मुस्लिम पर्सनल लॉ (Muslim Personal Law), 1937 –
भारतीय संविधान का अनुच्छेद-14 भारत के सभी नागरिकों को कानून का समान संरक्षण देता है, लेकिन बात जब व्यक्तिगत मुद्दों (शादी, तलाक, विरासत, बच्चों की कस्टडी) की आती है तो मुसलमानों के यह मुद्दे मुस्लिम लॉ के अंतर्गत आ जाते हैं। यह कानून बनाने के पीछे मकसद भारतीय मुस्लिमों के लिए एक इस्लामिक कोड तैयार करना था। उस वक्त भारत पर शासन कर रहे अंग्रेजों की कोशिश थी कि वे भारतीयों पर उनके सांस्कृतिक नियमों के अनुसार ही शासन करें। तब से मुस्लिमों के शादी, तलाक, विरासत और पारिवारिक विवादों के फैसले इस अधिनियम के तहत ही होते हैं। इतना ही नहीं, इस एक्ट के मुताबिक सरकार भी व्यक्तिगत विवादों में दखल नहीं कर सकती। भारत में अन्य धर्म समूहों के लिए भी ऐसे ही कानून बनाए गए हैं।