Holika Dahan 2025
- फोटो : Adobe Stock
अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है होलिका दहन
हिरण्यकशिपु ने प्रहलाद को मारने के कई प्रयास किए, लेकिन हर बार विष्णु भगवान ने उसकी रक्षा की। आखिरकार, उसने अपनी बहन होलिका से मदद मांगी, जिसे वरदान था कि आग उसे जला नहीं सकती। योजना के अनुसार, होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान की कृपा से प्रहलाद सुरक्षित बच गया और होलिका जलकर भस्म हो गई। इस घटना को अच्छाई की जीत के रूप में देखा जाता है और तभी से होलिका दहन की परंपरा शुरू हुई।