किसी भी कॉलेज में दाखिला लेना 18 साल के बच्चों के लिए दूर का सपना था। चूंकि वह विज्ञान में अच्छी थीं, इसलिए उनके शिक्षकों ने उन्हें आकांशा सुपर 30 परीक्षा में बैठने के लिए कहा। 
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इसी तरह, सेना की सुपर -40 कोचिंग पहल जम्मू और कश्मीर के बच्चों को प्रशिक्षित कर रही है।  2017 में, राज्य के 26 छात्रों ने IIT-JEE मेन्स को क्रैक किया। 9 छात्रों ने सफलतापूर्वक जेईई एडवांस को भी क्वालिफाई किया। बता दें ये छात्र सेना द्वारा श्रीनगर में प्रशिक्षित हैं।
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